नई दिल्ली: लद्दाख में लागातार बढ़ रहे भारत चीन विवाद के बीच भारतीय कंपनियों ने चीन को झटका देने का मन बना लिया है. समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक भारतीय सरकारी रिफाइनी कंपनियां अब चीन से कच्चा तेल खरीदना बंद करने वाली है. इस लिस्ट में चीन की कंपनी CNOO Ltd, पट्रोचाइना, और यूनीपेक नाम की कंपनियां शामिल हैं जिनसे भारतीय कंपनियां कच्चा तेल खरीदना बंद करने वाली है. बता दें कि इससे पहले भारत सरकार द्वारा पड़ोसी देशों से आयात को लेकर नियम सख्त कर दिए गए थे. Also Read - ड्रैगन की हिमाकत! चीन ने ताइवानी क्षेत्र में उड़ाए लड़ाकू विमान, इसी देश में मौजूद हैं अमेरिकी दूत

रॉयटर्स की मानें तो भारतीय सरकारी कंपनियां इस नियम के आने के बाद से इपोर्ट ट्रेडर में इसी से संबंधित एक क्लॉज जोड़ रही हैं. इसके बाद चीन से तेल खरीदना कंपनियां बंद कर देंगी. भारतीय सरकारी ऑयल कंपनियां इंडियन ऑयल, हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्प, मैंगलोर रिफाइनरी, पेट्रोकेममिकल और भारत पेट्रोलियम चीन से कच्चा तेल खरीदना बंद कर सकती हैं. हालांकि इस बाबत इन कंपनियों द्वारा किसी तरह का बयान अबतक जारी नहीं किया गया है. Also Read - Bacterial Outbreak in China: चीन में फैली एक और महामारी, बैक्टीरिया संक्रमण ने मचाई तबाही

बता दें कि जून महीने में लागू नए निर्यात नियमों के तहत भारतीय टेंडरों में भागीदारी के लिए पड़ोसी देशों की कंपिनयों को वाणिज्य विभाग में रजिस्टर्ड होना आवश्यक है. नियम के अनुसार भारत की जिन देशों से सीमाएं लगती है उन्हीं देशों पर नए आयात नियमों को लागू किया गया है. हालांकि सरकार द्वारा किसी देश का नाम नहीं लिया गया लेकिन यह कहीं न कहीं चीन के लिए था. इसी दौरान बता दें कि चीन भारतीय बैंकों और कंपनियों में बड़ी मात्रा में निवेश कर रहा था. इस बाबत भी नए कानून को लाने की आवश्यकता भारत सरकार को महसूस हुई. Also Read - चीन के व्यापार पर भारत सरकार का एक और दाव, निर्यात होने वाले LED उत्पादों की बढ़ाई गई निगरानी

कहीं न कहीं यह चीन द्वारा अबतक गलवान घाटी और भारत चीन सीमा (LAC) पर किए गए गलतियों की सजा के तौर पर है. बता दें कि भारत दुनिया में कच्चे तेल का तीसरा सबसे बड़ा खरीददार देश है. भारत दुनिया भर में 84 फीसदी अपनी जरूरतों का तेल आयात करता है. बता दें कि बीते दिनों भारत सरकार द्वारा चीन की कई मोबाइल ऐप्लिकेशनों को भी भारत में बैन कर दिया गया था. यही नहीं अब आयात किए जा रहे सामानों को लेकर भी गाइडलाइंस सख्त कर दी गई हैं.