हैदराबाद: एंटी-सैटेलाइट मिसाइल की मारक क्षमता के परीक्षण के बाद सत्‍ता और विपक्ष के बीच ठन गई है. जहां पीएम नरेंद्र मोदी ने इस सफलता को लेकर देश की बड़ी छलांग बताया, वहीं, विरोधी दल पीएम के इस कार्यक्रम में ऑनलाइन जुड़ने को लेकर लोकसभा चुनाव की अचार संहिता का उल्‍लंघन बताते हुए चुनावी लाभ लेने का आरोप लगाया है. इस बीच एक और वैज्ञानिक और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन के पूर्व प्रमुख ने विरोधी दलों के विरोध के बीच मौजूदा सरकार की मजबूत इच्‍छा शक्ति को इस मिशन का श्रेय दिया है. इसरो के पूर्व अध्यक्ष और अब बीजेपी में शामिल हो चुके जी माधवन नायर ने बुधवार को कहा कि भारत के पास एंटी-सैटेलाइट मिसाइल क्षमता एक दशक पहले से थी, लेकिन उस वक्त इसे प्रदर्शित करने की राजनीतिक इच्छाशक्ति का अभाव था. नायर कहा कि जब चीन ने 2007 में एक मिसाइल प्रक्षेपित कर एक पुराने मौसम उपग्रह को नष्ट कर दिया था, उस वक्त भारत के पास ऐसे ही मिशन को अंजाम देने की प्रौद्योगिकी थी.

वहीं, डीआरडीओ के पूर्व प्रमुख डॉ. वीके सारस्‍वत ने मिशन शक्‍त‍ि पर साफ किया कि हमने नेशनल सिक्‍योरिटी एडवाइजर और नेशनल सिक्‍युरिटी काउंसिल के सामने प्रजेंटेशन दिया था, तब इस पर सभी से विचार विमर्श हुआ था, दुर्भाग्‍य से पॉजिटिव रेस्‍पॉन्‍स ( कांग्रेस नीत यूपीए सरकार से) नहीं मिला, इसलिए हम आगे नहीं बढ़ सके.

नायर ने बताया, ”अब (प्रधानमंत्री नरेंद्र) मोदीजी ने पहल की है. उनमें राजनीतिक इच्छाशक्ति और यह कहने का साहस है कि हम ऐसा करेंगे. हमने अब यह पूरी दुनिया को दिखा दिया है.”

वहीं, डीआरडीओ के पूर्व प्रमुख डॉ. वीके सारस्‍वत ने मिशन शक्‍त‍ि पर साफ किया कि हमने नेशनल सिक्‍योरिटी एडवाइजर और नेशनल सिक्‍युरिटी काउंसिल के सामने प्रजेंटेशन दिया था, तब इस पर सभी से विचार विमर्श हुआ था, दुर्भाग्‍य से पॉजिटिव रेस्‍पॉन्‍स ( कांग्रेस नीत यूपीए सरकार से) नहीं मिला, इसलिए हम आगे नहीं बढ़ सके.

बता दें कि नायर 2003 से 2009 तक इसरो एवं अंतरिक्ष आयोग के प्रमुख रहे और अंतरिक्ष विभाग के सचिव के तौर पर भी सेवाएं दी. यह पूछे जाने पर कि क्या भारत 2007 में ही एंटी-सैटेलाइट मिसाइल क्षमता प्रदर्शित कर सकता था, इस पर नायर ने कहा, निश्चित तौर पर. लेकिन आगे कदम बढ़ाने के राजनीतिक निर्णय के अभाव में ऐसा नहीं किया जा सका. उन्होंने कहा, ”अब मोदीजी ने साहसिक रूप से यह निर्णय किया.”