नई दिल्ली: विश्व आर्थिक मंच के स्त्री-पुरुष असमानता सूचकांक में भारत 108वें स्थान पर रहा है. देश पिछले साल भी इसी पायदान पर था. हालांकि, देश में एक ही कार्य के लिए मेहनताने की समानता में सुधार हुआ है तथा पहली बार तृतीयक शिक्षा में स्त्री-पुरुष असमानता की खाई पाटने में सफलता मिली है. विश्व आर्थिक मंच ने मंगलवार को वैश्विक स्त्री-पुरुष असमानता रिपोर्ट 2018 जारी की. सबसे चिंताजनक बात ये कि भारत स्वास्थ्य एवं उत्तरजीविता उप-सूचकांक में तीसरा सबसे निचला देश बना हुआ है.

आर्थिक अवसर एवं भागीदारी उप-सूचकांक में देश को 149 देशों में 142वां स्थान मिला है. विश्व आर्थक मंच स्त्री-पुरुष असमानता को चार मुख्य कारकों आर्थिक अवसर, राजनीतिक सशक्तिकरण, शैक्षणिक उपलब्धियां तथा स्वास्थ्य एवं उत्तरजीविता के आधार पर तय करता है.

मंच ने कहा कि भारत को महिलाओं की भागीदारी से लेकर वरिष्ठ एवं पेशेवर पदों पर अधिक महिलाओं को अवसर देने तक में सुधार की जरूरत है. मंच ने यह भी कहा कि भारत स्वास्थ्य एवं उत्तरजीविता उप-सूचकांक में तीसरा सबसे निचला देश बना हुआ है.

हालांकि इनके अलावा कुछ चीजें सकारात्मक भी हुई हैं. समान कार्य के लिए मेहनताने के स्तर पर भारत ने स्थिति में कुछ सुधार किया है और 72वें स्थान पर रहा है.