LPG की किल्लत के बीच बड़ा ऐलान: अब पेट्रोल पंप पर मिलेगा केरोसिन, सरकार ने नियमों में दी ढील

Written By: Gargi Santosh Updated by: Gargi Santosh
Published Date:March 29, 2026 10:06 PM IST

India LPG Crisis: भारत में LPG संकट के बीच सरकार ने केरोसिन की सप्लाई फिर शुरू करने का फैसला लिया है. अब पेट्रोल पंप पर भी मिट्टी का तेल आसानी से मिल जाएगा.

मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव और आपूर्ति में आई रुकावट की वजह से पूरी दुनिया में तेल और गैस की कमी हो गई है. भारत भी इस संकट से अछूता नहीं है, क्योंकि देश अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा बाहर से मंगाता है. इन्हीं सब को देखते हुए केंद्र सरकार ने आम लोगों को बड़ी राहत दी है. दरअसल, सरकार ने केरोसिन यानी मिट्टी के तेल की सप्लाई के नियमों में ढील दी है.

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21 राज्यों में शुरू होगी केरोसिन की सप्लाई

सरकार के नए फैसले के मुताबिक, 21 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम (PDS) के तहत 60 दिनों के लिए केरोसिन की अतिरिक्त आपूर्ति की जाएगी. इसमें दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और गुजरात जैसे बड़े राज्य भी शामिल हैं. इसका मकसद यह है कि जिन लोगों को गैस की कमी का सामना करना पड़ रहा है, उन्हें वैकल्पिक ईंधन मिल सके. इससे खासकर ग्रामीण और कम आय वाले परिवारों को राहत मिलने की उम्मीद है.

पेट्रोल पंपों पर भी मिलेगा केरोसिन

सरकार ने नियमों में बदलाव करते हुए कुछ पेट्रोल पंपों को केरोसिन स्टोर और बेचने की अनुमति दी है. हर पेट्रोल पंप पर अधिकतम 5,000 लीटर तक केरोसिन रखा जा सकेगा और हर जिले में दो पंपों को इसकी जिम्मेदारी दी जाएगी. इस फैसले का मकसद सप्लाई को तेज करना और लोगों तक आसानी से केरोसिन पहुंचाना है, ताकि लंबी लाइनों और कमी की समस्या से बचा जा सके.

नियमों में ढील, लेकिन सुरक्षा बनी रहेगी

केरोसिन की सप्लाई को तेज करने के लिए सरकार ने स्टोरेज, ट्रांसपोर्ट और डिस्ट्रीब्यूशन से जुड़े कुछ लाइसेंसिंग नियमों में अस्थायी छूट दी है. इसके साथ ही यह भी साफ किया गया है कि सुरक्षा नियमों और दिशा-निर्देशों का पालन पूरी तरह किया जाएगा. केरोसिन का इस्तेमाल सिर्फ घरेलू जरूरतों - जैसे खाना पकाने और रोशनी के लिए ही होगा, ताकि इसका गलत इस्तेमाल न हो सके.

पहले क्यों कम हुआ था केरोसिन?

पिछले कुछ सालों में सरकार ने LPG और बिजली को बढ़ावा देने के लिए केरोसिन की सप्लाई धीरे-धीरे कम कर दी थी. उज्ज्वला जैसी योजनाओं के कारण लोगों ने गैस का ज्यादा इस्तेमाल शुरू कर दिया और केरोसिन का उपयोग घट गया. लेकिन अब जब वैश्विक संकट की वजह से गैस की आपूर्ति प्रभावित हुई है, तो सरकार ने अस्थायी तौर पर फिर से केरोसिन को विकल्प के रूप में उपलब्ध कराने का फैसला लिया है. इससे यह साफ है कि मुश्किल समय में पुराने साधनों को भी दोबारा अपनाना जरूरी हो जाता है.

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