India rejects China’s objection On Vice President Venkaiah Naidu’s visit to Arunachal Pradesh, नई दिल्ली/बीजिंग: भारत (India) ने उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू (Vice President M Venkaiah Naidu) के हाल के अरुणाचल प्रदेश के दौरे (Vice President Venkaiah Naidu’s visit to Arunachal Pradesh) पर चीन ( China) की आपत्ति को बुधवार को सिरे से खारिज (India rejects China’s objection ) किया और कहा कि अरुणाचल प्रदेश भारत का अटूट और अभिन्न हिस्सा है. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा कि भारतीय नेताओं द्वारा भारत के किसी राज्य की यात्रा पर आपत्ति करने का कोई कारण नहीं है. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू के सप्ताहांत में अरुणाचल प्रदेश दौरे पर चीन के विदेश मंत्रालय की आपत्ति के बारे में पूछे गए सवाल के जवाब में यह बात कही.Also Read - Konkan Shakti 2021: भारत और ब्रिटेन की सेनाओं का अरब सागर में जबरदस्त युद्धाभ्यास, देखकर दंग रह जाएंगे आप

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता बागची ने कहा, ”हमने चीन के आधिकारिक प्रवक्ता की टिप्पणी को आज देखा है. हम ऐसे बयानों को खारिज करते हैं. अरुणाचल प्रदेश भारत का अटूट और अभिन्न हिस्सा है.” Also Read - पाकिस्तान के खिलाफ प्लेइंग इलेवन चुनने में टीम इंडिया से हुई दो बड़ी गलतियां; पूर्व ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेटर ने कही ये बात

बागची ने कहा, भारतीय नेता नियमित रूप से अरुणाचल प्रदेश का दौरा करते हैं जिस प्रकार वे भारत के अन्य राज्यों में जाते हैं. भारत के एक राज्य की भारतीय नेताओं द्वारा यात्रा पर आपत्ति करने का कोई कारण भारतीयों को समझ नहीं आ रहा. Also Read - भारत से विदा हुआ दक्षिण-पश्चिमी मॉनसून, 1975 के बाद 7वीं बार सबसे देर से हुई रवानगी

चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लिजियान ने बीजिंग में एक मीडिया ब्रीफिंग में उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू के अरुणाचल प्रदेश के हालिया दौरे पर पूछे गए एक सवाल पर कहा कि चीन ने कभी राज्य को मान्यता नहीं दी है. झाओ लिजियान ने कहा, ”सीमा मुद्दे पर चीन की स्थिति अडिग और स्पष्ट है. चीन सरकार ने कभी भी भारतीय पक्ष द्वारा एकतरफा और अवैध रूप से स्थापित तथाकथित अरुणाचल प्रदेश को मान्यता नहीं दी है एवं वह भारतीय नेता के संबंधित क्षेत्र के दौरे का कड़ा विरोध करता है.”

लिजान ने कहा, “हम भारतीय पक्ष से चीन की प्रमुख चिंताओं का ईमानदारी से सम्मान करने और ऐसी किसी कार्रवाई से बचने का आग्रह करते हैं, जिससे सीमा मुद्दा और जटिल तथा विस्तारित हो एवं जो आपसी विश्वास और द्विपक्षीय संबंधों को कमतर करे.” उन्होंने कहा, “इसके बजाय इसे चीन-भारत सीमा क्षेत्र में शांति एवं स्थिरता बनाए रखने के लिए वास्तविक ठोस कार्रवाई करनी चाहिए तथा द्विपक्षीय संबंधों को वापस पटरी पर लाने में मदद करनी चाहिए.”

बता दें कि चीन भारतीय नेताओं के अरुणाचल प्रदेश दौरे पर आपत्ति व्यक्त करता है. चीन अरुणाचल प्रदेश को दक्षिण तिब्बत का हिस्सा बताता है.

दोनों पक्षों की ओर से यह टिप्पणी पूर्वी लद्दाख में 17 महीने से भारत और चीन के बीच जारी गतिरोध को दूर करने के लिए भारत और चीन के बीच 13वें दौर की सैन्य वार्ता के तीन दिन बाद आई है. बागची ने कहा, ”जैसा कि हमने पहले कहा है कि भारत चीन सीमा पर पश्चिमी सेक्टर में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर वर्तमान स्थिति चीन द्वारा द्विपक्षीय समझौतों का उल्लंघन करते हुए एकतरफा ढंग से यथास्थिति बदलने के प्रयास करने के कारण उत्पन्न हुई है.”

गौरतलब है कि सरकार पूर्वी लद्दाख को अक्सर पश्चिमी सेक्टर कह कर संबोधित करती है. बागची ने कहा, इसलिये हम चीनी पक्ष से उम्मीद करते हैं कि वह असंबद्ध मुद्दों को जोड़ने की बजाए द्विपक्षीय समझौतों एवं प्रोटोकाल का पूरी तरह से पालन करते हुए वास्तविक नियंत्रण रेखा पर शेष मुद्दों के जल्द समाधान के लिए काम करेगा.
बता दें कि 13वें दौर की सैन्य स्तर की वार्ता के बाद भारतीय सेना ने कहा कि उसके रचनात्मक सुझावों पर न तो चीनी पक्ष सहमत हुई और न ही वह कोई प्रगतिशील सुझाव दे पाई. वहीं, चीन सेना के पश्चिमी थियेटर कमान ने कहा कि भारत अव्यावहारिक और अवास्तविक मांग पर जोर दे रहा है.

(इनपुट भाषा)