नई दिल्ली. कर्नाटक चुनाव के नतीजे आ रहे हैं. रुझानों से स्पष्ट है कि वहां बीजेपी की सरकार बनने जा रही है. कर्नाटक के रास्ते बीजेपी ने एक बार फिर दक्षिण की राजनीति में दस्तक दी है. अगले साल होने वाले आम चुनावों में इससे उसका आत्मविश्वास बढ़ेगा और पार्टी को एक नया आधार मिलता दिख रहा है. हालांकि, जैसे ही कर्नाटक में बीजेपी की जीत की बात सामने आने लगी सोशल साइट्स से लेकर तमाम जगहों पर ये कहा जाने लगा है कि कर्नाटक में जिसकी सरकार बनती है, उस पार्टी की केंद्र में सरकार नहीं बनती है. ये सरासर गलत है. इतिहास में ऐसा कई बार हुआ है कि कर्नाटक में जिस पार्टी की सरकार बनी है, केंद्र में भी उसकी सरकार बनी है. Also Read - अहमद पटेल कांग्रेस के एक मजबूत स्तंभ थे जो मुश्किल दौर में हमेंशा पार्टी के साथ खड़े रहे: राहुल गांधी

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बात साल 1978 के चुनाव से करते हैं. इमरजेंसी के बाद पूरे देश में कांग्रेस की हालत खराब थी. इंदिरा गांधी की छवि खराब हो गई थी. ऐसे में कर्नाटक से ही कांग्रेस को संजीवनी मिली थी. राज्य के चुनाव में कांग्रेस को जीत मिली थी और डी देवराज उर्स सीएम बने थे. इसके बाद साल 1980 के लोकसभा चुनाव में इंदिरा गांधी का जादू एक बार फिर बोला और उन्होंने केंद्र में सरकार बनाई. Also Read - 36 घंटे के भीतर गिर गए दो मजबूत आधार स्तंभ, मुश्किलों में अब किसे आवाज देगी कांग्रेस....

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जनता पार्टी का दौर

80 के दशक में एक बार फिर तेजी से देश की राजनीति बदली. जनता पार्टी एक बार फिर देश में पकड़ बना रही थी. साल 1983 और 85 के चुनाव में उसे कर्नाटक में शानदार जीत मिली. रामकृष्ण हेगड़े राज्य के सीएम बने. इससे जनता पार्टी का मनोबल काफी बढ़ा और 1989 में जोड़-तोड़ की राजनीति में जनता पार्टी सरकार बनाने में कामयाब रहे और वीपी सिंह देश के प्रधानमंत्री बने.

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नरसिम्हा रॉव का समय

1989 में ही कर्नाटक की राजनीति ने एक बार फिर करवट ली. वहां इस बार फिर से कांग्रेस की सरकार बनी. इसका असर राष्ट्रीय राजनीति पर पड़ा. साल 1991 में कांग्रेस की सरकार बनी और नरसिम्हा रॉव देश के प्रधानमंत्री बने.

देवगौड़ा का दौरा

दक्षिण की राजनीति में 1994 के आस-पास से ही देवगौड़ा का दौर आना शुरू हो गया था. जनता दल के वे चेहरा बने और 1994 में कर्नाटक के मुख्यमंत्री. देवगौड़ा यहीं नहीं रुके और उन्होंने पूरे देश में अभियान चलाया. जोड़-तोड़ का दौर चल ही रहा था, ऐसे में जे एच पाटिल को राज्य की बागडौर सौंप देवगौड़ा साल 1996 में देश के प्रधानमंत्री बने.