AI के ग्लोबल नियम अब भारत के बिना नहीं बनेंगे! दुनिया की सबसे बड़ी AI संस्था में मिली बड़ी जिम्मेदारी

Written By: Farha Fatima Updated by: Farha Fatima
Updated Date:July 4, 2026 4:43 PM IST

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर वैश्विक नीतियां तय करने वाली 'AI For Good Global Commission' में मुकेश अंबानी और सुनील भारती मित्तल को फाउंडिंग मेंबर बनाया गया है. इससे भारत की आवाज अब AI गवर्नेंस, रेगुलेशन और ग्लोबल स्टैंडर्ड्स तय करने की प्रक्रिया में और मजबूत होगी.

  • मुकेश अंबानी और सुनील भारती मित्तल को 'AI For Good Global Commission' का फाउंडिंग मेंबर बनाया गया है.
  • इससे AI के वैश्विक नियम और नीतियां तय करने में भारत की भागीदारी बढ़ेगी.
  • भारत अपने डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और AI इकोसिस्टम के दम पर बड़ी भूमिका निभाने की तैयारी में है.
  • हालांकि, AI सुपरपावर बनने के लिए देश को कंप्यूटिंग क्षमता, डेटा सुरक्षा और मजबूत नीतिगत ढांचे पर अभी काफी काम करना होगा.

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर ग्लोबल बातचीत में भारत की आवाज़ और मज़बूत हुई है. रिलायंस इंडस्ट्रीज़ के चेयरमैन मुकेश अंबानी और भारती एंटरप्राइज़ेज़ के चेयरमैन सुनील भारती मित्तल को 'AI फॉर गुड ग्लोबल कमीशन' का फाउंडिंग मेंबर बनाया गया है. यह नियुक्ति केवल दो उद्योगपतियों की व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि इस बात का संकेत है कि भारत अब AI के भविष्य पर होने वाली वैश्विक बातचीत में एक अहम और प्रभावशाली खिलाड़ी बनकर उभर रहा है. पहले समझिए 'AI For Good Global Commission' आखिर है क्या? यह कमीशन हाई-लेवल इंटरनेशनल संस्था है जो AI गवर्नेंस, रेगुलेशन और एक्सेस के भविष्य पर चर्चा करेगी. इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि AI का फायदा केवल अमीर देशों तक सीमित न रहे. कमीशन की पहली बैठक 7 से 10 जुलाई के बीच जिनेवा में होनी है. उन्हें ऐसे समय में शामिल किया गया है जब भारत अपने डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, बड़े टैलेंट पूल और बढ़ते AI इकोसिस्टम के दम पर खुद को एक बड़े AI मार्केट के तौर पर स्थापित कर रहा है. क्या भारत अपने रणनीतिक हितों की रक्षा करते हुए ग्लोबल AI स्टैंडर्ड्स को कैसे प्रभावित कर सकता है. आइए समझते इससे भारत पर क्या असर पड़ेगा.

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क्या भारत AI के नियम तय करने वाले देशों की पहली पंक्ति में शामिल हो गया है?

हां, यह नियुक्ति भारत को AI ग्लोबल गवर्नेंस की टेबल पर प्रमुख जगह दिलाती है. moneycontrol.com के मुताबिक, कमीशन में 40+ फाउंडिंग मेंबर्स शामिल हैं, जिनमें विश्व नेता, टेक CEO और UN एजेंसियां हैं. भारत के दो प्रमुख उद्योगपतियों की भूमिका से देश की आवाज AI स्टैंडर्ड्स, रेगुलेशन और इक्विटेबल एक्सेस पर प्रभाव डाल सकेगी. यह भारत के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (जैसे UPI, Aadhaar) और बड़े टैलेंट पूल का प्रमाण है, जो देश को AI चर्चा में प्रभावशाली खिलाड़ी बनाता है.

क्या भारत "AI सुपरपावर" बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है?

भारत तेजी से आगे बढ़ रहा है. IndiaAI Mission (2024) के तहत ₹10,372 करोड़ का आवंटन हुआ, जिसमें कंप्यूट क्षमता, फाउंडेशनल मॉडल्स, डेटासेट्स और स्किल्स पर फोकस है. ijfmr.com के मुताबिक, IndiaAI Compute Portal पर 38,000+ GPUs और 1,050 TPUs सब्सिडाइज्ड रेट पर उपलब्ध हैं. देश "Global AI Garage" बनने का लक्ष्य रखता है, जहां लोकल समस्याओं (स्वास्थ्य, कृषि, भाषा) के लिए AI समाधान विकसित हों. टैलेंट पूल, स्टार्टअप इकोसिस्टम और डिजिटल इंफ्रा के दम पर भारत AI में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है, हालांकि पूर्ण सुपरपावर बनने में समय लगेगा.

AI अब केवल तकनीक नहीं, बल्कि नई भू-राजनीतिक ताकत बन चुकी है

AI अब चिप्स, कंप्यूट पावर और डेटा कंट्रोल से जुड़ी भू-राजनीतिक शक्ति है. agatadata.com के मुताबिक, अमेरिका और चीन जैसे देशों में AI क्षमता केंद्रित है, जो आर्थिक, सैन्य और सूचना प्रभाव तय करती है. AI गवर्नेंस पर अंतरराष्ट्रीय नियम बन रहे हैं, जहां कंप्यूटिंग, एल्गोरिदम और डेटा पर नियंत्रण "टेक्नोपोलर" दुनिया बना रहा है. भारत जैसे मिडिल पावर देश इसमें संतुलन बनाने और डेवलपिंग वर्ल्ड के हितों की रक्षा करने की कोशिश कर रहे हैं.

अगर भविष्य में AI के लिए अंतरराष्ट्रीय नियम बनते हैं, तो भारत की आवाज वहां मौजूद होगी ?

कमीशन की सदस्यता से भारत AI नियम-निर्माण में सीधा योगदान दे सकेगा. यह सुनिश्चित करेगा कि नियम डेवलपिंग देशों के एक्सेस, लोकल भाषाओं और सोशल इंपैक्ट को ध्यान में रखें. भारत का अनुभव (डिजिटल पब्लिक गुड्स) ग्लोबल स्टैंडर्ड्स को प्रभावित कर सकता है, जिससे देश की सॉवरेन AI क्षमता मजबूत होगी.

भारत के सामने चुनौतियां क्या हैं?

भारत को कई चुनौतियों का सामना करना है, जिनमें कंप्यूटिंग क्षमता, डेटा प्रोटेक्शन, भू-राजनीतिक संतुलन और इंक्लूसिव डिस्ट्रीब्यूशन शामिल हैं.क्या भारत के पास पर्याप्त AI कंप्यूटिंग क्षमता है? वर्तमान में अपर्याप्त है. भारत के पास ग्लोबल डेटा सेंटर क्षमता का मात्र 3% है, जबकि विश्व का 20% डेटा यहां है. IndiaAI Mission 10,000+ GPUs का लक्ष्य रखता है, लेकिन 2030 तक 700,000 GPUs की जरूरत बताई जा रही है. डेटा सेंटर क्षमता बढ़ाने (Mumbai, Bengaluru आदि में) और पावर इंफ्रा के विस्तार की जरूरत है.

Q 1. भारत, ग्लोबल AI गवर्नेंस संस्था में मुकेश अंबानी और सुनील भारती मित्तल की मौजूदगी का फ़ायदा उठाकर डेवलपिंग इकॉनमीज़ के पक्ष में इंटरनेशनल AI रेगुलेशंस को कैसे आकार दे सकता है?

भारत अंबानी और मित्तल के माध्यम से कमीशन में डेवलपिंग देशों के हितों को मजबूती से रख सकता है. इक्विटेबल एक्सेस, टेक्नोलॉजी ट्रांसफर, लोकल भाषा AI और ओपन स्टैंडर्ड्स पर जोर देकर ग्लोबल नियमों को Global South के पक्ष में आकार दे सकता है.

Q 2. क्या भारत का डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर मॉडल एक ऐसे ग्लोबल AI फ्रेमवर्क का आधार बन सकता है जो इनोवेशन, किफ़ायतीपन और ज़िम्मेदार इस्तेमाल के बीच संतुलन बनाए रखे?

हां, भारत का डिजिटल पब्लिक इंफ्रा (UPI, Aadhaar, ONDC) मॉडल ग्लोबल AI फ्रेमवर्क का अच्छा आधार बन सकता है. यह इनोवेशन को बढ़ावा देते हुए किफायती पहुंच और डेटा प्राइवेसी का संतुलन बनाता है. कई देश इसे पहले ही अपना रहे हैं.

Q 3. भारत को कौन से पॉलिसी बदलाव करने चाहिए ताकि यह पक्का किया जा सके कि ग्लोबल AI नियम भारतीय स्टार्टअप्स, रिसर्चर्स और घरेलू AI कंपनियों के लिए नुकसानदेह न हों?

भारत को सॉवरेन AI इंफ्रा बढ़ाना, लाइट-टच रेगुलेशन अपनाना, DPDP Act को AI के अनुकूल बनाना और घरेलू स्टार्टअप्स को कंप्यूट तथा डेटा एक्सेस देना चाहिए. इससे ग्लोबल नियम भारतीय कंपनियों के लिए अनुकूल रहेंगे.

Q 4. जैसे-जैसे ग्लोबल AI गवर्नेंस आकार ले रही है, क्या भारत एक भरोसेमंद AI लीडर के तौर पर उभरने के लिए ज़रूरी कानूनी, नैतिक और डेटा सुरक्षा फ्रेमवर्क के साथ तैयार है?

भारत आंशिक रूप से तैयार है. DPDP Act और IndiaAI गाइडलाइंस मौजूद हैं, लेकिन पूर्ण AI कानून, ज्यादा कंप्यूट क्षमता और मजबूत नैतिक फ्रेमवर्क की जरूरत है. कमीशन की सदस्यता इसे भरोसेमंद लीडर बनाने में मदद करेगी.

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