भारत की जलनीति से घबराया पाकिस्तान! अब बगलिहार डैम से रोका गया चिनाब का पानी, PAK को कितना नुकसान?

India-Pakistan Conflict: पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान की ओर बहने वाली चिनाब नदी का पानी रोक दिया है. चलिए जानते हैं इससे पाक को कितना नुकसान होगा?

Published date india.com Published: May 4, 2025 9:20 PM IST
भारत की जलनीति से घबराया पाकिस्तान! अब बगलिहार डैम से रोका गया चिनाब का पानी, PAK को कितना नुकसान?

जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान पर कई बड़े फैसले लिए है. पड़ोसी देश को सबक सिखाने के लिए सरकार ने सिंधु जल संधि को अमल में लाना बंद कर दिया है. इस फैसले का पहला असर बगलिहार डैम पर देखने को मिला, जहां से भारत ने चिनाब नदी का पानी रोक दिया है. यह वही नदी है, जो पाकिस्तान की ओर बहती है. साथ ही वहां की खेती और जीवन का मुख्य स्रोत मानी जाती है. अब सरकार की योजना है कि झेलम नदी पर बने किशनगंगा बांध से भी ऐसा ही कदम उठाया जाए.

भारत इस चीज की मदद से कर पाक पर हमला

बगलिहार बांध जम्मू के रामबन में और किशनगंगा बांध कश्मीर के उत्तरी हिस्से में स्थित हैं. इन बांधों से न सिर्फ बिजली उत्पादन होता है, बल्कि ये भारत को नदियों के पानी को रोकने या छोड़ने की ताकत भी देते हैं. यही वजह है कि पाकिस्तान लंबे समय से इन बांधों को लेकर आपत्ति जताता रहा है. खासकर किशनगंगा प्रोजेक्ट को लेकर पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी शिकायतें की थीं. लेकिन भारत ने अब यह साफ कर दिया है कि देश की सुरक्षा और हितों से कोई समझौता नहीं होगा.

सिंधु जल संधि का अंत? भारत दिखा रहा है सख्ती

सिंधु जल संधि के तहत भारत अब तक पाकिस्तान को ज्यादा पानी देता रहा है, जबकि तकनीकी रूप से इस पर भारत का ही अधिकार था. लेकिन अब हालात बदल चुके हैं. पहलगाम में हुए आतंकी हमले ने देश को झकझोर कर रख दिया है, और सरकार ने साफ कर दिया है कि अब नर्मी नहीं बरती जाएगी. प्रधानमंत्री मोदी पहले ही कह चुके हैं कि हमले के गुनहगारों को बख्शा नहीं जाएगा, और अब यह कूटनीतिक स्ट्राइक भी उसी दिशा में एक कदम है.

जयशंकर ने यूरोपीय देशों को दिया ये संदेश

इस पूरे घटनाक्रम के बीच विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी वैश्विक मंच से भारत की स्थिति साफ की है. उन्होंने यूरोप और अमेरिका को सलाह दी कि वे भारत को उपदेश देने के बजाय समानता और पारस्परिक हितों के आधार पर साझेदारी करें. जयशंकर ने यह भी स्पष्ट किया कि भारत रूस और अमेरिका दोनों के यथार्थवादी दृष्टिकोण का समर्थन करता है. उनका कहना है कि भारत अब ऐसे भागीदारों की तलाश में है जो व्यवहारिक हों, न कि केवल सलाह देने वाले.

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