कर्नाटक में मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी की सरकार के सामने पैदा सियासी संकट फिलहाल टल गया है. कांग्रेस के कथित बागी विधायक पार्टी में लौट आए हैं. मुख्यमंत्री कुमारस्वामी ने कांग्रेस के बागी विधायकों से बात कर उन्हें मना लिया है. इस तरह राज्य की कांग्रेस-जेडीएस सरकार को गिराने की मुख्य विपक्षी दल भाजपा की कोशिश एक बार फिर नाकाम हो गई है. फिलहाल राज्य की कुमारस्वामी सरकार को कोई खतरा नहीं है. पिछले सात माह में राज्य की कुमारस्वामी सरकार को गिराने की यह दूसरी कोशिश थी. मीडिया रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि भाजपा का ‘ऑपरेशन लोटस’ इस बार भी नाकाम हो गया. कांग्रेस के चार विधायकों के मुंबई और अन्य जगहों पर चले जाने और दो निर्दलीय विधायकों के कुमारस्वामी सरकार से समर्थन वापस लेने की वजह से यह सियासी खेल शुरू हुआ था.

कुमारस्वामी ने संभाली कमान
जो भी हो, फिलहाल कुमारस्वामी की सरकार सुरक्षित है. लेकिन अब सवाल उठ रहे हैं कि इस पूरे सियासी खेल में मोहरा कौन था. क्या सही मायने में भाजपा ने ‘ऑपरेशन लोटस’ के तहत राज्य में अपनी सरकार बनाने की कोशिश की या फिर कांग्रेस के भीतर चल रहे टकराव का भाजपा ने केवल फायदा उठाया.

टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ‘ऑपरेशन लोटस’ के लड़खड़ाने से भले ही कांग्रेस का नेतृत्व राहत महसूस कर रहा हो, लेकिन वास्तविक रूप में यह कांग्रेस के भीतर का टकराव है. इस कारण ही ऐसी स्थिति पैदा हुई है. इस रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से दावा किया गया है कि इस संकट को खत्म कराने के लिए मुख्यमंत्री कुमारस्वामी ने कमान अपने हाथों में ली. उन्होंने एक-एक मामले पर विचार किया और दिल्ली में कांग्रेस के नेतृत्व से संपर्क साधा. इसके साथ ही कथित तौर पर भाजपा के कब्जे में मौजूद कांग्रेस के विधायकों से बात की.

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उपमुख्यमंत्री ने कही ये बात
इस बारे में राज्य के उपमुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता जी परमेश्वर ने भी स्वीकार किया कि इस संकट के लिए उनकी पार्टी ही जिम्मेवार है. उन्होंने कहा कि वह इसे खारिज नहीं कर सकते. यह स्वाभाविक है कि कैबिनेट विस्तार से पहले कुछ लोग मंत्री बनने के लिए अपनी भावनाएं अलग-अलग तरीके से जाहिर करते हैं. लेकिन कुछ समय बाद उनकी इस चाहत का समाधान निकाल लिया जाता है. वे इस बात को समझे हैं कि हर किसी को मंत्री नहीं बनाया जा सकता है. हम भी उन्हें कई तरीकों से समायोजित करने की कोशिश करते हैं.

कांग्रेस के भीतर पैदा इस पूरे सियासी ड्रामे के पटाक्षेप में कुमारस्वामी की अहम भूमिका निभाने को लेकर परमेश्वर ने कहा कि वह राज्य के मुख्यमंत्री हैं न कि किसी पार्टी के नेता. उन्होंने कहा कि निश्चित रूप से उन्होंने विधायकों से संपर्क किया और उनसे बात की.

सूत्रों का यह भी कहना है कि तीन दिनों तक चले इस सत्ता संघर्ष के पीछे कांग्रेस के दो कद्दावर नेताओं के बीच टकराव मुख्य मसला है. पूर्व मुख्यमंत्री सिद्दारमैया और राज्य के जल संसाधन मंत्री डीके शिवकुमार के बीच सब कुछ ठीक नहीं है. कैबिनेट और राज्य के निगमों और बोर्डों के मालदार पदों पर दोनों अपने-अपने लोगों को बैठाना चाहते हैं. इस कारण पार्टी के भीतर ऐसी स्थिति पैदा हुई है.