अंतरराष्ट्रीय शांति में भारत की भूमिका! अमेरिका ने भेजा गाजा बोर्ड में शामिल होने का न्योता, दुश्मन देश को भी आया बुलावा

अमेरिका ने भारत को गाजा के लिए बनाए जाने वाले नए 'Board of Peace' में शामिल होने का निमंत्रण भेजा है. यह बोर्ड ट्रंप प्रशासन की उस योजना का हिस्सा है, जो इजरायल-हमास संघर्ष को समाप्त करने और गाजा में स्थिरता लाने पर केंद्रित है.

Published date india.com Updated: January 18, 2026 11:57 PM IST
अंतरराष्ट्रीय शांति में भारत की भूमिका! अमेरिका ने भेजा गाजा बोर्ड में शामिल होने का न्योता, दुश्मन देश को भी आया बुलावा

अमेरिका ने भारत को गाजा के लिए बनाए जाने वाले नए Board of Peace में शामिल होने का निमंत्रण दिया है. यह पहल अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की दूसरी चरण की योजना का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य इजरायल और हमास के बीच जारी संघर्ष को समाप्त करना और गाजा में स्थिरता और पुनर्निर्माण लाना है. अमेरिकी दूत सेर्जियो गोर ने भारत को यह निमंत्रण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजने की पुष्टि की है.

बोर्ड का कामगिरी क्षेत्र गाजा के दिन-प्रतिदिन के प्रशासन और तकनीकी समिति के माध्यम से युद्ध प्रभावित क्षेत्रों में स्थिरता लाना है. बोर्ड का मांडेट गाजा में एक नई फिलिस्तीनी समिति के गठन, हमास का निरस्त्रीकरण, अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा बल की तैनाती और बुरी तरह प्रभावित क्षेत्रों के पुनर्निर्माण का निरीक्षण करना है. बोर्ड का गठन संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद द्वारा समर्थित 20-पॉइंट शांति योजना के अनुरूप किया जा रहा है.

इन देशों को भी मिला न्योता

भारत के अलावा जॉर्डन, ग्रीस, साइप्रस और पाकिस्तान समेत कई अन्य देशों को भी निमंत्रण मिला है. स्थायी सदस्यता के लिए 1 बिलियन अमेरिकी डॉलर का योगदान अनिवार्य है, जबकि तीन साल की अवधि के लिए नियुक्ति बिना वित्तीय योगदान के भी हो सकती है. यह पहल गाजा के पुनर्निर्माण और स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए आर्थिक और प्रशासनिक सहयोग जुटाने पर केंद्रित है.

बोर्ड के कार्यकारी पैनल में अमेरिकी विदेश सचिव मार्को रुबियो, ट्रंप के मध्य-पूर्व दूत स्टीव विटकोफ, जारेड कुश्नर, पूर्व ब्रिटिश प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर, वर्ल्ड बैंक अध्यक्ष अजय बंगा और इजराइली अरबपति याकिर गैबाय शामिल हैं. कतर, मिस्र और तुर्की के प्रतिनिधि भी शामिल हैं, जो संघर्षविराम की निगरानी कर रहे हैं.

इजरायल ने जताया विरोध

हालांकि, इस पहल को लेकर विभिन्न देशों में मिश्रित प्रतिक्रियाएं आई हैं. इजरायल ने बोर्ड पर सार्वजनिक विरोध जताया है, वहीं यूरोपीय देशों ने इसकी संभावित प्रभावशीलता और संयुक्त राष्ट्र की भूमिका पर चिंता जताई है. यह बोर्ड प्रारंभिक रूप से केवल गाजा पर केंद्रित रहेगा, लेकिन बाद में वैश्विक स्तर पर अपनी पहुँच बढ़ा सकता है.

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत के शामिल होने से वैश्विक राजनीति में उसकी भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण होगी. साथ ही, यह पहल यह संदेश देती है कि गाजा और मध्य-पूर्व में शांति स्थापित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता है. ट्रंप का यह शांति बोर्ड गाजा में स्थिरता और पुनर्निर्माण के प्रयासों में एक नया दिशा-निर्देश बन सकता है.

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