वाशिंगटन, 30 नवंबर | अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने खाद्य सुरक्षा के लिए सरकारी अनाज भंडारण पर विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) में हुए समझौते की सराहना की है। इस समझौते के बाद व्यापार सुविधा समझौते (टीएफए) पर हस्ताक्षर का रास्ता और साफ हो गया है, जिससे वैश्विक सीमा शुल्क नियम आसान हो सकेंगे। आईएमएफ की प्रबंध निदेशक क्रिस्टीन लगार्दे ने एक बयान में कहा, “मैं 27 नवंबर को डब्ल्यूटीओ की महापरिषद द्वारा उस फैसले को अंगीकृत किए जाने का स्वागत करती हूं, जो खाद्य सुरक्षा के लिए सरकारी अनाज भंडारण, टीएफए और बाली दौर के बाद के कार्यो से संबंधित है।”

उन्होंने कहा, “इस फैसले से एक बार फिर अंतर्राष्ट्रीय बिरादरी की मुक्त व्यापार प्रणाली में निष्ठा की पुष्टि हुई है। इससे दूसरे क्षेत्रों में भी बहुपक्षीय व्यापार वार्ताओं पर आगे बढ़ने का अवसर मिला है, जो वैश्विक विकास, रोजगार सृजन और गरीबी घटाने के लिए अत्यधिक जरूरी है।” टीएफए को गुरुवार को जेनेवा में डब्ल्यूटीओ के 160 देशों ने मंजूरी दे दी। इसका मकसद सीमा शुल्क नियमों को सरल करना है, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था में सालाना 1,000 अरब डॉलर से अधिक की बचत होगी।

गत सप्ताह फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (फिक्की) द्वारा आयोजित एक बैठक में अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि माइकल फ्रोमैन ने कहा था, “टीएफए एक महत्वपूर्ण समझौता है। इससे विकसित देशों को कारोबार करने में 10 फीसदी और विकासशील देशों को 14 फीसदी बचत होगी। इससे लाखों डॉलर अंतर्राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में जुड़ जाएंगे।” भारत ने खाद्य सुरक्षा के लिए सरकारी अनाज भंडारण पर सिर्फ चार साल के लिए नहीं, बल्कि स्थायी समाधान की मांग की है।

टीएफए पर भारत की आपत्ति को वापस लेने के लिए अमेरिका सहित कई देशों का दबाव है। भारत की आपत्ति किसी भी देश के लिए कुल अनाज उत्पादन का 10 फीसदी कृषि सब्सिडी और 10 फीसदी भंडारण की डब्ल्यूटीओ की सीमा को लेकर है। भारत में 2013 में पारित खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत करीब 70 फीसदी आबादी को सस्ते दर पर अनाज देने का वादा किया गया है और इसका अनुपालन करने से भारत को डब्ल्यूटीओ की सीमा का उल्लंघन करना पड़ता, जिससे देश पर जुर्माना लगाया जाता।

डब्ल्यूटीओ में ‘पीस क्लाज’ नामक प्रावधान पर भी सहमति बन गई है। इसके तहत यदि कोई देश सब्सिडी सीमा का उल्लंघन करता है, तो उसके खिलाफ डब्ल्यूटीओ के विवाद निपटारा निकाय में 2017 तक नहीं जाया जा सकता है। टीएफए डब्ल्यूटीओ के इतिहास में पहला बहुपक्षीय समझौता है। अब सदस्य देशों के संसद द्वारा इसकी पुष्टि की जाएगी। इसके बाद ही यह समझौता प्रभावी होगा। अगले वर्ष तक सभी देशों के संसद में इसे मंजूरी मिल जाने की संभावना है।