नई दिल्ली :  सोमवार को हुई विश्व स्वास्थ्य संगठन (World Healh Organization) की वार्षिक बैठक में कोरोना वायरस का मुद्दा काफी हावी रहा. इस बैठक में अधिकतम देशों ने कोरोना पर चीन की भूमिका पर सवाल उठाए. करीब 62 देशों ने कोरोना को प्रभाव और इसके बढ़ते प्रकोप के लिए चीन की भूमिका को सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया. ऐसे में अभी तक चुप्पी साधे बैठे भारत ने भी कोरोना महामारी को लेकर अपनी राय रखी है. अन्य देशों की ही तरह भारत की भी दुनियाभर में कोहराम मचा रहे कोरोना पर चीन की भूमिका पर चुप्पी टूटती दिखी.Also Read - Omicron Good News: घबराने की जरूरत नहीं, डेल्टा से ज्यादा गंभीर नहीं Omicron, 'सभी वैक्सीन काम करेंगी'

बता दें केंद्रीय परिवहन और सड़क निर्माण मंत्री नितिन गडकरी ने सबसे पहले कोरोना वायरस को लेकर सवाल उठाए थे और इसे प्राकृतिक आपदा मानने से इनकार किया था. उनके मुताबिक, यह एक ऐसी महामारी है, जिसे लैब में तैयार किया गया है. हालांकि, अभी तक भारत सरकार ने इस पर चुप्पी साध रखी थी, लेकिन बीते सोमवार को WHO की वार्षिक बैठक में भारत ने भी उस जांच का समर्थन किया है, जिसमें इस बात पर जांच की जानी है कि कोरोना वायरस आखिर जानवरों से इंसान में आया कैसे और समय पर विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इसकी जानकारी दुनिया को क्यों नहीं दी या WHO की इस महामारी को लेकर भूमिका कितनी निष्पक्ष रही. Also Read - अरब देशों में भारत का डंका, 15 साल में पहली बार ब्राजील को पछाड़कर बना नंबर 1 फूड सप्लायर

बता दें, इससे पहले अमेरिका, यूरोप, ऑस्ट्रेलिया जैसे कई देश कोरोना वायरस में विश्व स्वास्थ्य संगठन और चीन की भूमिका पर सवाल उठा चुके हैं. सबसे पहले भारत ने इस महामारी को लेकर चीन और WHO की भूमिका पर सवाल उठाए थे. ऐसे में यह पहली बार है जब भारत ने औपचारिक तौर पर इस तरह की जांच का समर्थन किया है. अमेरिका ने तो विश्व स्वास्थ्य संगठन को यहां तक चेतावनी दे दी है कि अगर 30 दिनों के भीतर अगर कोरोना वायरस के मामलों में सुधार नहीं होता तो वह फंडिंग रोक देगा. Also Read - Omicron India Update: भारत ने घाना और तंजानिया को 'खतरे वाले' देशों की सूची में किया शामिल, जाने ताजा अपडेट

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने WHO के डायरेक्टर जनरल टेड्रोस एडहानोम ग़ेब्रेयेसुस (Tedros Ghebreyesus) लिखे पत्र में कोरोना से उत्पन्न हालातों में 30 दिनों के अंदर बड़े बदलावों की डेडलाइन दी है. अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने WHO को चेतावनी दी है कि अगर 30 दिनों के अंदर जारी हालातों में कोई बड़े सुधार देखने को नहीं मिले तो वह विश्व स्वास्थ्य संगठन को दिए जाने वाले फंड को स्थाई रूप से बंद कर देंगे और अमेरिका WHO का सदस्य बने रहे पर भी पुनर्विचार करेगा.