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- In The Case Related To Asthana Delhi High Court Seeks Answers From Cbi On Businessmans Petition
Delhi High Court ने अस्थाना से जुड़े मामले में व्यवसायी सना की याचिका पर CBI से मांगा जवाब
सतीश बाबू सना की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता सलमान खुर्शीद ने कहा कि उनकी शिकायत के आधार पर प्राथमिकी दर्ज की गई थी
नई दिल्ली: दिल्ली उच्च न्यायालय ने हैदराबाद के व्यवसायी सतीश बाबू सना की याचिका पर सीबीआई से मंगलवार को जवाब मांगा. उन्होंने अस्थाना की याचिका में खुद को भी पक्षकार बनाए जाने का अनुरोध किया है. याचिका में सना ने रिश्वत संबंधी आरोपों में विशेष निदेशक राकेश अस्थाना के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी को रद्द करने से संबंधित एक मामले में अपना पक्ष रखने की अनुमति देने का अनुरोध किया है.
Satish Sana, a businessman who raised corruption charges against CBI Special Director Rakesh Asthana, has approached Delhi High Court seeking protection from arrest. HC has listed the matter for tomorrow
— ANI (@ANI) December 10, 2018
उन्हें भी सुना जाना चाहिए
न्यायमूर्ति नजमी वजीरी ने अस्थाना, सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा और संयुक्त निदेशक ए के शर्मा से भी सना की याचिका पर जवाब मांगा है. सना ने अस्थाना की याचिका में उसे भी एक पक्ष बनाए जाने का अनुरोध किया है. अस्थाना ने एक याचिका दायर करके प्राथमिकी को रद्द करने का आग्रह किया था. सना की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता सलमान खुर्शीद ने कहा कि उनकी शिकायत के आधार पर प्राथमिकी दर्ज की गई थी. वह जांच में एजेंसी की मदद कर रहे हैं और उन्हें भी सुना जाना चाहिए. सीबीआई की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल विक्रमजीत बनर्जी और अधिवक्ता आर बेहुरा ने कहा कि सना को पक्षकार बनाए जाने की जरूरत नहीं है. सीबीआई के पुलिस उपाधीक्षक देवेन्द्र कुमार को सना के बयान रिकॉर्ड करने में जालसाजी के आरोपों में गिरफ्तार किया गया था.
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सीबीआई के उप-अधीक्षक देवेन्द्र कुमार मांस निर्यातक मोइन कुरैशी से जुड़े मामले में जांच अधिकारी थे. कुमार को 31 अक्टूबर को दिल्ली की एक अदालत ने जमानत दी थी. इससे पूर्व की सुनवाई में अस्थाना ने उच्च न्यायालय में दावा किया था कि उनके तथा कुमार के खिलाफ रिश्वत मामले में प्राथमिकी दर्ज करने के लिए सरकार से पूर्व मंजूरी लेने की आवश्यकता थी. उनके वरिष्ठ अधिकारी ने इसका जोरदार विरोध किया था. अस्थाना की दलीलों का सीबीआई, वर्मा और संयुक्त निदेशक ए के शर्मा ने विरोध किया था. उनकी दलील थी कि किसी मंजूरी की जरूरत नहीं है क्योंकि दोनों अधिकारियों के खिलाफ आरोप उनके कर्तव्य के निर्वहन से संबंधित नहीं हैं या उनके द्वारा किए गए किसी फैसले या सिफारिश से जुड़े हैं. (इनपुट भाषा)
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