नई दिल्ली: भारत कोरोना वायरस के खिलाफ जंग लड़ रहे अपने पड़ोसी देशों की भी मदद कर रहा है. दरअसल भारत कोरोना वायरस से प्रभावित 55 देशों को अनुदान के साथ-साथ वाणिज्यिक आधार पर मलेरिया-रोधी दवा हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन की आपूर्ति करने की प्रक्रिया में भी है. इसी क्रम में भारत ने अपने पड़ोसी देश अफगानिस्तान की मदद की है. खुद अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी ने इस बात की जानकारी दी. सोमवार को उन्होंने ट्वीट कर इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारत का शुक्रिया अदा किया.Also Read - फिर शुरू हुआ पाबंदियों का दौर! ओमिक्रोन और डेल्टा वेरिएंट के खतरों को देखते हुए जानें कहां-कहां हुई सख्ती

उन्होंने ट्वीट कर लिखा- मेरे मित्र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी आपका धन्यवाद और हम 500K (5 लाख) हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन टैबलेट, 100K (एक लाख) पेरासिटामोल की टैबलेट और 75,000 मीट्रिक टन गेहूँ उपलब्ध कराने के लिए भारत को धन्यवाद करते हैं. गेंहूं की पहली खेप (5,000 मीट्रिक टन) एक दिन में अफगान के लोगों के लिए अफगानिस्तान पहुँच जाएगी.” Also Read - India's Policy on Taiwan: ताइवान को लेकर क्या है भारत का रुख? संसद में केंद्रीय मंत्री ने दिया जवाब

अशरफ घनी ने अपने दूसरे ट्वीट में लिखा- भारत में उपलब्धता बढ़ने पर दवाओं और उपकरणों सहित अन्य वस्तुओं की आपूर्ति करने के लिए आगे की प्रतिबद्धताओं के लिए भी आपका धन्यवाद. Covid19 के कठिन समय में, सहयोगियों और दोस्तों के बीच घनिष्ठ सहयोग हमें इस खतरे से लड़ने और हमारे लोगों को बचाने के लिए बेहतर तैयार करेगा.” Also Read - जम्मू कश्मीर पर टिप्पणियों के लिए भारत ने ‘OHCHR’ पर साधा निशाना, कहा- सीमा पार आतंकवाद के कारण...

पीएम मोदी ने भी अशरफ घनी के ट्वीट का रिप्लाई करते हुए लिखा- भारत और अफगानिस्तान इतिहास, भूगोल और संस्कृति के संबंधों के आधार पर एक विशेष मित्रता साझा करते हैं. लंबे समय से, हमने आतंकवाद के संकट के खिलाफ संयुक्त रूप से लड़ाई लड़ी है. हम इसी तरह एकजुटता और साझा संकल्प के साथ COVID -19 का मुकाबला करेंगे.”

बता दें कि अमेरिका, मॉरीशस और सेशेल्स सहित कई देशों को इस दवा की खेप पहले ही मिल चुकी है. अमेरिकी खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने कोविड-19 के संभावित उपचार के रूप में हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन की पहचान की है और न्यूयॉर्क में 1500 से अधिक कोरोना वायरस रोगियों पर इसका परीक्षण किया जा रहा है.

भारत द्वारा निर्यात प्रतिबंध हटाने का फैसला करने के बाद पिछले कुछ दिनों में इस दवा की मांग तेजी से बढ़ी है. भारत अपने पड़ोस में अफगानिस्तान, भूटान, बांग्लादेश नेपाल, मालदीव, मॉरीशस, श्रीलंका और म्यामां को यह दवा भेज रहा है.

भारत जाम्बिया, डोमिनिकन गणराज्य, मडागास्कर, युगांडा, बुर्किना फ़ासो, नाइजर, माली, कांगो, मिस्र, आर्मेनिया, कज़ाकिस्तान, इक्वाडोर, जमैका, सीरिया, यूक्रेन, चाड, ज़िम्बाब्वे, फ्रांस, जॉर्डन, केन्या, केन्या, नाइजीरिया, नाइजीरिया को भी हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन की आपूर्ति कर रहा है. कई देशों को दवा व्यावसायिक आधार पर भेजी जा रही है जबकि कई अन्य देशों को भारत अनुदान के रूप में यह दवा दे रहा है.