नई दिल्ली: फ्रांस के साथ राफेल लड़ाकू विमान सौदे को लेकर जारी राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल बी एस धनोआ ने बुधवार को कहा कि एयरफोर्स का आधुनिकीकरण बहुत जरूरी है. सरकार भारतीय वायु सेना की क्षमताएं बढ़ाने के लिए ही राफेल लड़ाकू विमान और एस-400 मिसाइल खरीद रही है. उन्होंने राफेल विमान के केवल दो बेड़ों की खरीद को उचित बताते हुए कहा कि इस तरह के खरीद के उदाहरण पहले भी रहे हैं. Also Read - AFCAT Result 2020 Declared: IAF ने जारी किया AFCAT 2020 का रिजल्ट, ये रहा चेक करने का डायरेक्ट लिंक 

उन्होंने कहा कि राफेल जैसे हाईटेक फाइटर समय की जरूरत है. केवल तेजस जैसे मीडियम टेक फाइटर से काम नहीं चल सकता. उन्होंने कहा कि वायु सेना तेजस पर भारी खर्च कर रही है और वह तेजस मार्क-2 के 12 स्क्वाड्रन बनाने जा रही है.

‘‘भारतीय वायु सेना के बल की संरचना, 2035’’ पर एक संगोष्ठी में धनोआ ने कहा कि दुनिया में कोई भी देश उस तरह के गंभीर खतरे का सामना नहीं कर रहा है जैसा भारत कर रहा है. उन्होंने कहा कि दुश्मनों के इरादे रातोंरात बदल सकते हैं और वायु सेना को उनके स्तर के बल की जरूरत है. वायु सेना प्रमुख ने कहा कि भारत के पड़ोसी निष्क्रिय नहीं बैठे हैं और चीन जैसे देश अपनी वायु सेना का आधुनिकीकरण कर रहे हैं.

उन्होंने आगे कहा कि हमारे पास वर्तमान में 10 स्क्वाड्रन की कमी है, जिससे वायु सेना की क्षमता प्रभावित होती है. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के पास लड़ाकू विमानों के 20 स्क्वाड्रन हैं जिसमें अत्याधुनिक एफ-16 और चीन में निर्मित जे-17 जैसे लड़ाकू विमान शामिल हैं. वहीं चीन के पास करीब 1700 लड़ाकू विमान है, उसमें से 800 चौथी पीढ़ी के फाइटर जेट हैं.