नई दिल्ली: आयकर विभाग ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया कि नेशनल हेराल्ड प्रकरण के सिलसिले में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और सोनिया गांधी के 2011-12 के कर मामले में निर्धारण संबंधी आदेश पारित किया गया है, लेकिन इसे अमल में नहीं लाया गया है. जस्टिस ए के सीकरी, न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर और न्यायमूर्ति एम आर शाह की पीठ ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, उनकी मां सोनिया गांधी और अन्य के मामले में कर मांग संबंधी 31 दिसंबर, 2018 का निर्धारण आदेश रिकार्ड में पेश करने को कहा. इससे पहले, आयकर विभाग ने यह रिकार्ड में पेश करने पर जोर दिया था. पीठ ने कहा कि इसके आधार पर वह मामले के गुणदोष पर कोई राय नहीं बनाएगा.

बता दें कि यह मामला नेशनल हेराल्ड से संबंधित है, जिसमें कांग्रेस नेताओं के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही चल रही है.

शीर्षकोर्ट की बेंच ने सोनिया गांधी और राहुल गांधी को एक हलफनामा दाखिल करने और 31 दिसंबर 2018 के जारी सीबीडीटी का एक सर्कुलर चार सप्ताह के भीतर पेश करने का निर्देश दिया, जिसमें संपत्ति के मूल्यांकन पर करों के बारे में स्पष्टीकरण दिया गया था परंतु चार जनवरी को इसे वापस ले लिया गया था.

न्यायालय ने आयकर विभाग को कांग्रेस नेताओं द्वारा दाखिल किए जाने वाले हलफनामे और सर्कुलर का इसके बाद एक सप्ताह में जवाब दाखिल करने का निर्देश देते हुए मामले को 29 जनवरी के लिए सूचीबद्ध कर दिया.

राहुल और सोनिया गांधी की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता पी चिदंबरम ने कहा कि सीबीडीटी ने 31 दिसंबर को एक सर्कुलर जारी कर आय कर कानून के प्रावधान के तहत एक कंपनी के शेयरों के मामले में स्पष्टीकरण दिया था. परंतु चार दिन बाद ही इसे यह कहते हुए वापस ले लिया कि मामला अदालत में है.

चिदंबरम ने कहा कि वह यह सर्कुलर न्यायालय में पेश करना चाहते हैं, परंतु सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने इस पर आपत्ति की. मेहता का कहना था कि राहुल और सोनिया गांधी को कोई भी सामग्री रिकार्ड में दाखिल करने से पहले इसकी वजह बताते हुए हलफनामा देना होगा.