नई दिल्ली: भारत ने अमेरिकी विदेश विभाग की ओर से जारी उस रिपोर्ट को पूरी तरह से खारिज कर दिया है, जिसमें अल्पसंख्यकों को निशाना बनाए जाने की बात कही गई थी. भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि किसी भी विदेशी संस्था या सरकार को संविधान प्रदत्त अधिकारों से संरक्षित हमारे नागरिकों को लेकर कोई घोषणा करने का अधिकार नहीं है. अमेरिकी विदेश विभाग द्वारा प्रकाशित नवीनतम ‘रिपोर्ट ऑन इंटरनेशनल रिलीजियस फ्रीडम’ को लेकर एक सवाल का जवाब देते हुए विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने जोर देकर कहा कि भारत एक जीवंत लोकतंत्र है, जहां अल्पसंख्यकों समेत इसके सभी नागरिकों के मौलिक अधिकार संविधान के अंतर्गत सुरक्षित हैं.

खास बात ये है कि यह रिपोर्ट 25 जून से शुरू हो रही अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पोम्पियो की आगामी भारत यात्रा से ठीक पहले प्रकाशित की गई है. भारत ने रविवार को अमेरिकी विदेश विभाग की एक रिपोर्ट खारिज कर दी, जिसमें यहां अल्पसंख्यकों की स्थिति के बारे में कुछ आलोचनात्मक टिप्पणियां की गई हैं.

इस रिपोर्ट पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने कहा कि भारत को विदेशी रिपोर्ट में कोई सच्चाई नहीं दिखती है. ”भारत को अपनी धर्मनिरपेक्षता पर गर्व है. भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक और बहुलतावादी समाज वाला देश है जो लंबे समय से सहिष्णुता और समावेश के लिए प्रतिबद्ध है. भारत का संविधान सभी नागरिकों को उनके मूलभूत अधिकारों की गारंटी देता है, जिसमें अल्पसंख्यक भी शामिल हैं.

रवीश कुमार ने कहा कि यह पूरी तरह से सर्वविदित है कि भारत एक ऐसा लोकतांत्रिक देश है, जिसका संविधान सभी को धार्मिक स्वतंत्रता का संरक्षण देता है और लोकतांत्रिक सरकार धार्मिक गतिविधियों को संरक्षण और बढ़ावा देती है.

कुमार ने कहा, ”हम किसी भी विदेशी संस्था या सरकार को यह अधिकार नहीं देते हैं कि संवैधानिक रूप से मिले अधिकारों से संरक्षित हमारे नागरिकों को लेकर कोई घोषणा करे.”

अमेरिकी विदेश विभाग की ओर से ‘इंटरनेशनल रिलीजियस फ्रीडम’ पर एक रिपोर्ट जारी की गई है. इस रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि भारत में अल्पसंख्यकों को निशाना बनाया जा रहा है .

इससे पहले शनिवार को बीजेपी ने अमेरिका के विदेश विभाग द्वारा जारी अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता रिपोर्ट को नरेन्द्र मोदी सरकार और भाजपा के प्रति पूर्वाग्रह से प्रेरित’ एवं झूठा’ करार दिया और कहा कि भारत की लोकतांत्रिक संस्थाओं की जड़ें बहुत गहरी हैं. भाजपा के मीडिया प्रकोष्ठ के प्रमुख अनिल बलूनी ने एक बयान में कहा था, 2018 की अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता रिपोर्ट मोदी सरकार और भाजपा के प्रति पूर्वाग्रह से प्रेरित है. इस रिपोर्ट की मूल अवधारणा है कि यहां अल्पसंख्यकों के साथ हिंसा के पीछे कोई षड़यंत्र है, सरासर झूठ है.’