नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने अवैध बालू खनन में शामिल लोगों के पट्टों के लाइसेंस रद्द करने और गैरकानूनी रेत खनन के मामलों की केन्द्रीय जांच ब्यूरो से जांच के लिए दायर याचिका पर पर बुधवार को केंद्र, सीबीआई और पांच राज्यों को नोटिस जारी किए. एक याचिका में कहा गया है कि रेत के गैरकानूनी खनन में संलिप्त व्यक्तियों पर मुकदमा चलाया जाना चाहिए और ऐसे लोगों के रेत खनन के पट्टे रद्द करने के साथ ही इन मामलों की केंद्रीय जांच ब्यूरो से जांच कराई जानी चाहिए. याचिका में कहा गया कि सीबीआई को देशभर में गैरकानूनी रेत खनन के मामलों की जांच करने का अधिकार प्राप्त है. Also Read - Parkash Singh Badal Returns Padma Award: पंजाब के पूर्व CM प्रकाश सिंह बादल ने पद्म विभूषण सम्‍मान लौटाया

न्यायमूर्ति एस.ए. बोबडे, जस्टिस आर सुभाष रेड्डी और न्यायमूर्ति बी.आर. गवई की तीन सदस्यीय पीठ ने केन्द्र और सीबीआई के साथ ही मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, पंजाब, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु को नोटिस जारी किये. हालांकि, शुरू में पीठ ने याचिकाकर्ता को हाईकोर्ट जाने के लिए कहा था. बालू के अवैध खनन से पर्यावरण को हो रहे नुकसान का मुद्दा उठाते हुए यह याचिका एम अलगारसामी ने दायर की है. Also Read - टेलिरिंग और पेटिंग करते हुए बने गुंडों ने बना लिए थे आलीशान मकान, अब प्रशासन ने ढहाए

याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता प्रशांत भूषण और प्रणव सचदेव ने बहस के दौरान कहा कि इन राज्यों में आवश्यक पर्यावरण संबंधी मंजूरी के बगैर ही रेत का खनन हो रहा है. इस तरह का अवैध खनन पर्यावरण पर प्रतिकूल असर डालने के साथ ही आसपास के इलाकों की पारिस्थितिकी को नुकसान पहुंचा रहा है. Also Read - किसानों और केंद्र के बीच की वार्ता से पहले आज पंजा‍ब के CM अमरिंदर सिंह केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मिलेंगे

इस पर पीठ ने प्रशांत भूषण से कहा कि उन्हें पहले हाईकोर्ट चाहिए था. पीठ ने कहा, हम उच्च न्यायालय के आदेश का लाभ उठाना चाहते हैं ताकि हम सही तरीके से इस मुद्दे पर निर्णय कर सकें. लेकिन बाद में पीठ ने याचिका पर नोटिस जारी किए.

भूषण ने कहा कि संबंधित प्राधिकारियों ने अनिवार्य पर्यावरण योजना और मंजूरी के बगैर ही खनन की अनुमति दे रखी है और रेत के गैरकानूनी खनन की वजह से पर्यावरण बुरी तरह खराब हो गया है. भूषण ने कहा, यह (रेत का गैरकानूनी खनन) देश भर में एक बड़ी समस्या है और इसका समाधान करने की आवश्यकता है.

याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका में देश की तमाम नदियों और उनके किनारों पर रेत के गैरकानूनी खनन से उत्पन्न स्थिति को रेखांकित करते हुये दावा किया है कि रेत के खनन को नियंत्रित करने की जिम्मेदारी राज्यों की है, लेकिन वे इस गैरकानूनी गतिविधि पर अंकुश लगाने में विफल रहे हैं.

याचिका में कहा गया है कि इस तरह के रेत के गैरकानूनी खनन की वजह से पर्यावरण पर प्रतिकूल असर पड़ने के अलावा नागरिकों के जीने का अधिकार भी गंभीर रूप से प्रभावित हो रहा है. यही नहीं, इसकी वजह से देश में कानून व्यवस्था की स्थिति भी बिगड़ी है.

याचिका में प्राधिकारियों को यह निर्देश देने का अनुरोध किया गया है कि 2006 की पर्यावरण प्रभाव आकलन संबंधी अधिसूचना के अनुरूप पर्यावरण प्रभाव के आकलन, पर्यावरणीय प्रबंधन योजना और सार्वजनिक परामर्श के बगैर रेत खनन की किसी भी परियोजना को अनुमति नहीं दी जाए.