India-China Border Conflict: LAC पर चीन के साथ जारी तनाव के बीच किसी भी स्थिति में पड़ोसी देश को करारा जवाब देने के लिए भारतीय सेना भी पूरी तैयारी में जुटी है. तभी तो सेना ने LAC पर एक ऐसी मिसाइल तैनात कर दी है जिसको अभी विधिवत रूप से सेना को सौंपा जाना है. Also Read - जम्मू कश्मीर: भारतीय सेना ने चीन में बने पाकिस्तान आर्मी के क्वाडकॉप्टर को मार गिराया

रक्षा विकास संगठन डीआरडीओ द्वारा विकसित यह सबसोनिक क्रूज मिसाइल 1000 किलोमीटर तक सटीक निशाना साधने में सक्षम है. इस मिसाइल का नाम निर्भय (Nirbhay missiles) रखा गया है. अगले माह इस मिसाइल का सातवां परीक्षण किया जाएगा, उसके बाद इसे सेना और नौसेना में औपचारिक रूप से शामिल किया जाएगा. लेकिन इस बीच सेना ने चीन के साथ तनाव की स्थिति को देखते हुए ठीक ठाक संख्य में इस मिसाइल को LAC पर तैनात कर दिया है. Also Read - चीन की नई चालबाजी, बातचीत के बहाने LAC के पास बना रहा नए सैन्य ढांचे

इस बारे में हिंदुस्तान टाइम्स ने डीआरडीओ के अधिकारियों के हवाले से खबर छापी है. 1000 किलोमीटर तक मार करने वाली निर्भय मिसाइल में सॉलिड रॉकेट बूस्टर लगा हुआ है. इसने अब तक 90 फीसदी से अधिक सटीक वार किए हैं. यह मिसाइल 0.7 मैक की रफ्तार से वार करती है. इसे सतह और पानी दोनों जगहों के दागा जा सकता है. यह पानी की सतह पर तैर भी सकती है. Also Read - LAC पर तनातनी के बीच भारतीय सेना ने चीन को उसका सैनिक लौटाया, लद्दाख बॉर्डर के पास पकड़ा गया था

अखबार का दावा है कि कल यानी बुधवार को भारत ने ओडिशा में बालासोर स्थित एकीकृत प्रक्षेपण स्थल से ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल के एक नए संस्करण का सफल परीक्षण किया. इसी मौके पर डीआरडीओ के अधिकारियों ने निर्भय मिसाइल की LAC पर तैनाती की जानकारी दी. ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल की मारक क्षमता लगभग 400 किलोमीटर है. रक्षा मंत्रालय के एक बयान में कहा गया कि सतह से सतह पर मार करने वाली यह क्रूज मिसाइल स्वदेशी बूस्टर और ‘एअरफ्रेम’ के साथ भारत में निर्मित अन्य उप-प्रणालियों जैसी विशिष्टताओं से लैस है.

डीआरडीओ के अधिकारियों ने इस परीक्षण को ‘‘सफल’’ करार देते हुए कहा कि मिसाइल के प्रक्षेपण के दौरान सभी मानक प्राप्त कर लिए गए. ‘ब्रह्मोस लैंड अटैक क्रूज मिसाइल’ (एलएसीएम) 2.8 मैक की शीर्ष गति से रवाना हुई, जो ध्वनि की गति से लगभग तीन गुना अधिक है. अधिकारियों ने बताया कि मिसाइल के जमीन से हमला करने वाले नए संस्करण की मारक क्षमता इसकी वास्तविक मारक क्षमता 290 किलोमीटर से बढ़ाकर 400 किलोमीटर तक की गई है.

भारत, लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश में चीन से लगी तथाकथित सीमा पर कई रणनीतिक स्थलों पर पहले ही काफी संख्या में ब्रह्मोस मिसाइलों की तैनाती कर चुका है. डीआरडीओ और रूस के प्रमुख एरोस्पेस उपक्रम एनपीओएम द्वारा संयुक्त रूप से विकसित ब्राह्मोस मिसाइल मध्यम रेंज की ‘रेमजेट सुपरसोनिक क्रूज’ मिसाइल है, जिसे पनडुब्बियों, युद्धपोतों, लड़ाकू विमानों तथा जमीन से दागा जा सकता है. सूत्रों ने बताया कि यह मिसाइल पहले से ही भारतीय थलसेना, नौसेना और वायुसेना के पास है.

इसे दुनिया की सबसे तेज सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल माना जाता है. पिछले साल मई में भारतीय वायुसेना ने सुखोई-30 एमकेआई लड़ाकू विमान से ब्रह्मोस मिसाइल के हवाई संस्करण का सफल परीक्षण किया था.