India की आवाज: नागा साधु बना वकील और लड़ा राम लला का केस 

Ram Mandir Ayodhya: करुणेश शुक्ला ने कहा कि उन्होंने कानपुर से लॉ की पढ़ाई पूरी की और फिर रिसपांडेड नंबर 14 श्रीमहंत धर्मदास निर्वाणी अखाड़ा की ओर से राम लला के केस में पेश हुए थे.

Published date india.com Published: January 15, 2024 7:06 PM IST

India Ki Awaaz: 22 जनवरी 2024 का दिन सुनहरे अक्षरों में दर्ज किया जाएगा. इस तारीख का हम सबको बेसब्री से इंतजार है. हम सबके लिए ऐतिहासिक दिन होने वाला है. क्योंकि इस दिन अयोध्या में भगवान श्रीराम की प्राण प्रतिष्ठा होनी है. इस बीच हम आपको एक ऐसे शख्स से मिलवाने जा रहे हैं जो कि नागा साधु हैं. लेकिन पेशे से वकील हैं. सबसे खास बात ये है कि इनका हनुमानगढ़ी से गहरा नाता है. नाम है करुणेश शुक्ला. बस्ती के रहने वाले करुणेश ने India.com हिंदी के स्पेशल शो ‘India की आवाज’ में हमसे बात की. हमने करुणेश से कई सवाल पूछे, उनका जवाब आप लोग भी पढ़ें.

सवाल: काले कोट में नागा साधु! कभी किसी ने कुछ कहा नहीं?

जवाब: भगवान की कृपा है. कई लोग पूछते हैं कि आप नागा साधु से वकील कैसे! मेरा जवाब हमेशा यही रहता है कि भगवान जैसा चाहते हैं, मैं वैसा ही हूं.

सवाल: आप नागा साधु क्यों बने?

जवाब: मेरा पूरा परिवार बस्ती का रहने वाला है. ब्राह्मण परिवार होने की वजह से हमारे घर में बहुत ज्यादा पूजा पाठ होता है. मैं भी बचपन से पूजा पाठ में शामिल होता था. मेरी मां चाहती थीं कि घर का कोई अयोध्या जाकर भगवान राम की सेवा लग जाए. इसके लिए उन्होंने मुझे चुना. मां के आदेश का पालन करते हुए मैं अयोध्या चला गया. वहां हनुमानगढ़ी में ही रहता. पूजा-पाठ करता. दीक्षा लिया. महंत हरिशंकर दास पहलवान के आश्रम में रहकर पहलवानी, रामचरित मानस और वेदांत का गहन अध्यन किया. इसके साथ ही नागा साधु बन गया.

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सवाल: नागा साधु से वकालत की पढ़ाई? क्यों ? क्या वजह थी?

जवाब: राम लला का केस कोर्ट में चल रहा था. परिवार वाले चाहते थे कि कोई घर का ही कोई केस लड़े. इसके लिए घर वालों ने मुझे चुना. मैं बचपन से ही पढ़ाई में अच्छा था. कानपुर से मैंने लॉ की पढ़ाई पूरी की. और फिर रिसपांडेड नंबर 14 श्रीमहंत धर्मदास निर्वाणी अखाड़ा की ओर से पेश हुआ था.

सवाल: ऐसा कोई किस्सा जो हनुमानगढ़ी या अयोध्या से जुड़ा हो?

जवाब: अक्सर हमारा परिवार अयोध्या भगवान श्रीराम के दर्शन करने जाता रहता है. जब मैं छोटा था तो देखता था कि हम सब अपने अपने घरों में रहते हैं और हमारे भगवान टेंट में रह रहे हैं. ये देखकर मेरी मां और हम रो देते थे. अब हमें बहुत खुशी है कि हमारे भगवान को घर मिलने जा रहा है.

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