भारत पश्चिम नदी परियोजना के आंकड़े पाकिस्तान को मुहैया कराने के लिए हुआ राजी

भारत और पाकिस्तान के सिंधु जल स्थाई आयोग के आयुक्तों ने इस्‍लामाबाद में आयोजित PIC की 117 वीं बैठक में हिस्‍सा लिया

Published date india.com Published: March 3, 2022 5:49 PM IST
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(फोटो प्रतीकात्‍मक)

इस्लामाबाद: सिंधू जल स्थाई आयोग (Permanent Indus Commission) यानि (पीसीआईडब्ल्यू) के तहत भारत-पाकिस्तान (India-Pakistan) के अधिकारियों के बीच हुई वार्षिक बैठक के दौरान भारत ने विभिन्न पश्चिमी पनबिजली परियोजनाओं पर पाकिस्तान को आंकड़े मुहैया कराने पर सहमति जताई है. भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा. भारत और पाकिस्तान के सिंधु आयुक्तों से युक्त स्थायी सिंधु आयोग (PIC) की 117 वीं बैठक 1-3 मार्च, 2022 को इस्लामाबाद, पाकिस्तान में आयोजित की गई थी. स्थायी सिंधु आयोग (PIC) की अंतिम बैठक 23-24 मार्च, 2021 को नई दिल्ली में आयोजित की गई थी.

भारत और पाकिस्तान के बीच 1-3 मार्च तक स्थायी सिंधु आयोग (पीसीआईडब्ल्यू) की वार्षिक बैठक हुई जिसमें दोनों देशों के अधिकारियों ने मौजूदा मौसम के दौरान बाढ़ प्रवाह की जानकारी सहित पकाल दुल, किरू तथा निचली कलानी सहित वर्तमान में जारी परियोजनाओं को लेकर तकनीकी चर्चा की. विदेश मंत्रालय ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी.

भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा कि आयोग ने हाइड्रोलॉजिकल और बाढ़ डेटा के आदान-प्रदान पर चर्चा की. दोनों पक्षों ने फाजिल्का नाले के मुद्दे पर चर्चा की और पाकिस्तान ने आश्वासन दिया कि सतलुज नदी में फाजिल्का नाले के मुक्त प्रवाह को सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक कार्रवाई जारी रहेगी.

विदेश मंत्रालय ने कहा, दोनों आयुक्तों ने संधि के तहत द्विपक्षीय चर्चा के माध्यम से मुद्दों को हल करने के प्रयास में अधिक बार बातचीत करने की अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की. पारस्परिक रूप से सुविधाजनक तिथियों पर नई दिल्ली में पीआईसी की अगली बैठक आयोजित करने पर सहमति हुई.

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विदेश मंत्रालय के बयान के अनुसार, भारतीय पक्ष ने इस बात को रेखांकित किया कि सभी परियोजनाओं को लेकर संधि के प्रावधानों का पूरी तरह से पालन किया जाना चाहिए तथा अपने रूख को लेकर विस्तृत तकनीकी ब्यौरा प्रस्तुत किया. बयान के अनुसार, बैठक जल विज्ञान संबंधी तथा बाढ़ को लेकर आंकड़ों का आदान प्रदान किया गया. इसमें कहा गया है कि दोनों पक्षों ने फजिल्का नाले के मुद्दे पर भी चर्चा की.

विदेश मंत्रालय के बयान के अनुसार, पाकिस्तान ने आश्वस्त किया कि सतलज नदी में फजिल्का नाले का मुक्त प्रवाह सुनिश्चित करने के लिए सभी जरूरी कदम उठाये जाएंगे. मंत्रालय ने कहा कि बैठक सौहार्दपूर्ण माहौल में हुई तथा दोनों आयुक्तों ने संधि के तहत द्विपक्षीय चर्चा के जरिये मुद्दों के समाधान का प्रयास करने के लिए और जल्दी संवाद करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की.

दोनों पक्षों ने एक दूसरे की सुविधा के अनुरूप किसी तिथि को आयोग की अगली बैठक बुलाने पर सहमति व्यक्त की. भारत के सिंधु जल आयुक्त पी के सक्सेना की अगुवाई में 10 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल पीसीआईडब्ल्यू की वार्षिक बैठक में भाग लेने लिए सोमवार को वाघा बॉर्डर के जरिए इस्लामाबाद पहुंचा था और उसने पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की थी.

इस तीन दिवसीय बैठक का आयोजन सिंधु जल संधि-1960 के दायित्वों के तहत पाकिस्तान के सिंधु जल आयुक्त के कार्यालय ने किया था. भारत और पाकिस्तान ने 9 साल तक चली बातचीत के बाद 1960 में इस संधि पर हस्ताक्षर किए थे.संधि में नदियों के इस्तेमाल के संबंध में दोनों देशों के बीच सहयोग और सूचना के आदान-प्रदान के लिए एक व्यवस्था तय की गई. हालांकि, संधि को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच असहमतियां और मतभेद भी रहे हैं.

बता दें इससे पहले मीडिया में बृहस्पतिवार को इस संबंध में सूचना आई है. पीसीआईडब्ल्यू के दो आयुक्तों ने तीन दिवसीय बैठक में एजेंडा में शामिल सभी विषयों पर चर्चा पूरी कर ली. बातचीत बेहद सौहार्दपूर्ण वातावरण में हुई और इस महत्वपूर्ण चर्चा के निष्कर्ष पर घोषणा आज होने की संभावना है.

डॉन अखबार के अनुसार, पाकिस्तान ने कुलां रामवाड़ी, फेब-2, तमाशा हाइड्रो, बाल्टीकुलां, डरबुक श्योक, नुम्मु चिलिंग, करगिल हंडरमैन, फगला और मंडी एचईपी सहित 10 परियोजनाओं पर आपत्ति जताई है. अखबार के अनुसार, पाकिस्तान ने जिन 10 परियोजनाओं पर आपत्ति जताई है, उनमें से 9 लघु बिजली परियोजना के तहत 25 मेगावाट या उससे कम क्षमता की है. खबर के मुताबिक, इन लघु परियोजनाओं पर भारत ने कुछ आंकड़े मुहैया कराए हैं, लेकिन तकनीकी तथा अन्य कारणों से वे पाकिस्तान को स्वीकार्य नहीं हैं.

खबर के अनुसार, भारतीय पक्ष ने बताया कि लघु परियोजनाओं के संबंध में प्रांतों और राज्य की सरकारें सामान्य रूप से डिजाइन और इंजीनियरिंग की पूरी जानकारी नहीं रख पाती हैं, लेकिन वह 1960 सिंधू जल संधि के तहत आवश्यक जानकारी मुहैया कराने के लिए संबंधित एजेंसियों से संपर्क करेंगे. खबर के अनुसार, पाकिस्तान ने इन परियोजनाओं से जुड़ी 15-20 और आपत्तियां भारत के समक्ष उठाई हैं. (इनपुट: भाषा- एएनाआई)

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