नई दिल्‍ली: भारतीय मौमस विभाग (India Meteorological Department ) ने इस साल 2020 में दक्षिण-पश्चिम में  होने वाली लंबी अवधि के लिए मानसूनी बारिश का पूर्वानुमान जारी किया है. आईएमडी ने बताया कि उत्तर भारत में “सामान्य से ज्यादा” बारिश हो सकती है, जबकि मध्य भारत और दक्षिणी प्रायद्वीप में “सामान्य” बरसात का अनुमान है. Also Read - विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला ने की अमेरिकी उप विदेशमंत्री से बात, हिंद-प्रशांत, कोविड-19 से निपटने को लेकर हुई चर्चा

बहरहाल, पूर्वी और पूर्वोत्तरी भारत में देश के अन्य हिस्सों की तुलना में कम बारिश होने की संभावना है. अगर मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार देश के अधिकतर हिस्‍सों में अच्‍छी बारिश के अनुमान सही निकला तो किसान खुश हो जाएंगे. Also Read - Bubonic Plague: चीन में बढ़ा ब्यूबोनिक प्लेग का खतरा, क्या भारत को डरने की जरूरत है?

आईएमीडी के मुताबिक, देश में साल 2020 में साउथ वेस्‍ट मानसून के मौसम में बारिश सामान्‍य रहेगी. बता दें कि आईएमडी के मुताबिक, नॉर्मल बारिश ( लंबे समय के लिए 96% से 104%) होने का अनुमान है. बता दें कि आज ही केरल में मानसून पहुंचा है और राजधानी तिरुअनंतपुरम में भारी बारिश हो रही है. Also Read - चीन से तनाव के बीच बॉर्डर पर तेजी से इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलप कर रहा है भारत, राजनाथ सिंह ने की समीक्षा

2020 के दक्षिण-पश्चिम मानसून के मौसम (जून से सितंबर) के लिए पूरे देश में वर्षा सबसे अधिक सामान्य (96% से 104% लंबी अवधि के औसत होने की संभावना है. मात्रात्मक रूप से, पूरे देश में मानसून के मौसम की बारिश 102% होने की संभावना है जो 4% की मॉडल त्रुटि के साथ LPA.

क्षेत्रवार, उत्तर-पश्चिम भारत में दीर्घावधि औसत (एलपीए) का 107%, मध्य भारत के दीर्घावधि औसत का 103%, दक्षिण प्रायद्वीप के ऊपर दीर्घावधि औसत का 102% और दीर्घावधि औसत का 96% अधिक होने की संभावना है. सभी एक मॉडल त्रुटि के साथ 8% कम या ज्‍यादा हो सकती है.

पूरे देश में मासिक वर्षा जुलाई में 103% और अगस्त के दौरान दीर्घावधि औसत बारिश 97% होने की संभावना है, दोनों में 9% कम या ज्‍यादा हो सकती है.

वर्तमान में, तटस्थ स्थितियां भूमध्यरेखीय प्रशांत क्षेत्र में शीत एनसो (ENSO) प्रचलित हैं और हिंद महासागर द्विध्रुव(IOD) की स्थितियां व्याप्त हैं. वैश्विक मॉडल संकेत दे रहे हैं कि कुछ कारणों के साथ मानसून के मौसम में ENSO की स्थिति प्रबल होने की संभावना है. मॉनसून सीज़न के बाद के भाग में कमजोर ला नीना स्थितियां जारी रहेंगी.

2020 दक्षिण पश्चिम मॉनसून वर्षा लिए दूसरे चरण का पूर्वानुमान
मात्रात्मक रूप से, देश के लिए 2020 मानसून का मौसम (जून से सितंबर) बारिश के रूप में लंबी अवधि के औसत (एलपीए) के 102% होने की संभावना है, जिसमें मॉडल की त्रुटि% 4% है. पूरे देश में 1961-2010 की अवधि के लिए लंबी अवधि की औसत (एलपीए) वर्षा 88 सेमी है. देश भर में मॉनसून सीज़न (जून से सितंबर) के लिए 5 श्रेणी की संभावना पूर्वानुमान नीचे दिए गए हैं. मानसून की वर्षा में कमी होने के लिए संभावना का पूर्वानुमान बहुत कम संभावना (केवल 5%) का सुझाव देता है. दूसरी ओर, मानसून की वर्षा सामान्य (41%) होने की संभावना बहुत अधिक है.

मानसून ने केरल में दी दस्तक
दक्षिण पश्चिम मानसून ने केरल में दस्तक दे दी है. इसी के साथ बरसात का चार महीने लंबा मौसम शुरू हो गया. भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने बताया कि उत्तर भारत में “सामान्य से ज्यादा” बारिश हो सकती है, जबकि मध्य भारत और दक्षिणी प्रायद्वीप में “सामान्य” बरसात का अनुमान है. बहरहाल, पूर्वी और पूर्वोत्तरी भारत में देश के अन्य हिस्सों की तुलना में कम बारिश होने की संभावना है.

दक्षिण-पश्चिम मानसून से 75 फीसदी बारिश होती है
आईएमडी के महानिदेशक मृत्युंजय महापात्र ने कहा, ‘ दक्षिण-पश्चिम मानसून ने केरल में दस्तक दे दी.’ जून से सितंबर तक चलने वाले इस मानसून की वजह से देश में 75 फीसदी बारिश होती है.मौसम का पूर्वानुमान लगाने वाली निजी एजेंसी स्काईमेट ने 30 मई को मानसून आने की घोषणा की थी, लेकिन आईएमडी ने इससे इनकार करते हुए कहा था कि इस तरह की घोषणा के लिए अभी स्थितियां बनी नहीं हैं.