Ballistic Missile Submarine:भारतीय नौसेना की ताकत में बड़ा इजाफा होने वाला है. भारत ने अपनी चौथी बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बी S4*का समुद्री परीक्षण शुरू कर दिया है. यह पनडुब्बी पिछले हफ्ते अपने निर्माण केंद्र विशाखापत्तनम बंदरगाह स्थित शिपबिल्डिंग सेंटर (एसबीसी) से समुद्री परीक्षण के लिए रवाना हुई है. आइये जानते हैं एस-4* की खासियतों के बारे में.
यह पनडुब्बी 80 फीसदी स्वदेशी है. इसके 2027 तक सेवा में शामिल होने की संभावना है. यानी अब अगले एक साल तक सिर्फ इसका ट्रायल चलेगा.
वजन और क्षमता
एस-4* सात हजार टन वजनी पनडुब्बी है. एस-4* में 3500 किलोमीटर से अधिक की मारक क्षमता वाली मिसाइलें तैनात होंगी.
भारत के पास अब चार एसएसबीएन
भारत के पास अब चार एसएसबीएन हैं. दो नौसेना की सेवा में हैं और दो परीक्षण के अधीन हैं. तीसरा एसएसबीएन, आईएनएस अरिधमन 2026 के अंत में कमीशन होने के लिए तैयार है और इसके एक साल बाद एस-4* भी सेवा में आ जाएगा.
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क्या होगा भारतीय नौसेना को फायदा
भारतीय नौसेना इन चार पनडुब्बी के दम पर लगातार समुद्र में रहकर दुश्मन को रोकने की क्षमता विकसित कर लेगी. वरिष्ठ नौसेना अधिकारियों ने संकेत दिया है कि चौथी अरिहंत-क्लास परमाणु-संचालित बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बी (SSBN), यानी ‘S4 स्टार’ (S4*) के शामिल होने से भारत हर समय कम से कम एक परमाणु-हथियारों से लैस पनडुब्बी को गश्त पर रख पाएगा.
इस डेवलपमेंट को भारत के न्यूक्लियर ट्रायड को मजबूत करने में एक अहम कदम माना जा रहा है. चौबीसों घंटे पानी के अंदर मौजूदगी सुनिश्चित करके, नई दिल्ली का लक्ष्य दूसरी बार हमला करने की क्षमता की गारंटी देना है – यानी पहले हमले को झेलने के बाद भी जवाबी परमाणु हमला करने की क्षमता. यह स्थिति भारत के “पहले इस्तेमाल नहीं” करने के परमाणु सिद्धांत की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए जरी है.
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