'पहले अपने गिरेबान में झांके पाकिस्तान...', युद्ध की धमकी पर भारत ने ख्वाजा आसिफ को लताड़ा
भारत ने पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ के युद्ध वाले बयान को खारिज करते हुए इसे ध्यान भटकाने की कोशिश बताया. इसे लेकर भारत ने पाक को लताड़ भी लगाई और धमकी को गीदड़भभकी बताया है.
India-Pakistan Relations: भारत और पाकिस्तान के बीच एक बार फिर बयानबाजी तेज हो गई है. पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ की तरफ से दिए गए युद्ध संबंधी बयान पर भारत ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि इस तरह की टिप्पणियां पाकिस्तान की आंतरिक नाकामियों और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में जारी दमन से दुनिया का ध्यान हटाने का प्रयास हैं.
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मंगलवार (23 जून) को मीडिया से बातचीत में कहा कि भारत ने पाकिस्तान के रक्षा मंत्री के बयान से जुड़ी खबरें देखी हैं. उन्होंने साफ किया कि भारत ऐसे आरोपों और दावों को पूरी तरह निराधार मानता है और उन्हें सिरे से खारिज करता है.
PoK पर भी खोली पोल
भारत का कहना है कि PoK में जो हालात बने हुए हैं, उसके लिए पाकिस्तान की वर्षों पुरानी नीतियां जिम्मेदार हैं. नई दिल्ली के अनुसार, वहां के लोगों को लंबे समय से आर्थिक शोषण, बुनियादी अधिकारों की कमी और प्रशासनिक दबाव का सामना करना पड़ रहा है. इन परिस्थितियों के खिलाफ जब लोगों ने आवाज उठाई तो पाकिस्तान ने बल प्रयोग का रास्ता अपनाया.
विदेश मंत्रालय ने आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों को दबाने के लिए इंटरनेट सेवाओं पर रोक, आवश्यक वस्तुओं और दवाओं की आपूर्ति में बाधा तथा कठोर पुलिस कार्रवाई जैसे कदम उठाए गए. भारत का दावा है कि इन कार्रवाइयों के कारण कई लोगों की जान भी गई है और क्षेत्र में असंतोष लगातार बढ़ रहा है.
नई दिल्ली ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से भी अपील की कि वो PoK में हो रही घटनाओं पर ध्यान दे और पाकिस्तान को मानवाधिकार उल्लंघनों के लिए जवाबदेह ठहराए. भारत का मानना है कि लोकतांत्रिक अधिकारों की मांग कर रहे लोगों के खिलाफ बल प्रयोग किसी भी स्थिति में उचित नहीं ठहराया जा सकता.
पाक के इस बयान पर भड़का भारत?
ये विवाद उस समय और बढ़ गया जब ख्वाजा आसिफ ने हाल ही में कहा कि अगर पाकिस्तान को लगेगा कि उसकी राष्ट्रीय सुरक्षा या जल सुरक्षा खतरे में है तो वो भारत के खिलाफ सैन्य कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेगा. उनका बयान सिंधु जल प्रणाली को लेकर चल रही बहस के संदर्भ में आया था.
गौरतलब है कि पिछले साल जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने सिंधु जल संधि को लेकर अपना रुख सख्त कर लिया था. भारत लगातार यह कहता रहा है कि सीमा पार आतंकवाद को समर्थन देने वाली गतिविधियों पर ठोस कार्रवाई के बिना सामान्य स्थिति बहाल नहीं हो सकती.
फिलहाल दोनों देशों के बीच कूटनीतिक स्तर पर शब्दों की जंग जारी है, लेकिन दक्षिण एशिया की स्थिरता और शांति के लिए संवाद और जिम्मेदार बयानबाजी को ही सबसे बेहतर विकल्प माना जा रहा है.
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