नई दिल्‍ली: केंद्र में सत्‍तारूढ़ नरेंद्र मोदी सरकार ने पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह की एसपीजी सुरक्षा हटाने का निर्णय समीक्षा के बाद लिया है. इस समय वर्तमान में ये एपीजी सुरक्षा पीएम नरेंद्र मोदी के अलावा, सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी को प्राप्‍त है. बता दें कि विशेष सुरक्षा समूह (एसपीजी) संरक्षण देश में दिया जाने वाला सर्वोच्च सुरक्षा कवच है. डॉ. सिंह से एसपीजी सुरक्षा वापस लेने का फैसला विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों की समीक्षा करने के बाद किया गया है. पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद 1985 में एसपीजी का गठन किया गया था. समय-समय एक सरकार ने पूर्व प्रधानमंत्र‍ियों की इस सुरक्षा को हटाती रहीं हैं. एक बार तो केंद्र में अटल बिहारी वाजपेयी सरकार ने देश के तीन पूर्व प्रधानमंत्र‍ियों की एसपीजी सुरक्षा हटाने का निर्णय लिया था.

अधिकारियों ने सोमवार को बताया कि 2004 से 2014 तक देश के प्रधानमंत्री रहे सिंह से एसपीजी सुरक्षा वापस लेने का फैसला विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों द्वारा समीक्षा किए जाने के बाद किया गया है. एसपीजी अधिनियम 1988 के अनुसार, 2014 में प्रधानमंत्री पद से हटने के बाद सिंह को एक वर्ष तक एसपीजी सुरक्षा हासिल करने का अधिकार था. सिंह और उनकी पत्नी गुरशरण कौर को पेश आ रहे खतरों की समीक्षा के बाद उसे वार्षिक तौर पर बढ़ाया गया था. सिंह की बेटी ने 2014 में स्वेच्छा से एसपीजी सुरक्षा लेने से इनकार कर दिया था.

मनमोहन सिंह की SPG सुरक्षा हटी, अब पीएम मोदी सहित सिर्फ 4 VVIP को ऐसी सिक्योरिटी

गृह मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने कहा, ”वर्तमान सुरक्षा कवर समीक्षा खतरे की आशंका पर आधारित एक नियमित एवं पेशेवराना कवायद है जो विशुद्ध रूप से सुरक्षा एजेंसियों द्वारा पेशेवर मूल्यांकन पर आधारित है. डॉक्टर मनमोहन सिंह को ‘जेड प्लस’सुरक्षा मिलती रहेगी.”

विशेष सुरक्षा समूह (एसपीजी) द्वारा प्रदान की गई सुरक्षा वापस लेने का निर्णय कैबिनेट सचिवालय और गृह मंत्रालय की विभिन्न खुफिया एजेंसियों से मिली सूचनाओं के आधार सहित तीन महीने तक समीक्षा किए जाने के बाद लिया गया. विशेष सुरक्षा समूह (एसपीजी) संरक्षण देश में दिया जाने वाला सर्वोच्च सुरक्षा कवच है.

समय-समय पर ऐसे होते रहे बदलाव
– पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद 1985 में एसपीजी का गठन किया गया था.
– प्रधानमंत्री की सुरक्षा के लिए संसद ने 1988 में एसपीजी विधेयक पारित किया और फिर उसके बाद यह कानून बना.
– 1988 में जब एसपीजी विधेयक पारित किया गया, उस समय इस एक्‍ट के तहत पूर्व प्रधानमंत्रियों को एसपीजी सुरक्षा नहीं दी जाती थी.

– वीपी सिंह जब 1989 में सत्ता में आए तो उन्‍होंने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की एसपीजी सुरक्षा हटा दी थी.

– 1991 में राजीव गांधी की हत्या के बाद एसपीजी अधिनियम संशोधन किया गया.
– राजीव हत्‍याकांड के बाद किए गए संशोधन के बाद बाद सभी पूर्व प्रधानमंत्रियों और उनके परिवार को करीब 10 वर्ष तक एसपीजी सुरक्षा मिलने लगी.

– 1999 में केंद्र में सत्‍ता में आई अटल बिहारी वाजपेयी सरकार ने तीन पूर्व पीएम की एसपीजी सुरक्षा की जरूरत की समीक्षा की.
– समीक्षा के बाद अटल सरकार ने पूर्व प्रधान मंत्री पी. वी. नरसिम्हा राव, एच. डी. देवेगौड़ा और आई. के. गुजराल से एसपीजी सुरक्षा वापस लेने का निर्णय लिया था.

– वाजपेयी सरकार ने 2003 में एसपीजी अधिनियम में फिर संशोधन किया
– 2003 के संशोधन से पूर्व प्रधानमंत्रियों को पद छोड़ने के बाद 10 वर्ष की जगह केवल एक वर्ष तक एसपीजी सुरक्षा मिलने लगी.
– 2003 एसपीजी एक्‍ट में संशोधन के बाद सरकार द्वारा समीक्षा किए जाने के बाद इसे बढ़ाए जाने का निर्णय लिया जाने लगा.