LPG के बाद भारत में हुई इस चीज की किल्लत, तेजी से बढ़ रहे दाम; जानिए पूरी डिटेल
ग्लास सिटी फिरोजाबाद में गैस की कमी से कांच की बोतलों और जार की सप्लाई प्रभावित हो रही है. जानिए कैसे LPG और LNG की कमी से उद्योग और बाजार पर असर पड़ रहा.
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यूपी का फिरोजाबाद जिसे ग्लास सिटी के नाम से जाना जाता है, इन दिनों एक बड़े संकट का सामना कर रहा है. सदियों से कांच के उद्योग के लिए मशहूर इस शहर में फैक्ट्रियों की रफ्तार धीमी हो गई है. इन सबसे पीछे कोई और वजह नहीं बल्कि मिडिल ईस्ट जंग है. दरअसल, अमेरिका-ईरान तनाव से LPG और LNG की सप्लाई प्रभावित हुई है, जिसका सीधा असर उत्पादन पर पड़ा है. कांच की बोतलें, जार और शीशियां या तो कम मिल रही हैं या फिर उनके दाम बढ़ गए हैं.
गैस की कमी ने बिगाड़ी पूरी सप्लाई चेन
इस संकट की असली वजह गैस सप्लाई में आई रुकावट है. खाड़ी क्षेत्र में तनाव के चलते LPG और LNG की सप्लाई प्रभावित हुआ है. सरकार ने घरेलू जरूरतों को प्राथमिकता देते हुए गैस की सप्लाई को उद्योगों से हटाकर घरों की तरफ मोड़ दिया है. इसका सीधा असर कांच बनाने वाली फैक्ट्रियों पर पड़ा है, जो भारी मात्रा में गैस पर निर्भर रहती हैं. नतीजा यह हुआ कि कई फैक्ट्रियों को अपना उत्पादन कम करना पड़ा. जिससे पूरे देश में कांच के प्रोडक्ट्स की कमी महसूस होने लगी है.
भट्टियां बंद कर दीं, तो क्या होगा?
कांच फैक्ट्रियों की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि उनकी भट्टियां लगातार 1500 डिग्री सेल्सियस के तापमान पर चलती रहती हैं. अगर इन्हें बंद करें और फिर दोबारा चालू करें तो बहुत खर्च आएगा. इससे पहले फैक्ट्रियां पूरी तरह से बंद हों जाएं, इसके लिए सीमित उत्पादन किया जा रहा है. इसके अलावा, ताजमहल के पास होने की वजह से यहां केवल नैचुरल गैस के इस्तेमाल की अनुमति है, जिससे विकल्प और भी सीमित हो जाते हैं.
उद्योग और कारोबार पर बढ़ता दबाव
इस संकट का असर सिर्फ कांच उद्योग तक सीमित नहीं है. इससे जुड़े कई दूसरे सेक्टर भी प्रभावित हो रहे हैं. शराब, दवा, कॉस्मेटिक्स और फूड पैकेजिंग कंपनियों को कांच के कंटेनर महंगे मिल रहे हैं. कई कंपनियों ने नए ऑर्डर लेना बंद कर दिया है और कुछ को अपने उत्पादों की कीमतें बढ़ानी पड़ रही हैं. छोटे स्टार्टअप्स भी मुश्किल में हैं, जिन्हें बोतलें मिलने में दिक्कत हो रही है. उत्पादन में 50% तक की कटौती और कीमतों में 20-40% तक की बढ़ोतरी ने पूरे बाजार में दबाव बना दिया है.
हजारों लोगों की नौकरी जा सकती है
इस पूरे संकट का सबसे बड़ा असर रोजगार पर पड़ सकता है. फिरोजाबाद की करीब 25 लाख की आबादी कांच उद्योग पर निर्भर हैं. अगर गैस सप्लाई जल्द ही सामान्य नहीं हुई, तो कई छोटी और मध्यम इकाइयां बंद हो सकती हैं. जिससे हजारों लोगों की नौकरी खतरे में पड़ सकती है. विशेषज्ञों का कहना है कि भारत की ऊर्जा के लिए मिडिल ईस्ट पर निर्भरता इस समस्या को और बढ़ा रही है. हालांकि, सरकार वैकल्पिक उपायों पर काम कर रही है. लेकिन जब तक सप्लाई पूरी तरह स्थिर नहीं होती, तब तक यह संकट बना रह सकता है.
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