India-China Border Fight Update News: चीन के साथ एलएसी पर जारी गतिरोध को खत्म करने के लिए कूटनीतिक और सैन्य स्तर की वार्ता जारी है, लेकिन इन वार्ताओं के अभी तक कोई स्पष्ट सकारात्मक रिजल्ट नहीं दिख रहे हैं. भारत सरकार आर्थिक मोर्चे पर लगातार चीन को झटके दे रही है. इस बीच सैन्य तैयारियों के स्तर पर कोई कमी न रह जाए, इसका जायजा लेने खुद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और सेना प्रमुख जनरल एम एम नरवणे लद्दाख जा रहे हैं. Also Read - राफेल का इंतजार खत्म, भारतीय वायुसेना के पायलट फ्रांस एयरबेस से उड़ाकर ला रहे फाइटर जेट

गत पांच मई को दोनों देशों की सेनाओं के बीच गतिरोध के बाद यह रक्षा मंत्री का पहला लद्दाख दौरा होगा जिसमें उनके साथ सेना प्रमुख जनरल एम एम नरवणे रहेंगे. Also Read - Kargil Vijay Diwas: कारगिल विजय दिवस के मौके पर राजनाथ सिंह और अमित शाह ने जवानों को दिया ट्रिब्यूट

सूत्रों ने बताया कि सिंह अपनी इस यात्रा में जनरल नरवणे, उत्तरी सैन्य कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल योगेश कुमार जोशी, 14 कोर के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल हरिंदर सिंह और अन्य वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों के साथ सुरक्षा स्थिति की व्यापक समीक्षा करेंगे. Also Read - पाकिस्तान में एयरस्ट्राइक करने वाली वायुसेना चीन सीमा पर तैयार रहे: राजनाथ सिंह

सूत्रों ने कहा कि यात्रा का उद्देश्य क्षेत्र में चीनी सैनिकों के साथ सात सप्ताह से चल रहे गतिरोध के दौरान सैनिकों का मनोबल बढ़ाना है.

सेना प्रमुख ने 23 और 24 जून को लद्दाख का दौरा किया था जिस दौरान उन्होंने वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों के साथ बैठकें की थीं और पूर्वी लद्दाख में अग्रिम क्षेत्रों का भ्रमण किया था. जनरल नरवणे ने इससे पहले 22 मई को लेह का दौरा किया था.

भारत और चीन की सेनाओं के बीच पिछले सात सप्ताह से पूर्वी लद्दाख क्षेत्र में कई जगहों पर गतिरोध की स्थिति बनी हुई है. गत 15 जून को गलवान घाटी में हिंसक झड़पों में 20 भारतीय सैनिकों के शहीद होने के बाद तनाव और बढ़ गया.

इस झड़प में चीन के सैनिक भी हताहत हुए लेकिन पड़ोसी देश ने अभी तक उनकी संख्या नहीं बताई है.

रक्षा मंत्री का लद्दाख दौरा ऐसे समय में होगा जब भारत पूर्वी लद्दाख क्षेत्र में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के पास अपने सैनिकों और शस्त्रों की तादाद बढ़ा रहा है.

गलवान घाटी में संघर्षों के बाद सेना ने हजारों अतिरिक्त सैनिकों को सीमा पर अग्रिम क्षेत्रों में भेजा है और भारी हथियार भी पहुंचाए.

वायु सेना ने भी कई प्रमुख वायु सैनिक केंद्रों पर वायु रक्षा प्रणालियों और अच्छी खासी संख्या में लड़ाकू विमानों तथा हेलीकॉप्टरों को तैनात किया है.

(इनपुट-भाषा)