India Census Will Be Digital This Time Process Of Caste Census 2027
डिजिटल होगी इस बार गिनती! जाति जनगणना से कितनी अलग, आखिरी बार कब हुई थी? भारत की Census को लेकर हर जवाब
भारत की अगली जनगणना इस बार पूरी तरह डिजिटल होने जा रही है. दशकों पुरानी कागज-कलम वाली प्रक्रिया को छोड़कर सरकार अब मोबाइल ऐप और ऑनलाइन सिस्टम के जरिए देश की सबसे बड़ी गिनती करने की तैयारी में है.
Census Process 2027: केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने जनगणना 2027 को लेकर पहले ही जानकारी दे चुके हैं कि ये दो चरणों में होगी. इसमें हाउसिंग जनगणना और जनसंख्या गिनती शामिल होगी. वैष्णव ने बताया कि ये देश की पहली डिजिटल जनगणना होगी. जनगणना 2027 में जाति गणना को भी शामिल किया जाएगा. हजारों कर्मचारियों को इसके लिए ट्रेनिंग दी जा रही है. खास बात ये है कि इस बार कागजी फॉर्म की जगह रीयल-टाइम डिजिटल एंट्री होगी. डेटा सीधे सुरक्षित सरकारी सर्वर पर अपलोड किया जाएगा.
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा था, ‘जनगणना 2027 पहली डिजिटल जनगणना होगी. जनगणना का डिजिटल डिजाइन डेटा सुरक्षा को ध्यान में रखकर बनाया गया है. ये दो चरणों में होगी. पहला चरण अप्रैल से सितंबर 2026 तक हाउस लिस्टिंग और हाउसिंग जनगणना. दूसरा चरण फरवरी 2027 में जनसंख्या गणना होगा. उन्होंने कहा कि सरकार ने 2027 की जनगणना के लिए केंद्रीय कैबिनेट से 11,718 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं, जिसमें जाति की गिनती भी शामिल होगी.
नई व्यवस्था के तहत जनगणना कर्मी लोगों के घर तो जाएंगे, लेकिन जानकारी कागजी फॉर्म की जगह मोबाइल ऐप में सीधे दर्ज की जाएगी. ये डेटा रीयल-टाइम में सरकारी सर्वर पर सुरक्षित तरीके से अपलोड होगा, जिससे गड़बड़ी और दोहराव की आशंका कम हो जाएगी. पहली बार लोगों को Self Enumeration यानी खुद से जानकारी भरने का ऑप्शन भी मिल सकता है. इसके तहत नागरिक चाहें तो ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर जाकर अपनी बुनियादी जानकारी स्वयं दर्ज कर सकेंगे. इससे न सिर्फ समय बचेगा, बल्कि जनगणना की पहुंच भी बढ़ेगी.
साल 2022 में हुई थी आखिरी जनगणना
भारत में आखिरी बार जनगणना 2011 में कराई गई थी. 2021 की जनगणना कोरोना महामारी के चलते टाल दी गई, जिसके बाद से नई जनगणना का इंतजार है. अब इसे चरणबद्ध तरीके से कराने की तैयारी चल रही है. ये डिजिटल जनगणना जाति जनगणना से अलग है. सामान्य जनगणना का मकसद देश की पूरी जनसंख्या की सामाजिक-आर्थिक तस्वीर पेश करना होता है, जबकि जाति जनगणना केवल जातिगत आंकड़ों पर केंद्रित रहती है.
कुल मिलाकर, नई जनगणना को डिजिटल इंडिया की सबसे बड़ी कवायद माना जा रहा है. इससे मिलने वाले आंकड़े सरकार को नीतियां बनाने, योजनाएं तय करने और संसाधनों के सही बंटवारे में अहम भूमिका निभाएंगे.
ब्रेकिंग न्यूज और लाइव न्यूज अपडेट के लिए हमें फेसबुक पर लाइक करें या ट्विटर पर फॉलो करें. India.Com पर विस्तार से पढ़ें India Hindi की और अन्य ताजा-तरीन खबरें
By clicking “Accept All Cookies”, you agree to the storing of cookies on your device to enhance site navigation, analyze site usage, and assist in our marketing efforts Cookies Policy.