लद्दाख (Ladakh) में LAC पर चीन के अड़ियल रवैये को देखते हुए सैन्य मोर्चे के साथ-साथ उसे आर्थिक क्षेत्र में भी सबक सिखाने के लिए मोदी सरकार लगातार सक्रिय है. सेना को पीछे हटाने की प्रक्रिया पर हामी भरने के बावजूद चीन अपनी स्थिति से पीछे होने को तैयार नहीं हो रहा. चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) लद्दाख के पैंगोंग त्सो और गोगरा-हॉट स्प्रिंग्स पर अब भी फॉरवर्ड पोजिशन पर काबिज है. ऐसे में मोदी सरकार चीन के खिलाफ आर्थिक मोर्चे पर एक और एक्शन लेने की योजना बना रही है. Also Read - भारत की चीन को दो टूक, केवल पैंगोग ही नहीं.. सभी स्थानों से सैनिकों के पीछे हटने की प्रक्रिया चलनी चाहिए

हिन्दुस्तान टाइम्स की वेबसाइट पर प्रकाशित खबर के अनुसार, ‘इस मामले की जानकारी रखने वाले वरिष्ठ सरकारी अधिकारी के हवाले से बताया गया है कि शीर्ष चीन अध्ययन समूह (CSG) ने लद्दाख में सोमवार जमीन पर चीनी सेना की कार्रवाई और अक्साई चीन क्षेत्र में उसकी सैन्य स्थिति पर चर्चा की. बता दें कि CSG वह निकाय है जिसमें केंद्र सरकार के महत्वपूर्ण सदस्य शामिल होते हैं. यह निकाय चीन के साथ कार्रवाई पर देश की रणनीति की दिशा तय करता है. Also Read - आज संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करेंगे प्रधानमंत्री मोदी, आतंकवाद सहित इन मुद्दों पर रहेगा फोकस

हिन्दुस्तान टाइम्स की वेबसाइट के अनुसार, ‘चीन चाहता है कि भारत सीमा पर अभी की स्थिति के आधार पर राजनयिक संबंधों को सामान्य करे, जबकि मोदी सरकार का मानना है कि लद्दाख क्षेत्र में यथास्थिति से कम कुछ भी अस्वीकार्य है. अधिकारियों के अनुसार इंडियन आर्मी को लद्दाख में 1597 किलोमीटर LAC के साथ फॉर्वर्ड पोजिशन पर बने रहने के लिए कहा गया है.’ Also Read - Bihar Opinion Poll: बिहार में लोगों की पसंद हैं पीएम मोदी, नीतीश का प्रभाव कम; सरकार बदलना चाहते हैं 50 प्रतिशत से ज्यादा मतदाता

मालूम हो कि अमेरिका ने Huawei और इसकी सहयोगी कंपनियों पर जासूसी के लिए एक्शन लेकर चीन को झटका दिया है. ऐसे में संभव है कि भारत भी निकट भविष्य में बड़ा एक्शन लेगा. पहले से ही यह स्पष्ट है कि भारत चीनी संचार और बिजली कंपनियों को भविष्य की किसी भी परियोजना से बाहर रखेगा.

बता दें कि अमेरिका ने सोमवार को हुवावेई को लेकर सख्ती बढ़ा दी. इसके तहत उसने कंपनी की 21 देशों में 38 संबद्ध इकाइयों को अपनी निगरानी सूची में शामिल किया है. अमेरिका इन कदमों के जरिये यह सुनिश्चित कर रहा है कि कंपनी किसी तरीके से उसके कानून के साथ खिलवाड़ नहीं करे.

हुवावेई को चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की निगरानी इकाई माना जाता है. इसको लेकर पुराने विदेशी उत्पादित प्रत्यक्ष उत्पाद (एफडीपी) नियम में संशोधन किया गया है. यह हुवावेई को अमेरिकी साफ्टवेयर या प्रौद्योगिकी से विकसित अथवा उत्पादित विदेशों में बने वैसे चिप प्राप्त करने से रोकता है, जो अमेरिकी चिप के समान हैं. उसने 21 देशों में हुवावेई संबद्ध 38 इकाइयों को ‘इकाई सूची’ में डाला है. इसके तहत सभी जिंसों के लिये लाइसेंस की जरूरत होती है जो निर्यात प्रशासन नियमन (ईएएआर) और संशोधित चार मौजूदा हुवावेई इकाई सूची पर निर्भर है.

(इनपुट: भाषा)