Farmers Protest: केंद्र के नए कृषि कानूनों को लेकर विरोध कर रहे किसानों वे दावा किया है कि केंद्र सरकार कृषि कानूनों को खारिज करने पर टस से मस नहीं हुई हो रही है. शुक्रवार को सिंघू बॉर्डर पर प्रेस कॉन्फ्रेंस कर किसानों ने कहा कि ये आंदोलन अब निर्णायक दौर में है. Also Read - ट्रैक्टर रैली को लेकर बहस पर किसानों ने कहा- रैली निकालना हमारा अधिकार, हज़ारों लोग इसमें शामिल होंगे

बता दें कि दिल्ली में नववर्ष के मौके पर भीषण शीत लहर के कहर और तापमान के 1.1 डिग्री सेल्सियस पर पहुंचने के बाद भी दिल्ली से लगी सीमाओं पर किसानों का प्रदर्शन जारी है. सरकार और किसान संगठनों के बीच बुधवार को हुई छठे दौर की वार्ता में बिजली संशोधन विधेयक 2020 और एनसीआर एवं इससे सटे इलाकों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग के संबंध में जारी अध्यादेश संबंधी आशंकाओं को दूर करने को लेकर सहमति बनी थी. वार्ता का अगला दौर 4 जनवरी को होना है. Also Read - किसानों की ट्रैक्टर रैली पर सुनवाई, सुप्रीम कोर्ट ने कहा- सरकार के पास इसे निपटाने के सभी अधिकार, पुलिस को जो करना है करे

सिंघू बॉर्डर पर स्वराज इंडिया के योगेंद्र यादव ने कहा, “किसानों के ये आंदोलन अब निर्णायक दौर में है, 30 तारीख की वार्ता के बारे में मैं इतना ही कहूंगा कि अभी तो पूंछ निकली है, हाथी निकलना अभी बाकी है. MSP को क़ानूनी अधिकार मिलने और तीनों कृषि क़ानूनों को खारिज करने पर सरकार टस से मस नहीं हुई है.” Also Read - Kisan Andolan: 26 जनवरी को ट्रैक्टर मार्च निकालने पर अडिग किसान यूनियन, आज सुनवाई करेगा उच्चतम न्यायालय

उन्होंने कहा, “4 तारीख (4जनवरी) को हमारी वार्ता है, अगर परिणाम संतोषजनक नहीं निकलते हैं तो 6 तारीख को KMP राजमार्ग पर मार्च किया जाएगा. 6 तारीख से 20 तारीख तक 2 हफ्ते पूरे देश में देश जागृति अभियान चलाया जाएगा.”

इससे पहले प्रदर्शन कर रहे किसानों के 41 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल के साथ बैठक के बाद केन्द्रीय कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने कहा था कि चार विषयों में से दो मुद्दों पर पारस्परिक सहमति के बाद 50 प्रतिशत समाधान हो गया है और शेष दो मुद्दों पर चार जनवरी को चर्चा होगी.

कृषि मंत्री के इस दावे पर योगेंद्र यादव ने कहा, “50 प्रतिशत मुद्दों को हल करने के दावे झूठे हैं. हमारी दो मुख्य मांगें हैं- तीन कृषि बिलों को खत्म किया जाना चाहिए और न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर कानूनी गारंटी अभी भी लंबित है.”

आंदोलन कर रहे किसान संगठनों ने कहा कि सरकार के साथ अब तक हुई बैठकों में किसानों द्वारा उठाए गए मुद्दों में से केवल पांच प्रतिशत पर चर्चा हुई है. किसान नेताओं ने कहा कि अगर सरकार चार जनवरी को हमारे पक्ष में फैसला नहीं लेती है तो प्रदर्शनकारी किसान संगठन कड़े कदम उठाएंगे. किसान नेता युद्धवीर सिंह ने कहा कि सरकार, किसान संगठनों के बीच चार जनवरी को होने वाली बैठक में ठोस फैसला नहीं हुआ तो हम छह जनवरी को ट्रैक्टर मार्च निकालेंगे.