भारतीय जनता पार्टी (Bhartiya Janta Party) और कांग्रेस  (Congress) के कड़े विरोध के बीच ओडिशा आवश्यक सेवा (रख-रखाव) अधिनियम संशोधन विधेयक (The Odisha Essential Services Maintenance Act (ESMA) Amendment Bill, 2020) सोमवार को विधानसभा में पारित हो गया. इस विधेयक के तहत हड़ताल करने वाले सरकारी कर्मचारियों के लिए कारावास की सजा का प्रावधान किया गया है. Also Read - T-shirts, Jeans Banned in Maharashtra: महाराष्ट्र में जींस, टी-शर्ट पर लगा बैन, सरकारी कर्मियों के लिए तय हुआ ड्रेस कोड

मुख्यमंत्री नवीन पटनायक (Naveen Patnaik) की ओर से गृह राज्य मंत्री डीएस मिश्रा द्वारा सदन में पेश किए गए विधेयक का बीजेपी और कांग्रेस के सदस्यों ने उसके दंडात्मक प्रावधानों के लिए विरोध किया. Also Read - कोरोना काल में भी केजरीवाल सरकार ने कामगारों को दी बड़ी खुशखबरी, बढ़ाया महंगाई भत्ता

ओडिशा आवश्यक सेवा (रख-रखाव) अधिनियम संशोधन विधेयक कहा गया है कि किसी भी व्यक्ति को अवैध हड़तालों के लिए उकसाने और उसे फंडिंग करते हुए पाया जाता है, तो उसे कारावास की सजा होगी. ये सजा एक वर्ष तक की हो सकती है. इसके साथ ही 5,000 रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है.
इसके अलावा नए कानून में दमकल सेवा विभाग, आबकारी विभाग, वन विभाग, कारागार, सुधार और इलेक्ट्रॉनिक्स समेत कई आवश्यक सेवा वाले विभागों में कार्यरत किसी भी व्यक्ति के हड़ताल पर रोक लगाने का भी प्रावधान है. Also Read - Bank strike News Today: आज देशभर के बैंको में इस वजह से बाधित रहेगा कामकाज, आपको काम के लिए होना पड़ सकता है परेशान

विधेयक के प्रावधानों के अनुसार, विधेयक के पारित होने के बाद कर्मचारियों द्वारा बुलाई गई किसी भी हड़ताल को अवैध माना जाएगा.

(PTI इनपुट)