नई दिल्ली: अमेरिका ने भारत, चीन सहित सभी देशों से ईरान से कच्चे तेल का आयात चार नवंबर तक बंद करने को कहा था. चार नवंबर के बाद भी वहां से तेल मंगाने वाले वाले देशों के खिलाफ उसने आर्थिक प्रतिबंध लगाने की धमकी दी थी और कहा था कि इस मामले में रत्ती भर भी ढ़ील नहीं बरती जाएगी. भारत में इराक और सऊदी अरब के बाद सबसे ज्यादा कच्चा तेल ईरान से मंगाया जाता है. 2017-18 के पहले दस महीनों (अप्रैल-जनवरी) में ईरान से1.84 टन तेल आया था. Also Read - FDI News: 2020 में भारत में एफडीआई 13 फीसदी बढ़ा, ब्रिटेन और अमेरिका में तेजी से घटा: संयुक्त राष्ट्र

इस बीच भारत ने ईरान से कच्चे तेल का आयात घटाने का संकेत दिया है. बदले में वह सऊदी अरब और कुवैत से कच्चे तेल की खरीद बढ़ाएगा. सरकार और उद्योग के अधिकारियों ने गुरुवार को कहा कि अमेरिका द्वारा ईरान पर नए सिरे से प्रतिबंध लगाए जाने के मद्देनजर भारत वहां से कच्चे तेल की खरीद घटाने पर विचार कर रहा है. Also Read - India-China Standoff: सिक्किम के नाकू ला में झड़प को भारतीय सेना ने बताया ‘मामूली तनातनी’, चीन बोला- व्यावहारिक कदम उठाए भारत

अमेरिका ने 4 नवंबर तक का दिया है समय
उल्लेखनीय है कि अमेरिका ने भारत , चीन सहित दुनिया के सभी देशों से चार नवंबर तक ईरान से कच्चे तेल की खरीद पूरी तरह बंद करने को कहा है. हालांकि , अभी इस पर कोई अंतिम विचार नहीं बनाया गया है , लेकिन पेट्रोलियम मंत्रालय ने रिफाइनरी कंपनियों से सतर्कता बरतने और अन्य विकल्पों पर विचार करने को कहा है. अधिकारियों ने कहा कि अमेरिका चाहता है कि ईरान से कच्चे तेल के आयात को ‘ शून्य ’ पर लाया जाए , लेकिन यह व्यावहारिक नहीं है. मंत्रालय ने आज रिफाइनरी कंपनियों के साथ इस मुद्दे पर बैठक की. अगले सप्ताह इस मामले पर विदेश मंत्रालय के साथ बैठक होगी. Also Read - Weather Today: उत्तर और मध्य भारत के कुछ हिस्सों में पड़ने वाली है कड़ाके की सर्दी, जानिए कब मिलेगी राहत?

एक हफ्ते में साफ होगी स्थिति
एक अधिकारी ने कहा कि इस बारे में चीजें एक सप्ताह में साफ हो सकेंगी. इराक और सऊदी अरब के बाद ईरान भारत को तीसरा सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता है. एक अन्य अधिकारी ने कहा कि ईरान को बदलना मुश्किल नहीं है लेकिन इससे मार्जिन प्रभावित होगा क्योंकि उसकी वाणिज्यिक शर्तें सबसे अच्छी हैं. अधिकारी ने कहा कि पश्चिम एशिया विशेषकर सऊदी अरब और कुवैत से उच्च सल्फर वाला कच्चा तेल आसानी से ईरानी तेल की जगह ले सकता है. अधिकारी ने कहा कि लातिनी अमेरिका और अमेरिका कुछ अन्य विकल्प हैं.

अमेरिका ने दिया था 180 दिन का समय
पिछले महीने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान परमाणु समझौते से हटने की घोषणा की थी. साथ ही अमेरिकी प्रतिबंधों को फिर से लगाने का ऐलान किया था जो समझौता होने के बाद हटा लिए गए थे. उस समय ट्रंप प्रशासन ने विदेशी कंपनियों को उनकी वाणिज्यिक गतिविधियों के हिसाब से ईरानी कंपनियों के साथ कारोबार बंद करने के लिए 90 से 180 दिन का समय दिया था. अब अमेरिका भारत और चीन सहित सभी देशों पर ईरान से कच्चे तेल की खरीद पूरी तरह बंद करने के लिए दबाव बना रहा है.