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- In 17th Lok Sabha Election 15 Parties Get Fewer Votes Than Nota
'मोदी-लहर' ने NOTA की भी हैसियत घटा दी, 15 पार्टियों को तो इससे भी कम वोट मिले
2014 के चुनाव में नोटा के तहत 1.08 फीसदी वोट पड़े थे, इस बार यह आंकड़ा 1.06 प्रतिशत रहा.
नई दिल्ली. आप इसे ‘मोदी-लहर’ कहें या मतदाताओं का रुख, हाल ही में 17वीं लोकसभा के लिए हुए चुनाव (Lok Sabha Election 2019) में NOTA के तहत पड़ने वाले वोट की संख्या घट गई. पिछले चुनाव के मुकाबले 2019 के लोकसभा चुनाव में नोटा के तहत पड़े वोटों में हालांकि बहुत मामूली गिरावट ही दर्ज की गई, लेकिन संभवतः यह सत्ताधारी गठबंधन के चुनाव प्रचार का असर था या विपक्षी पार्टियों के प्रति मतदाताओं की उदासीनता, नोटा की हैसियत जरूर घट गई. इसमें भी गौर करने वाली बात यह है कि कई राजनीतिक दलों को तो इससे भी कम वोट मिले हैं. लोकसभा चुनाव लड़ने वाले 36 राजनीतिक दलों में से 15 पार्टियों को नोटा (NOTA) से भी कम वोट मिले. इनमें से कई दलों ने केवल कुछ सीटों पर ही चुनाव लड़ा.
उपरोक्त में से कोई नहीं (None of The Above) विकल्प 2014 के लोकसभा चुनावों में प्रस्तुत किया गया था, जो एक निर्वाचन क्षेत्र में सभी उम्मीदवारों की अस्वीकृति को दर्शाता है. इस आम चुनाव में कुल वोटों का 1.06 प्रतिशत मतदान नोटा को प्राप्त हुआ. वहीं 2014 के चुनावों में, कुल मतदाताओं में से लगभग 1.08 प्रतिशत ने नोटा के विकल्प को चुना गया था. केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) ने बिहार में छह लोकसभा सीटें जीतीं, लेकिन उन्हें कुल वोटों में से केवल 0.52 प्रतिशत वोट मिले.
तीन सीटों वाली पार्टियां – मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) को (0.01 प्रतिशत वोट), जम्मू और कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस (0.05 प्रतिशत वोट) और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (0.26 प्रतिशत वोट)- को नोटा की तुलना में कम वोट मिले. शिरोमणि अकाली दल (शिअद), ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (कपा) और अपना दल ने दो-दो लोकसभा सीटें जीतीं. लेकिन उन्हें अलग से डाले गए कुल वोटों का एक फीसदी से भी कम हिस्सा मिला. लोकसभा में एक सीट के साथ सात राजनीतिक दलों ने वोट के आधे से भी कम हिस्से को हासिल किया हैं.
ऑल झारखंड स्टूडेंट्स यूनियन (0.11 फीसदी वोट) और रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी (0.12 फीसदी वोट) को 0.10 फीसदी से ज्यादा वोट मिले, जबकि पांच पार्टियों को इससे कम वोट मिले. केरल कांग्रेस (मणि) को कुल मतों का 0.07 प्रतिशत, मिजो नेशनल फ्रंट को 0.04 प्रतिशत और नागा पीपुल्स फ्रंट को 0.06 प्रतिशत वोट मिले. सिंगल-सीट बैगर्स नेशनलिस्ट डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी को 0.08 प्रतिशत और सिक्किम क्रांतिकारी मोर्चा को कुल मतों का 0.03 प्रतिशत प्राप्त हुआ.
(इनपुट – एजेंसी)
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