नई दिल्ली। पाकिस्तान में जासूसी के आरोप में फांसी की सजा पाने वाले पूर्व भारतीय नौसेना अधिकारी कुलभूषण जाधव के मामले पर नीदरलैंड्स के द हेग स्थित इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस (आईसीजे) में सोमवार को सुनवाई हुई. भारत की ओर से पूर्व सॉलिसिटर जनरल हरीश साल्वे के नेतृत्व में एक कानूनी टीम ने इस मामले में अपना पक्ष रखा. आईसीजे में सुनवाई के दौरान भारत ने इन बातों को उठाया-

भारत की ओर से कहा गया कि जाधव पर लगाए गए आरोप गलत हैं. भारत के तरफ से कहा गया कि पूर्व नौसैनिक अधिकारी से राजनयिक संपर्क के आवेदन को लगातार 16 बार खारिज कर दिया. इसके अलावा पाकिस्तान ने जाधव के परिवार के वीजा आवेदन का भी कोई जवाब नहीं दिया.

भारत की ओर से कहा गया कि कुलभूषण जाधव पर दबाव बनाकर उसका कबूलनामा लिया गया. साथ ही पाकिस्तान ने कुलभूषण जाधव मामले में विएना संधि का उल्लंघन किया. भारत ने पाकिस्‍तान पर आरोप लगाया है कि उसने कुलभुषण जाधव को काउंसलर से मिलने न देकर विएना संधि को तोड़ा है.

भारत की ओर से पूर्व सॉलिसिटर जनरल हरीश साल्वे ने कहा कि 23 मार्च 2016 को असंवैधानिक तरीके से भारतीय नागरिक कुलभूषण जाधव को पाकिस्तान ने गिरफ्तार किया. साल्वे ने कहा कि कुलभूषण जाधव केस में कांसुलर एक्सेस तक नहीं दिया गया. हमारे पास इसके लिए प्रेस रिपोर्ट की कॉपी है.

हरीश साल्वे ने कहा कि कुलभूषण जाधव को किडनैप किया गया. उसके बाद दबाव बनाकर कबूलनामा रिकॉर्ड किया गया. कांसुलर ऐक्सेस नहीं दिया गया. पाकिस्तान ने सीधे पर विएना संधि का उल्लंघन किया है.

साल्वे ने कहा कि पाकिस्तान ने जाधव को राजनयिक मदद मुहैया कराने के आग्रह को 16 बार इनकार कर दिया, जो अंतर्राष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने कूटनीतिक नियमों का पालन नहीं किया. भारत और पाकिस्तान संयुक्त राष्ट्र के सदस्य हैं.

साल्वे ने कहा कि मौजूदा हालात गंभीर हैं और यही वजह है कि भारत ने आईसीजे का हस्तक्षेप चाहा है. भारत ने कुलभूषण जाधव की सजा तत्काल निलंबित करने का आह्वान किया और कूटनीतिक पहुंच की वियेना कन्वेंशन का उल्लंघन करने का पाकिस्तान पर आरोप लगाया.

बता दें कि पाकिस्तानी सैन्य अदालत द्वारा जासूसी के आरोप में कुलभूषण जाधव को मौत की सजा सुनाए जाने के खिलाफ भारत ने पिछले सप्ताह आईसीजे से संपर्क किया था. भारत ने 8 मई को इस अंतर्राष्ट्रीय अदालत में याचिका दायर की थी.