नई दिल्ली: भारत और चीन के बीच सैन्य स्तर की बातचीत सकारात्मक मोड पर खत्म होने के बावजूद पूर्वी लद्दाख में गलवान घाटी, हॉट स्प्रिंग्स, देपसांग और पैंगोंग झील के इलाके की स्थिति अभी भी तनावपूर्ण बनी हुई है. आधिकारिक सूत्र ने सोमवार को बताया कि इस तनाव को कम करने के लिए भारत और चीन की सेनाएं एक बार फिर से बातचीत करेंगी. सूत्रों ने बताया कि भारत और चीन की सेनाएं सीमा पर चल रहे गतिरोध पर मंगलवार को लेफ्टिनेंट जनरल स्तर की वार्ता करेंगी.Also Read - Engineering Export Goods: भारत के इंजीनियरिंग सामानों का निर्यात 54 फीसदी बढ़ा

रिपोर्ट्स के मुताबिक मंगलवार को होने वाली लेफ्टिनेंट स्तर की वार्ता वास्तविक नियंत्रण रेखा के इस पार यानी भारतीय क्षेत्र चुशूल में होगी. पहली दो बैठकें मोलदो में एलएसी पर चीन की जमीन पर हुई थी. दूसरे दौर की वार्ता में 22 जून को दोनों पक्षों के बीच पूर्वी लद्दाख में तनाव वाले स्थानों पर ‘‘पीछे हटने’’के लिए ‘‘परस्पर सहमति’’ बनी थी. Also Read - Republic Day 2022: भारत-पाकिस्तान सीमा पर BSF जवान 'हाई-अलर्ट' पर

इससे पहले एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने कहा कि इन स्थानों पर तनाव बढ़ा हुआ है, जिसे देखते हुए भारत ने यहां पर सुरक्षा बलों की संख्या में कई गुना इजाफा किया है. उन्होंने कहा कि चीन भी दूसरी तरफ रक्षा ढांचे का निर्माण कर रहा है. Also Read - ताइवान में चीन की मनमानी : भेजे 39 लड़ाकू विमान, ताइवान ने की जवाबी कार्रवाई

सूत्रों ने कहा कि 22 जून को भारत और चीन के बीच 11 घंटे तक चली लंबी कोर कमांडर-स्तरीय वार्ता के दौरान यह कहा गया था कि तनाव दूर करने के लिए आपसी सहमति अपनाई जाएगी. इस दौरान पूर्वी लद्दाख से जुड़े तमाम पहलुओं पर चर्चा की गई थी. सीमावर्ती मुद्दे को हल करने और पूर्वी लद्दाख में तनाव कम करने के लिए दोनों देशों के सैन्य अधिकारी मोल्दो में मिले थे. यह छह जून को पहली बैठक के बाद तनाव दूर करने के उद्देश्य से उनकी दूसरी बैठक थी.