बेंगलुरु: भारत ने मानवयान मिशन की दिशा में एक कदम और बढ़ा दिया है. भारत और फ्रांस ने गुरूवार को गगनयान के लिए एक कार्यकारी समूह की घोषणा की. बता दें पीएम नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस पर इसरो के पहले मानवयान मिशन की घोषणा की थी. फ्रांसीसी अंतरिक्ष एजेंसी के अध्यक्ष जीन येव्स ली गॉल द्वारा बेंगलुरु स्पेस एक्स्पो के छठे संस्करण में यह घोषणा की गई. Also Read - देश में 24 घंटे में कोरोना के 9,851 नए मामले, संक्रमितों का आंकड़ा 2 लाख 26 हजार के पार

भारत की 2022 से पहले अंतरिक्ष में तीन मनुष्यों को भेजने की योजना है. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन का मिशन महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह रूस, अमेरिका और चीन के बाद भारत को दुनिया के चौथे देश की फेहरिस्त में शामिल करेगा, जिसने कोई मानवयान अंतरिक्ष में भेजा है. Also Read - अमेरिकी सांसदों, राजदूत ने वॉशिंगटन में गांधी की प्रतिमा में तोड़फोड़ की निंदा की

गॉल ने कहा कि इसरो और फ्रांस की अंतरिक्ष एजेंसी सीएनईएस अंतरिक्ष औषधि, अंतरिक्ष यात्रियों के स्वास्थ्य की निगरानी करने, जीवन रक्षा मुहैया कराने, विकिरणों से रक्षा, अंतरिक्ष के मलबे से रक्षा और निजी स्वच्छता व्यवस्था के क्षेत्रों में संयुक्त रूप से अपनी विशेषज्ञता दिखाएंगे. इसरो की योजना अपने अंतरिक्ष यात्रियों के जरिए बेहद कम गुरुत्वाकर्षण पर प्रयोग करने की है. Also Read - World Enviorment Day 2020: ये शहर हैं दुनिया में सबसे ज्यादा प्रदूषित, जानें यहां क्यों बने ऐसे हालात

दोनों देशों की मंगलग्रह, शुक्र और क्षुद्र ग्रह पर भी काम करने की योजना है. गॉल ने कहा, ”सीएनईएस अंतरिक्ष में भेजे गए पहले फ्रांसीसी मानवयान थॉमस पेस्क्वेत प्रोक्सिमा मिशन से हासिल हुए अनुभव को साझा करने के लिए इसरो के साथ इस परियोजना पर काम करने के लिए गौरवान्वित है.”

– भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) मानव अंतरिक्ष मिशन के लिए आवश्यक प्रौद्योगिकियों के साथ तैयार है

– छोटे उपग्रहों के बढ़ते उपयोग को देखते हुए, भारत एक छोटे से उपग्रह लॉन्च वाहन पर भी काम कर रहा है

– भारत की अंतरिक्ष प्रक्षेपण क्षमताओं ने 104 उपग्रहों को एक बार में लॉन्च करने के लिए तेजी से सुधार किया है

– भारत को युद्ध और संघर्ष के लिए एक प्रतिबंधक के रूप में अपनी अंतरिक्ष क्षमता का उपयोग करने में सक्षम होना है

– भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम पहले से ही 40 बिलियन डॉलर है

– जबकि विश्व वाणिज्यिक अंतरिक्ष बाजार 380 अरब डॉलर है

– बैंक ऑफ अमेरिका के मेरिल लिंच के मुताबिक, अगले तीन दशकों में कम से कम 2.7 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है

– अमेरिका में इस उद्योग में 40% से अधिक बाजार हिस्सेदारी है, लेकिन अमेरिका की सफलता अकेले नासा से नहीं रही है

– नासा और डीओडी द्वारा सक्रिय रूप से प्रोत्साहित और प्रचारित एक गतिशीलत के साथ निजी क्षेत्र से सफलता का हिस्सा भी रहा है