समरकंद: विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने शनिवार को अपनी दो दिवसीय यात्रा पर उज्बेकिस्तान पहुंची हुई हैं. आज रविवार को उन्होंने प्रथम भारत-मध्य एशिया संवाद में हिसा लिया. साल 2020 में भारत में इस का आयोजन प्रस्तावित है. कल उज्बेकिस्तान के विदेश मंत्री अब्दुलअजीज कामिलोव ने यहां पहुंचने पर उनका स्वागत किया. उन्होंने दोनों के बीच व्यापार, अर्थव्यवस्था, रक्षा और सूचना प्रौद्योगिकी समेत विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के उपायों पर चर्चा की. सुषमा और कामिलोव ने समरकंद में इस आयोजन की सह-अध्यक्षता की अफगानिस्तान भी इसमें शिरकत कर रहा है.

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प्रथम भारत-मध्य एशिया संवाद
स्वराज प्रथम भारत-मध्य एशिया संवाद (इंडिया-सेंट्रल एशिया डायलॉग) में हिस्सा लेने के लिए शनिवार को प्राचीन शहर समरकंद पहुंचीं. भारत-मध्य एशिया संवाद में युद्ध प्रभावित अफगानिस्तान से संपर्क बढ़ाने सहित विभिन्न क्षेत्रीय मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने ट्वीट किया कि यहां हवाई अड्डे पर पहुंचने पर स्वराज का उज्बेकिस्तान के विदेश मंत्री कामिलोव ने अगवानी की. दोनों मंत्रियों ने पैलेस ऑफ फोरम में दोनों देशों के बीच व्यापार, स्वास्थ्य, शिक्षा, रक्षा, अंतरिक्ष, सूचना प्रौद्योगिकी में सहयोग बढ़ाने तथा लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने के तौर तरीकों पर चर्चा की.

विदेश मंत्री के प्रवक्ता रवीश कुमार ने कहा कि अफगान की भागीदारी के साथ पहली बार हो रहे भारत-मध्य एशिया संवाद से इस क्षेत्र में भारत की पहुंच एक नयी ऊंचाई तक जाएगी. सुषमा और कामिलोव ने समरकंद में इस संवाद की सह-अध्यक्षता की. विदेश मंत्रालय ने बताया कि अफगानिस्तान के विदेश मंत्री ने भी क्षेत्र में संपर्क से जुड़े मुद्दों को समर्पित सत्र में विशेष आमंत्रित सदस्य के तौर पर हिस्सा लिया. किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान एवं तुर्कमेनिस्तान के विदेश मंत्री और कजाखस्तान के प्रथम विदेश उप-मंत्री भी इस संवाद में शामिल हुए. विदेश मंत्रालय ने बुधवार को कहा था कि साझे इतिहास एवं सांस्कृतिक संबंधों से जुड़े भारत और मध्य एशियाई देश इस संवाद को मध्य एशिया में कारोबार और विकास के क्षेत्र में भारत की आर्थिक संलिप्तता को बढ़ाने के तौर तरीके खंगालने समेत विविध क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की अहम पहल के रुप में आशाभरी निगाहों से देखते हैं. (इनपुट भाषा)

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