जरा सोचिए: दूषित है भारत की पूरी फूड चेन! वेज हो या नॉनवेज, आप के खाने में केमिकल ज्यादा न्यूट्रिशन कम, नए शोध में बड़ी चेतावनी

हम जो चीजें अपनी सेहत को बेहतर करने के लिए खा रहे हैं अगर आपको मालूम चले कि वही आपके शरीर को नुकसान पहुंचा रही है तो. जी हां, आज हम आपको बताएंगे भारत की दूषित हो रही फूड चेन के बारे में.

Published date india.com Updated: February 11, 2026 10:42 PM IST
जरा सोचिए: दूषित है भारत की पूरी फूड चेन! वेज हो या नॉनवेज, आप के खाने में केमिकल ज्यादा न्यूट्रिशन कम, नए शोध में बड़ी चेतावनी

Zara Sochiye: जरा सोचिए. आप खाना खाते हैं पोषण और कैलोरी के लिए. पर नए शोध में चेतावनी दी गई है कि भारत समेत दुनिया के कई देशों की पूरी फूड चेन ही दूषित है. हमारा खाना खराब, मिलावटी या न्यूट्रिशन से समझौता करने वाला है. खेत से आपकी थाली तक आते-आते खाद्य पदार्थ दूषित हो जाते हैं. इससे कई बीमारियों शरीर में एंट्री कर रही हैं. हमारे भोजन के साथ ये समस्या क्यों हो रही है नए शोध पर आज की रिपोर्ट में जानेंगे. साथ ही ऐसे ही हमारे जीवन को गहरायी तक प्रभावित करने वाले मुद्दे पर Zee Media अपनी रिपोर्ट पेश करेगा. इस नई सीरीज ‘जरा सोचिए’ के जरिए.

क्या कहता है खाद्य पदार्थों पर हुआ नया शोध

भारत और दुनिया पर एक नई महामारी खतरा मंडरा रहा है. लाखों भारतीय रोजाना जो खाना खा रहे हैं, वह खराब, मिलावटी या न्यूट्रिशन से समझौता किया हुआ है. दूध, पनीर, मसाले, सब्जियां, अंडे, मीट, मछली और पैकेज्ड फूड सभी में मिलावट या इनकी रेगुलेटरी निगरानी में कमियां है. साथ ही अल्ट्रा-प्रोसेस्ड डाइट और न्यूट्रिशन की कमी भी बड़ी समस्या है. डॉ. नवल कुमार वर्मा, MD (होम), Hon PhD (डॉक्टर ऑफ साइंस) ने अपने एक शोध में यह दावा किया है. डॉ. नवल कुमार वर्मा ग्लोबल वेलनेस (आयुष) और फूड सेफ्टी एक्सपर्ट हैं.

खाने में 3 बड़ी समस्याएं

  1. खाने की चीजों में अब रेगुलर तौर पर केमिकल रेसिड्यू, एंटीबायोटिक्स, हॉर्मोन, माइक्रोबियल टॉक्सिन और इंडस्ट्रियल एडिटिव्स पाए जा रहे हैं.
  2. अल्ट्रा-प्रोसेस्ड, आजकल के खाने में ज्यादा कार्बोहाइड्रेट और ज्यादा फैट वाले खाने की चीजें ज्यादा हैं और रेगुलेटरी निगरानी ठीक से नहीं है.
  3. भारत में फूड कंटैमिनेशन अब सिर्फ कुछ प्रोडक्ट्स तक ही सीमित नहीं है. जांच से पता चलता है कि फूड इंटेग्रिटी में बड़े पैमाने पर और सिस्टमैटिक खराबी है.

किस तरह की बीमारियों का खतरा

WHO, ICMR और ग्लोबल पब्लिक-हेल्थ एजेंसियां ​​अनसेफ खाने को नॉन-कम्युनिकेबल बीमारियों (NCDs) का एक बड़ा कारण मानती हैं. एक्सपर्ट्स चेतावनी देते हैं कि अनसेफ खाना मोटापा, डायबिटीज, दिल की बीमारी, इनफर्टिलिटी और कैंसर से जुड़ा है.

(photo credit AI, for representation only)

इन खाद्य पदार्थों से ज्यादा रहे सतर्क

  • दूध, दही, पनीर और घी
  • मसाले
  • सब्जियां और फल
  • अंडे, पोल्ट्री, मीट, मछली और सीफूड
  • पैकेज्ड और प्रोसेस्ड नॉन-वेजिटेरियन खाना

कौन है इसका जिम्मेदार

मॉडर्न फूड सप्लाई चेन में गहरी स्ट्रक्चरल कमजोरियां हैं, जो खेती के इनपुट से शुरू होकर और जानवरों के चारे से लेकर इंडस्ट्रियल प्रोसेसिंग, कोल्ड स्टोरेज और रिटेल हैंडलिंग तक जाती हैं.

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नॉन-वेजिटेरियन खाने में मिलावट के क्या हैं साइंटिफिक सबूत

अंडे- शोध में बताया गया है कि एंटीबायोटिक के बचे हुए हिस्से, हार्मोनल ग्रोथ प्रमोटर, साल्मोनेला और E. कोलाई से कंटैमिनेशन, मिलावटी पोल्ट्री फीड से निकलने वाले केमिकल के बचे हुए हिस्से निर्माण प्रक्रिया के दौरान अंडे को दूषित करते हैं.

इनसे एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस, गट माइक्रोबायोटा में रुकावट और इम्यून इम्बैलेंस और लगातार हल्की सूजन जैसी शारीरिक समस्याएं होती हैं.

पोल्ट्री और मीट – बिना वजह एंटीबायोटिक का इस्तेमाल, वजन बढ़ाने के लिए हार्मोनल ग्रोथ प्रमोटर, स्लॉटर हाइजीन की कमी, शेल्फ लाइफ बढ़ाने के लिए केमिकल प्रिजर्वेटिव मिलाने से पोल्ट्री और मीट की क्वालिटी खराब होती है.

याद रहे द वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन ने जानवरों की फूड चेन से जुड़े एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (AMR) को दुनिया के टॉप दस पब्लिक हेल्थ खतरों में से एक माना है, जिसका सीधा असर इन्फेक्शन कंट्रोल, सर्जरी, कैंसर केयर और इंटेंसिव मेडिसिन पर पड़ता है.

मछली और सीफूड- आर्टिफ़िशियल प्रिजर्वेशन के लिए फॉर्मेलिन और अमोनिया का इस्तेमाल, मरकरी और कैडमियम जैसे हेवी मेटल्स, इंडस्ट्रियली पॉल्यूटेड पानी के सोर्स के संपर्क में आना मछली और सीफूड को संक्रमित करते हैं.

इससे न्यूरोलॉजिकल डैमेज, हार्मोनल डिसरप्शन और कैंसर का खतरा बढ़ना जैसी समस्याएं जन्म लेती हैं.

(photo credit AI, for representation only)

पैकेज्ड और प्रोसेस्ड नॉन-वेजिटेरियन फूड

सॉसेज, नगेट्स, फ्रोजन मीट, रेडी-टू-ईट करी अल्ट्रा-प्रोसेस्ड होते हैं. इसमें रिफाइंड ऑयल, ट्रांस फैट और सोडियम ज्यादा होता है.

इससे मेटाबोलिक सिंड्रोम, कोलन और गैस्ट्रिक कैंसर और कार्डियोवैस्कुलर बीमारी होती है.

दुनिया कैसे इस समस्या से निपट रही

जिन देशों में हेल्थ के नतीजे बेहतर होते हैं, वे खाने को सिर्फ एक कमर्शियल प्रोडक्ट नहीं, बल्कि एक मुख्य पब्लिक-हेल्थ इंटरवेंशन मानते हैं. वहां एंटीबायोटिक रेसिड्यू की कड़ी निगरानी, खेत से प्लेट तक ज़रूरी ट्रेसेबिलिटी, रियल-टाइम फ़ूड अलर्ट और रिकॉल सिस्टम और अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फ़ूड की मार्केटिंग पर रोक जैसे कदम उठाया जाता है.

कैसे बच सकते हैं हम

ग्लोबल वेलनेस (आयुष) और फ़ूड सेफ़्टी एक्सपर्ट डॉ. नवल कुमार वर्मा हैं कि आज का खाना पोषण से बायोकेमिकल स्ट्रेस की ओर शिफ्ट हो गया है. बिना शुद्धता के कैलोरी बीमारी को बढ़ाती हैं. जानवरों का खाना सिर्फ प्रोडक्टिविटी के स्टैंडर्ड पर ही नहीं, बल्कि इंसानों के हेल्थ स्टैंडर्ड पर भी खरा उतरना चाहिए. आयुष को मॉडर्न न्यूट्रिशन साइंस के साथ मिलाएं. मौसमी और लोकल खाने को बढ़ावा देना चाहिए. ताज़ा, ट्रेस करने लायक और कम से कम प्रोसेस्ड खाना चुनें. पैकेज्ड और प्रोसेस्ड मीट कम खाएं. रिफाइंड, ज़्यादा कार्बोहाइड्रेट वाले पैकेज्ड खाने की चीज़ों को कम करें.

नोट: जी मीडिया समाज में अच्छा और सकारात्मक बदलाव लाने के लिए काम कर रहा है. अपनी सोच ‘जरा सोचिये’ के साथ वह एक कदम आगे बढ़ा है. ‘जरा सोचिये’ एक ऐसी पहल है, जिसका मकसद लोगों को उनके अधिकारों और जिम्मेदारियों के बारे में जागरूक करना है. साथ ही, ये उन जरूरी मुद्दों पर ध्यान दिलाने का प्रयास करती है, जिन पर सोचने और समझने की जरूरत है.

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