वाशिंगटन: संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि सैयद अकबरूद्दीन ने भारत और चीन के संबंधों को कभी दोस्त तो कभी दुश्मन जैसा बताया है. जॉर्जटाउन विश्वविद्यालय में बोलते हुए अकबरूद्दीन ने कहा कि भारत और चीन के संबंध फ्रेनिमीज यानी कभी दोस्त तो कभी दुश्मन जैसे हैं. दोनों देश असहमतियों के बावजूद साथ मिलकर काम कर रहे हैं और दुनिया दोनों देशों के संबंधों से सीख सकती है. सैयद अकबरूद्दीन ने कहा, ‘‘ हॉलीवुड में एक शब्द का इस्तेमाल किया जाता है जो काफी लोकप्रिय हो चुका है, मेरा मानना है कि उसे ‘ फ्रेनिमीज’ यानी मित्र-शत्रु कहा जाता है. चीन के साथ हमारा वैसा ही संबंध है, हम उनसे संवाद करते हैं तो हम उनसे प्रतिस्पर्धा भी करते हैं. कुछ क्षेत्रों में हम उनके साथ मिलकर काम करते हैं और कुछ क्षेत्रों में हम असहमत होने के लिये सहमत होते हैं और आगे बढ़ते हैं’’Also Read - India vs England, 5th Test: खुशखबरी! साल 2022 में इस मैदान पर खेला जाएगा भारत-इंग्लैंड के बीच 5वां टेस्ट

जॉर्जटाउन विश्वविद्यालय में एंबेस्डर हॉवर्ड शाफर स्मृति व्याख्यान देने के बाद एक सवाल पर वरिष्ठ भारतीय राजनयिक ने कहा कि भारत ने एशियाई आधारभूत ढांचा निवेश बैंक (एआईआईबी) जैसी विकास पहल पर चीन के साथ मिलकर काम किया है, जबकि उसकी बेल्ट एंड रोड पहल का विरोध किया है. अकबरूद्दीन ने आगे कहा कि, ‘‘मेरे लिये बेल्ट एंड रोड पहल सामान्य पहल नहीं है हम उसका हिस्सा नहीं हैं’’ Also Read - कौन हैं स्नेहा दुबे? UNGA में इमरान खान को जमकर लगाई फटकार, दुनिया के सामने खोलकर रख दी पाकिस्तान की पोल

भारत ने शुरूआत से चीन की बेल्ट एंड रोड पहल का विरोध किया है. पिछले साल अपनी संप्रभुता को लेकर चिंता की वजह से भारत ने चीन की बेल्ट एंड रोड पहल में हिस्सा भी नहीं लिया था. वन बेल्ट वन रोड चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की महत्वाकांक्षी परियोजना है. इसका लक्ष्य एशियाई देशों, अफ्रीका, चीन और यूरोप के बीच सहयोग और संपर्क में सुधार करना है. Also Read - UNGC में भारत ने पाक के कश्‍मीर राग अलापने और गिलानी को शहीद को बताने पर किया पलटवार

भारत- पाकिस्तान संबंध और संयुक्त राष्ट्र के मंच पर इस्लामाबाद के कश्मीर मुद्दे को उठाने और जनमत संग्रह की मांग करने के बारे में उनकी राय पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को इसपर अंदरूनी समर्थन हासिल नहीं है. उन्होंने कहा, ‘‘जिस तरह से आपने भारत और पाकिस्तान के मुद्दों को पेश किया है वह मेरे हिसाब से कल की समस्या है. इसका मतलब यह नहीं है कि हमें उनका समाधान करने की आवश्यकता नहीं है.’’