नई दिल्‍ली: राजस्‍थान के राज्‍यपाल की जिम्‍मेदारी से मुक्‍त हुए बीजेपी के सीनियर नेता व यूपी के सीएम कल्‍याण सिंह ने विवादित बाबरी ढांचा ढहाये जाने के मामले में मंगलवार को एक बड़ बयान दिया है. सिंह ने कहा, कोई षड़यंत्र नहीं था, जो भी घटा अप्रत्‍याशित था और अभूतपूर्व था. 6 दिसंबर 1992 को हुए वाकये में ढांचा ढहाना करोड़ों हिंदुओं की भावनाओं का उफान था, जो सदियों से दबी हुईं थी.

पूर्व गवर्नर और यूपी तत्‍कालीन सीएम का यह बयान ऐसे मौके में आया है, जब सीबीआई ने एक दिन पहले ही सोमवार को इस मामले में लखनऊ की विशेष सीबीआई अदालत में पूर्व मुख्यमंत्री एवं पूर्व राज्यपाल कल्याण सिंह को बाबरी ढांचा ढहाये जाने के मामले में मुकदमे का सामना करने के मकसद से तलब करने के अनुरोध वाली अर्जी दी थी. अर्जी पेश करते हुए सीबीआई ने कहा कि कल्याण सिंह के खिलाफ 1993 में आरोप पत्र दाखिल किया गया था.

बता दें कि अभी तक कल्याण सिंह आरोपी के रूप में मुकदमे की कार्यवाही में नहीं लाए जा सके थे, क्योंकि उन्हें राज्यपाल होने के नाते संविधान के तहत विशेष अधिकार प्राप्त है.

कोर्ट अयोध्या में छह दिसंबर 1992 को बाबरी मस्जिद ढांचा ढहाने की साजिश के लिए पूर्व उप प्रधानमंत्री लाल कृष्ण आडवाणी, भाजपा के वरिष्ठ मुरली मनोहर जोशी, उमा भारती एवं अन्य आरोपियों के मुकदमे की सुनवाई कर रही है.

अदालत ने सीबीआई से जानकारी ली कि कल्याण सिंह क्या अब राज्यपाल के संवैधानिक पद पर हैं. अदालत ने कहा कि मामले की कार्यवाही चूंकि दिन प्रतिदिन आधार पर चल रही है इसलिए सीबीआई की अर्जी पर 11 सिंतबर 2019 को सुनवाई हो सकती है. सुप्रीम कोर्ट ने हालांकि, सीबीआई को इस बात की अनुमति दी थी कि जब कल्याण सिंह राज्यपाल नहीं रहेंगे, तो उन्हें आरोपी के रूप में पेश किया जा सकता है. सिंह हाल में राजस्थान के राज्यपाल के पद से हटे हैं.

सीबीआई ने अपनी अर्जी में कहा कि सिंह तीन सितंबर 2014 को राज्यपाल पद पर नियुक्त हुए थे और उनके पांच साल का कार्यकाल पूरा हो गया है.  (इनपुट-एजेंसी)