नई दिल्ली: भारत ने मंगलवार को कहा कि विवादास्पद नागरिकता संशोधन विधेयक (CAB) पर एक संघीय अमेरिकी निकाय ने जो बयान दिया है, वह सही नहीं है. दरअसल इससे पहले दिन में, यूएस कमीशन फॉर इंटरनेशनल रिलीजन फ्रीडम (यूसीआईआरएफ) ने कहा था कि नागरिकता संशोधन विधेयक ‘गलत दिशा’ में बढ़ाया गया एक खतरनाक कदम है और यदि यह भारत की संसद में पारित होता है तो भारत के गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए.

हालांकि विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने अमेरिका को करारा जवाब देते हुए कहा, “नागरिकता (संशोधन) विधेयक पर अमेरिकी धार्मिक स्वतंत्रता आयोग का बयान सही नहीं है.” उन्होंने कहा, “न तो नागरिकता संशोधन विधेयक और न ही नेशनल रजिस्टर फॉर सिटीजन में किसी भी धर्म के किसी भी भारतीय नागरिक से उसकी नागरिकता लेने की कोशिश की गई है.” विदेश मंत्रालय ने कहा कि अमेरिका सहित हर देश को अपनी नागरिकता को मान्य करने और विभिन्न नीतियों के माध्यम से इस विशेषाधिकार का प्रयोग करने का अधिकार है. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने कहा कि यह निराशाजनक है कि यूएससीआईआरएफ ने सिर्फ अपने पूर्वाग्रहों के आधार पर ही सोचना चुना है जबकि इस मुद्दे पर हस्तक्षेप का उसे कोई अधिकार नहीं है.

बता दें कि लोकसभा ने सोमवार को नागरिकता संशोधन विधेयक (कैब) को मंजूरी दे दी, जिसमें अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान से धार्मिक प्रताड़ना के कारण 31 दिसंबर 2014 तक भारत आए हिन्दू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदायों के लोगों को भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन करने का पात्र बनाने का प्रावधान है.

इस पर अमेरिकी आयोग ने कहा, ”अगर कैब दोनों सदनों में पारित हो जाता है तो अमेरिकी सरकार को गृह मंत्री अमित शाह और मुख्य नेतृत्व के खिलाफ प्रतिबंध लगाने पर विचार करना चाहिए. उसने कहा, ”अमित शाह द्वारा पेश किए गए धार्मिक मानदंड वाले इस विधेयक के लोकसभा में पारित होने से यूएससीआईआरएफ बेहद चिंतित है.

हालांकि इस पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने कहा कि नागरिकता संशोधन बिल और एनआरसी किसी भी धर्म के भारतीय नागरिक से उसकी नागरिकता नहीं छीनता है. ये बिल उन धार्मिक अल्पसंख्यकों को भारत की नागरिकता देता है जो पहले से ही भारत में आए हुए हैं. भारत ने ये फैसला मानवाधिकार को देखते हुए लिया है.