नई दिल्ली: भारत और चीन दोनों ही देश लद्दाख क्षेत्र में LAC पर तनाव कम करने के लिए लगातार अधिकारिक और सैन्य स्तर पर मीटिंग कर रहे हैं. चीन की तरफ से आक्रामक रैवेये का बावजूद भी चीन इस मामले को शांति से निपटाने की कोशिश कर रहा है. लेकिन सोमवार की रात चीनी सैनिकों को द्वारा भारतीय सैनिकों पर लाठी-डंडे और रॉड्स से हमला करने व इसमें 20 भारतीय सेना के जवानों के वीरगति प्राप्त होने के बाद LAC और गलवान वैली में दोनों ही देशों के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ चुका है. हालांकि इस घटना में चीन के 43 जवानों के भी मरने की खबर सामने आई है. लेकिन 6 जून को सैन्य अधिकारियों की बैठक के बाद ऐसा क्या हुआ कि चीन की तरफ से 10 दिन में ही खूनी साजिश रच डाली. Also Read - सबूतों की कमी की वजह से श्रीलंका क्रिकेट ने 2011 विश्व कप 'मैच फिक्सिंग' जांच बंद की

गलवान वैली को चीन मानता है अपना हिस्सा Also Read - लद्दाखवासी कहते हैं चीन ने हमारी जमीन ली और प्रधानमंत्री कहते हैं नहीं, कोई तो झूठ बोल रहा है: राहुल

6 जून को दोनों देशों ने सैन्य स्तर पर बातचीत के जरिए मामले को शांति से सुलझाने का प्रयास किया. इस बीच दोनों देशों की सेनाएं सीमा पर पीछे जाने को राजी भी हो गईं. लेकिन इस दौरान चीनी सैन्य अधिकारी ने पूरे गलवान वैली को अपना क्षेत्र बता दिया. Also Read - इतिहास गवाह है कि विस्तारवादी ताकतें या तो हार गईं या वापस लौटने के लिए मजबूर हुईं हैं: PM मोदी

चीनी खेमे में हुआ भारतीय जवानों पर हमला

इस बीच सोमवार की रात भारतीय सेना के कर्नल संतोष बाबू चीनी खेमे में बातचीत करने गए थे. इस दौरान दोनों देशों की सेनाओं को पीछे हटने की बात थी, लेकिन चीनी सेना ने ऐसा करने में आनाकानी की. इस दौरान जब संतोष बाबू चीनी खेमें में बात करने गए तो इस दौरान चीनी सैनिक उग्र हो गए भारतीय सेना की टीम पर हमला पत्थरों, लाठियों, डंडों और रॉड्स से हमला कर दिया. इस दौरान भारतीय जवानों की संख्या कम थी. लेकिन भारतीय जवानों ने जैसे ही मोर्चा संभाला तो चीन के 43 सैनिक भी इसकी चपेट में आ गए. हालांकि इनमें मौतें और गंभीर घायल सैनिक भी शामिल हैं.

बैठकों का दौर शुरू

इस झड़प की खबर के सामने आते ही, दिल्ली में राजनाथ सिंह ने पूरे हालात पर समीक्षा करने के लिए सीडीएस बिपिन रावत सहित सभी सेनाओं के प्रमुखों के साथ बैठ की. इस बैठक के बाद पीएम आवास पर भी एक हाई लेवल मीटिंग की गई. इस दौरान इस मीटिंग में अमित शाह, एस. जयशंकर ने प्रधानमंत्री मोदी से पूरे मामले पर चर्चा की.