नई दिल्ली. चीन और भारत में तनाव फिर बढ़ रहा है. हथियार और तकनीक के मामले में चीन भले ही आगे हो, लेकिन युद्ध जैसी स्थिति में भारत उसे लंबे समय तक रोकने की ताकत रखता है. डिफेंस एक्सपर्ट मानते हैं भारतीय सेना अब सैन्य साजो-सामान और तकनीकी के लिहाज से काफी मजबूत हो चुकी है. सिक्किम के डोकलाम इलाके को लेकर दोनों देशों के बीच तनाव है. ऐसे में दोनों की ताकत की तुलना कर लेना जरूरी हो जाता है.

हिंदी समाचार पत्र में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, 1962 में जब दोनों देशों के बीच युद्ध हुआ था तब भारत के पास 12 हजार कुल सैनिक थे जबकि चीन के पास 80 की बड़ी सैनिक ताकत थी. 2017 में स्थिति काफी अलग है. चीन के पास जहां 46,35,000 सैनिक हैं वहीं भारत के पास 34,68,000 सैनिक हैं. इसमें सक्रिय सैनिक 13,25,000 हैं. चीन के सक्रिय सैनिकों की संख्या 23,35,000 है.

चीन का रक्षा बजट जहां 9815 अरब रुपए का है वहीं, भारत का रक्षा बजट 3315 अरब रुपए का है. लड़ाकू विमानों की बात की जाए तो चीन के पास 1385 और भारत के पास 809 लड़ाकू विमान हैं. चीन के पास 206 हेलीकॉप्टर हैं जबकि भारत के पास 27 हेलिकॉप्टर हैं.

चीन के पास 6457 जबकि भारत के पास 4426 तोपें हैं. चीन के पास 4788 हथियारबंद वाहन हैं और भारत के पास 6704. चीन के पास 13 हजार बैलेस्टिक मिसाइलें हैं वहीं, भारत के पास 5 हजार. यह जानकारी ग्लोबल फायरपावर के हवाले से दी गई है.

वहीं भारत, इजरायल से हेरॉन टीपी ड्रोन खरीदने जा रहा है, जिससे सीमा मोर्चे पर काफी मजबूती मिलेगी. हेरॉन-टीपी लड़ाकू ड्रोन हवा से जमीन पर टारगेट तबाह करने वाली मिसाइलों से लैस होंगे. हेरॉन-टीपी लड़ाकू ड्रोन्स पूरी तरह ऑटोमेटिक हैं, जिसे कंट्रोल रूम में बैठकर सिर्फ एक शख्स ऑपरेट कर सकता है.

विशेषज्ञ मानते हैं सैन्य साजो-सामान और तकनीक के मामले में भारत की ताकत लगातार बढ़ रही है. चीन के पास एस-400 डिफेंस मिसाइल सिस्टम है. भारत भी रूस से इसी तरह का सिस्टम खरीद रहा है. हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल से लेकर लड़ाकू विमान और जमीनी ताकत के मामले में भारत ने काफी प्रगति की है.

रिटायर्ड मेजर जनरल अशोक मेहता ने एक हिंदी अखबार से कहा, हम चीन को वैसे ही रोक सकते हैं जैसे वर्ष 1986 में तवांग जिले के सोमदोरुंग चू में रोका था. हम हटे नहीं, डटे रहे. अंतत: करीब डेढ़ साल बाद मामला बातचीत से सुलझा. उन्होंने कहा, युद्ध से दोनों देशों को नुकसान होगा इसलिए हमें अपनी तरफ से न तो युद्ध के बारे में सोचना चाहिए और न ही नाथुला में सीमा पर 1967 जैसी झड़प ही होनी चाहिए.

सामरिक मामलों के जानकार दोनो देशों की ताकत को देखते हुए स्थिति को गंभीर मानते हैं. विशेषज्ञों का कहना है अगर बातचीत के जरिये तुरंत स्थिति नही संभाली गई, तो स्थिति गंभीर हो सकती है. सामरिक मामलों के जानकार सुशांत सरीन का कहना है कि बयानबाजी से माहौल काफी खराब हुआ है. सरीन ने कहा, दोनों देशों की सेनाएं प्रशिक्षित और पेशेवर हैं. ऐसे में किसी भी पक्ष से चूक हुई तो हालात ज्यादा बिगड़ सकते हैं.

इस मामले में दोनों देशों की नजर जी-20 के दौरान चीन के राष्ट्रपति जिनपिंग और भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मुलाकात पर टिकी है. माना जा रहा है कि दोनों देश इस मौके का इस्तेमाल तनाव कम करने के लिए कर सकते हैं. सरीन ने कहा लगभग 50 साल पहले इसी इलाके में संघर्ष हुआ था लेकिन उस वक्त और अब के हालात में बहुत फर्क है. इस बार उनका कहना है कि हम ऐसे इलाके में हैं जहां भूटान के मामले में भारत दखल दे रहा है.