नई दिल्ली: भारत पर्यावरण के अनुकूल प्राकृतिक कृषि को बढ़ावा देकर 50 से 60 अरब डॉलर का कार्बन क्रेडिट हासिल कर सकता है. नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने शुक्रवार को यह टिप्पणी की. राजीव कुमार ने ‘एग्रोइकोलॉजी एंड रीजेनरेटिव एग्रीकल्चर’ पर वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से आयोजित एक उच्च स्तरीय बैठक के दौरान, कृषि को और अधिक ज्ञान आधारित बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि प्राकृतिक कृषि को बढ़ावा देना सुनिश्चित करने और नये अन्वेषणों को अमल में लाने की आवश्यकता है. Also Read - किसानों को शिक्षित करने में कृषि विज्ञान केंद्रों को महत्वपूर्ण भूमिका निभानी है: कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर

नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने कहा, ‘‘हम इस तरीके से एक हजार अरब डॉलर मूल्य के ग्रीन बांड बाजार तक भी पहुंच बना सकते हैं.’’ उन्होंने कहा कि भारत को एक नवोन्मेष प्रक्रिया के रूप में कृषि विज्ञान पर काम करना होगा और परिणामों को मापने के लिए मापतंत्र को व्यापक बनाना होगा. Also Read - World Environment Day 2020 : पर्यावरण संरक्षण के लिए क्या करता है भारत और उसका पड़ोसी देश चीन, पढ़ें यहां

नीति आयोग के उपाध्यक्ष ने कहा, ‘अगर भारत प्राकृतिक खेती और पर्यावरण के अनुकूल पद्धतियों को बढ़ावा दे, तो उसकी 50-60 अरब डॉलर तक के कार्बन क्रेडिट को हासिल किया जा सकता है.’ कार्बन क्रेडिट किसी देश के लिये स्वीकृत कार्बन उत्सर्जन की सीमा है. एक कार्बन क्रेडिट का अर्थ होता है कि संबंधित देश एक टन कार्बन डाई ऑक्साइड का उत्सर्जन कर सकता है. उन्होंने कहा, ‘ हम पुराने तौर तरीकों पर नहीं चल सकते क्योंकि यह एक अंधी गली में कार चलाने जैसा है. पर्यावरण को बचाने और किसानों के कल्याण की स्थिति में सुधार लाने के लिए हमें दिशा बदलने की आवश्यकता है.’ Also Read - Kisan Credit Card Scheme: संकट काल में किसानों के लिए बेहद कारगर है ये स्कीम, केवल 4% पर मिलता है 3 लाख का लोन