नई दिल्ली: लोकसभा चुनाव के बाद से अपने इस्तीफे को लेकर बनी असमंजस की स्थिति पर विराम लगाते हुए राहुल गांधी ने बुधवार को अपने त्यागपत्र की औपचारिक रूप से घोषणा कर दी और कहा कि उन्होंने पार्टी की भविष्य की तरक्की के लिए यह कदम उठाया है. उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी नए अध्यक्ष के चयन के लिए समूह गठित करे, क्योंकि उनके लिए यह उपयुक्त नहीं है कि इस प्रकिया में शामिल हों. राहुल गांधी ने एक चार पेज का अंग्रेजी में लिखा हुआ पत्र ट्वीट किया है. राहल ने अपने टि्वटर अकाउंट से अपने पद कांग्रेस अध्‍यक्ष को भी हटा दिया है. राहुल ने ट्वीट में लिखा, मैं कांग्रेस पार्टी के अध्‍यक्ष के तौर 2019 के चुनावों में हुए नुकसान की जिम्‍मेदारी लेता हूं. हमारी पार्टी के भविष्य की तरक्की के लिए जवाबदेही होना महत्वपूर्ण है. इसी कारण से मैंने कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफा दिया है. Also Read - CBSE Board Exams Latest Updates: कोरोना के कहर के बीच क्या टल जाएगी बोर्ड परीक्षा? राहुल, प्रियंका, सोनू सूद समेत कई हस्तियों ने की यह अपील

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गांधी ने एक बयान में कहा, ”उस पार्टी का सेवा करना मेरे लिए सम्मान की बात है जिसके मूल्यों और विचारों ने जीवनशक्ति के रूप में हमारे सुन्दर देश की सेवा की है. मुझ पर देश और संगठन का कर्ज है.”

राहुल ने कहा, कांग्रेस अध्यक्ष के तौर पर 2019 के चुनाव की हार की जिम्मेदारी मेरी है. हमारी पार्टी के भविष्य की तरक्की के लिए जवाबदेही होना महत्वपूर्ण है. इसी कारण से मैंने कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफा दिया है. राहुल ने पत्र में कहा, मेरी लड़ाई सिर्फ राजनीतिक सत्ता के लिए कभी नहीं रही है. भाजपा के प्रति मेरी कोई घृणा या आक्रोश नहीं है, लेकिन मेरी रग-रग में भारत का विचार है.

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राहुल ने आरएसएस पर निशाना साधते हुए कहा, हमारे देश के संस्थागत ढांचे पर कब्जा करने का आरएसएस का घोषित लक्ष्य पूरा हो चुका है. हमारा लोकतंत्र बुनियादी तौर पर कमजोर हो गया है. अब इसका वास्तविक खतरा है कि आगे चुनाव महज रस्म अदायगी भर रह जाए.

बता दें कि लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की करारी हार के बाद 25 मई को हुई पार्टी कार्य समिति की बैठक में राहुल गांधी ने अध्यक्ष पद से इस्तीफे की पेशकश की थी. हालांकि कार्य समिति के सदस्यों ने उनकी पेशकश को खारिज करते हुए उन्हें आमूलचूल बदलाव के लिए अधिकृत किया था. इसके बाद से गांधी लगातार इस्तीफे पर अड़े हुए थे. हालांकि, पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं ने उनसे आग्रह किया था कि वह कांग्रेस का नेतृत्व करते रहें.