भारतीय जनता पार्टी (Bhartiya Janta Party) और कांग्रेस  (Congress) के कड़े विरोध के बीच ओडिशा आवश्यक सेवा (रख-रखाव) अधिनियम संशोधन विधेयक (The Odisha Essential Services Maintenance Act (ESMA) Amendment Bill, 2020) सोमवार को विधानसभा में पारित हो गया. इस विधेयक के तहत हड़ताल करने वाले सरकारी कर्मचारियों के लिए कारावास की सजा का प्रावधान किया गया है.Also Read - सरकारी कर्मचारियों को जल्द मिलेगी बड़ी खुशखबरी, फिर से महंगाई भत्ता बढ़ा सकती है केंद्र सरकार, जानिए कब

मुख्यमंत्री नवीन पटनायक (Naveen Patnaik) की ओर से गृह राज्य मंत्री डीएस मिश्रा द्वारा सदन में पेश किए गए विधेयक का बीजेपी और कांग्रेस के सदस्यों ने उसके दंडात्मक प्रावधानों के लिए विरोध किया. Also Read - दिल्‍ली हाईकोर्ट ने हड़ताल कर रहीं एम्स की नर्सों को तुरंत काम पर लौटने का दिया निर्देश, निदेशक ने भी की अपील

ओडिशा आवश्यक सेवा (रख-रखाव) अधिनियम संशोधन विधेयक कहा गया है कि किसी भी व्यक्ति को अवैध हड़तालों के लिए उकसाने और उसे फंडिंग करते हुए पाया जाता है, तो उसे कारावास की सजा होगी. ये सजा एक वर्ष तक की हो सकती है. इसके साथ ही 5,000 रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है.
इसके अलावा नए कानून में दमकल सेवा विभाग, आबकारी विभाग, वन विभाग, कारागार, सुधार और इलेक्ट्रॉनिक्स समेत कई आवश्यक सेवा वाले विभागों में कार्यरत किसी भी व्यक्ति के हड़ताल पर रोक लगाने का भी प्रावधान है. Also Read - New Rule For Sarkari Naukri: इस देश में करना है सरकारी नौकरी, तो बढ़ानी होगी दाढ़ी

विधेयक के प्रावधानों के अनुसार, विधेयक के पारित होने के बाद कर्मचारियों द्वारा बुलाई गई किसी भी हड़ताल को अवैध माना जाएगा.

(PTI इनपुट)