नई दिल्ली: भारत चीन सीमा यानी LAC पर तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है. तनाव को कम करने के लिए एक तरफ दोनों देशों के बीच बातचीत जारी है. वहीं दूसरी तरफ दोनों देशों ने सीमा पर टैंकों और आर्टिलेरी की तैनाती कर दी है. भारतीय सेना ने टैंकों की तैनाती ऐसे स्थान पर की है जहां से आसानी से फायरिंग की जा सकती है. Also Read - चीन बोला- लद्दाख में बुनियादी ढांचे के निर्माण का विरोध करते हैं, भारत ने किया पलटवार

वहीं कालाटॉप की पहाड़ी के पास चीनी टैंक और सैनिक है. बता दें कि कालाटॉप वही स्थान है जिसे भारतीय सेना के जवानों ने 29-30 अगस्त को अपने कब्जे में ले लिया था. क्योंकि इस रणनीतिक लोकेशन पर चीनी सैनिक चालांकी से कब्जा करना चाहते थे. अगर भारतीय सेना की बात करें तो चुशूल और पैंगोंग त्सो इलाके में टैंकों की तैनाती की गई है. जहां चीनी सैनिकों से भारतीय सैनिकों की भिड़ंत हुई थी, उसी के पास भारतीय सेना ने टैंकों की तैनाती की कर दी है. Also Read - भारत ने LAC पर चीन के 1959 के रुख को किया खारिज, कड़ी आपत्ति जताते हुए दिया बड़ा बयान

कालाटॉप के क्षेत्रों में ही भारतीय सेना ने अर्टिलेरी को डेप्लॉय किया है. वहीं चीन ने बिल्कुल सीमा के पास अपने टैंकों की तैनाती की है. बता दें कि कालाटॉप एक रणनीतिक लोकेशन है. अगर इसपर चीन का कब्जा हो जाता तो इससे भारत को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता था. हालांकि भारतीय सेना ने चीन के मंसूबों पर पानी फेर दिया. Also Read - India China Stand-off: चीन की हर चाल होगी नाकाम, भारत ने लद्दाख में तैनात किए T-90 और T-72 विध्वंसक टैंक, देखें Video

यही नहीं भारतीय सेना के जवानों ने कालाटॉप पर लगे चीनी सैनिकों के सर्विलांस सिस्टम, कैमरे और सेंसरों को भी उखाड़ फेंका है. इस बाबत चीनी कम्यूनिष्ट पार्टी के मुखपत्र ग्लोबल टाइम्स ने भारत को चेतावनी देते हुए कहा है कि बातचीत से मामले सुलझाना चाहते हैं, लेकिन अगर लड़ाई हुई तो भारत को 1962 से भी ज्यादा तबाही झेलनी होगी.