नई दिल्‍ली: चीन से बढ़े तनाव के बीच देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आज रविवार को सीडीएस जनरल बिपिन रावत और तीनों सेनाओं के प्रमुखों के साथ लद्दाख की स्थिति को लेकर समीक्षा की और आगे की रणनीति पर जरूरी मंत्रणा की है. इस बैठक में भारतीय बलों को पूर्वी लद्दाख और अन्य सेक्टरों में चीन के किसी भी दुस्साहस का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए पूरी तरह से तैयार रहने को कहा गया है. Also Read - पीएम मोदी के बयान से 'विस्तारवादी' चीन को लगी मिर्ची, कहा- 'हमने 12 पड़ोसी देशों के साथ सीमा विवाद सुलझाया'

रक्षा मंत्री ने तीनों सेनाओं के प्रमुखों और सीडीएस से यह मीटिंग तब की है, जब वे कम रूस की राजधानी में 24 जून को आयोजित होने वाली विक्‍ट्री डे मिलिट्री परेड के आयोजन में शामिल होने के लिए जा रहे हैं. Also Read - लद्दाखवासी कहते हैं चीन ने हमारी जमीन ली और प्रधानमंत्री कहते हैं नहीं, कोई तो झूठ बोल रहा है: राहुल

सूत्रों ने बताया रक्षा मंत्री की समीक्षा बैठक के बाद कहा कि चीन के साथ लगती सीमा की रक्षा के लिए भारत अब से अगल सामरिक तरीके अपनाएगा. इस मीटिंग में शीर्ष सैन्य अधिकारियों को जमीनी सीमा, हवाई क्षेत्र और रणनीतिक समुद्री मार्गों में चीन की गतिविधियों पर कड़ी नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं. भारतीय बलों को पूर्वी लद्दाख और अन्य सेक्टरों में चीन के किसी भी दुस्साहस का मुंह तोड़ जवाब देने के लिए पूरी तरह से तैयार रहने को कहा गया है. Also Read - इतिहास गवाह है कि विस्तारवादी ताकतें या तो हार गईं या वापस लौटने के लिए मजबूर हुईं हैं: PM मोदी

सूत्रों के मुताबिक, सशस्त्र बलों को वास्तविक नियंत्रण रेखा पर चीन की सेना के किसी भी प्रकार के आक्रामक रवैए से निपटने के लिए पूरी स्वतंत्रता दी गई है.

रक्षा मंत्री के साथ इस बैठक में प्रमुख रक्षा अध्यक्ष जनरल बिपिन रावत, सेना प्रमुख जनरल एम एम नरवणे,नौसेना प्रमुख एडमिरल करमबीर सिंह और वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल आर के एस भदौरिया ने हिस्सा लिया.

सूत्रों ने बताया कि सिंह ने शीर्ष सैन्य अधिकारियों को जमीनी सीमा, हवाई क्षेत्र और रणनीतिक समुद्री मार्गों में चीन की गतिविधियों पर कड़ी नजर रखने के निर्देश दिए और चीनी सैनिकों के किसी भी दुस्साहस का मुंह तोड़ जवाब देने के लिए सख्त रुख अपनाने को कहा है.

सशस्त्र बलों को दोनों देशों के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा पर चीन की सेना के किसी भी प्रकार के आक्रामक रवैए से निपटने के लिए पूरी स्वतंत्रता दी गई है. सेना और भारतीय वायु सेना ने चीन के किसी भी दुस्साहस से प्रभावी तरीके से निपटने के लिए एलएसी पर अपनी अभियानगत तैयारियों को पहले ही तेज कर दिया है.

बता दें कि 15 जून को पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में चीन के साथ हिंसक झड़प में भारत के 20 सैनिक शहीद हो गए थे और कम से कम 76 सैनिक घायल हो गए थे. इसके बाद से दोनों देशों के बीच तनाव चरम पर है.