Explainer: दान, हिसाब-किताब, बड़े घोटाले और बदले नियमों की पूरी कहानी... भारत के मंदिरों में करोड़ों का चढ़ावा कैसे होता है सुरक्षित?

Written By: Tanuja Joshi Updated by: Tanuja Joshi
Updated Date:July 9, 2026 10:40 PM IST

भारत के बड़े मंदिरों में हर साल हजारों करोड़ रुपये का चढ़ावा आता है. ये दान कैसे जमा होता है, उसका ऑडिट कौन करता है, पैसा किन कामों में खर्च होता है और चोरी या अनियमितताओं के बाद क्या बदलाव हुए जानिए पूरी जानकारी.

  • भारत के प्रमुख मंदिरों में हर साल करोड़ों रुपये नकद, सोना-चांदी और अन्य चढ़ावे के रूप में आते हैं.
  • बड़े मंदिरों में दान का हिसाब ट्रस्ट, बोर्ड और स्वतंत्र ऑडिट एजेंसियां मिलकर संभालती हैं.
  • मंदिरों का पैसा पूजा, रखरखाव, श्रद्धालु सुविधाओं और सामाजिक सेवाओं पर खर्च किया जाता है.
  • चोरी और अनियमितताओं के मामलों के बाद कई मंदिरों ने निगरानी और पारदर्शिता के नियम सख्त किए हैं.

India Temples Donations: भारत में मंदिर केवल आस्था के केंद्र नहीं हैं, बल्कि कई बड़े मंदिर आर्थिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण संस्थान हैं. देशभर के करोड़ों श्रद्धालु हर साल नकद, सोना, चांदी, आभूषण और अन्य मूल्यवान वस्तुएं मंदिरों में दान करते हैं. हालांकि, भारत में कुल मंदिरों की आधिकारिक संख्या उपलब्ध नहीं है, लेकिन देश के प्रमुख धार्मिक स्थलों में हर साल हजारों करोड़ रुपये का चढ़ावा आता है. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि ये धन कैसे एकत्र होता है, इसकी सुरक्षा कैसे की जाती है, इसका हिसाब कौन रखता है और आखिर इसका उपयोग किन कार्यों में होता है.

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किन मंदिरों में सबसे ज्यादा चढ़ावा आता है?

देश के सबसे समृद्ध मंदिरों में तिरुमला तिरुपति देवस्थानम (TTD) प्रमुख माना जाता है. यहां हुंडी के माध्यम से प्रतिदिन औसतन 4 से 5 करोड़ रुपये तक का दान प्राप्त होता है. वार्षिक चढ़ावा 1,700 करोड़ रुपये से अधिक तक पहुंच चुका है. अयोध्या के राम मंदिर ने भी स्थापना के बाद बेहद कम समय में रिकॉर्ड चढ़ावा प्राप्त किया. 31 मार्च 2026 तक मंदिर में लगभग 582 करोड़ रुपये की भेंट दर्ज की गई, जबकि मंदिर निर्माण के लिए समर्पण निधि और कॉर्पस दान मिलाकर 3,264 करोड़ रुपये से अधिक राशि जुटाई गई.

मुंबई का सिद्धिविनायक मंदिर वित्त वर्ष 2024-25 में लगभग 133 करोड़ रुपये की आय दर्ज कर चुका है. वहीं, बद्रीनाथ और केदारनाथ मंदिर समिति के अंतर्गत आने वाले मंदिरों को हर साल लगभग 80 से 85 करोड़ रुपये का चढ़ावा प्राप्त होता है. वैष्णो देवी और सबरीमाला जैसे मंदिरों में भी श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या के कारण दान लगातार बढ़ता रहता है.

दान कैसे जमा किया जाता है?

ज्यादातर बड़े मंदिर पारंपरिक और डिजिटल दोनों माध्यमों से दान स्वीकार करते हैं. मंदिर परिसर में स्थापित हुंडी या दान पेटियां सबसे पुराना तरीका हैं. इसके अलावा श्रद्धालु नकद, सोना, चांदी, आभूषण और अन्य कीमती वस्तुएं भी समर्पित करते हैं. अब कई मंदिरों ने ऑनलाइन भुगतान, यूपीआई, नेट बैंकिंग, मोबाइल ऐप और आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से ई-डोनेशन की सुविधा भी शुरू कर दी है. विशेष पूजा, आरती, प्रसाद और धार्मिक योजनाओं के लिए भी अलग-अलग दान विकल्प उपलब्ध कराए जाते हैं.

दान का हिसाब-किताब कौन रखता है?

देश के ज्यादातर बड़े मंदिर ट्रस्ट, देवस्थानम बोर्ड या श्राइन बोर्ड के माध्यम से संचालित होते हैं. इन संस्थाओं में ट्रस्टी, प्रशासनिक अधिकारी और कई मामलों में राज्य सरकार द्वारा नियुक्त सदस्य भी शामिल होते हैं. दान पेटियों को निर्धारित समय पर सील खोलकर कैमरों और अधिकृत कर्मचारियों की मौजूदगी में गिना जाता है. नकद राशि बैंक खातों में जमा होती है जबकि सोना और अन्य बहुमूल्य वस्तुओं का अलग रिकॉर्ड तैयार किया जाता है. कई मंदिर स्वतंत्र ऑडिट एजेंसियों से वार्षिक जांच भी कराते हैं ताकि पारदर्शिता बनी रहे.

मंदिरों के दान का इस्तेमाल कहां होता है?

दान का सबसे बड़ा हिस्सा मंदिर के दैनिक संचालन, पूजा-पाठ, कर्मचारियों के वेतन, रखरखाव और भवनों के संरक्षण पर खर्च किया जाता है. इसके अलावा कई बड़े मंदिर मुफ्त भोजन (अन्नदान), अस्पताल, स्कूल, छात्रावास, धर्मशाला, तीर्थयात्री सुविधाएं, चिकित्सा केंद्र, पेयजल, स्वच्छता और आपदा राहत जैसी सामाजिक सेवाओं पर भी बड़ी राशि खर्च करते हैं. कई मंदिरों की आय का एक हिस्सा धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण में भी लगाया जाता है.

क्या चोरी और गड़बड़ी के मामले भी सामने आए हैं?

इतनी बड़ी धनराशि होने के कारण समय-समय पर कई मंदिर विवादों में भी रहे हैं. सबरीमाला मंदिर में सोने की कथित हेराफेरी का मामला देशभर में चर्चा का विषय बना. इस मामले में कई अधिकारियों की गिरफ्तारी हुई और जांच एजेंसियों ने विस्तृत जांच शुरू की.

वहीं, अयोध्या राम मंदिर में 2026 में चढ़ावे में कथित अनियमितताओं के आरोप सामने आने के बाद ट्रस्ट के कुछ वरिष्ठ पदाधिकारियों ने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अपने पद छोड़ दिए. इसके बाद सुरक्षा और लेखा व्यवस्था को और मजबूत करने पर जोर दिया गया.

स्री पद्मनाभस्वामी मंदिर में बहुमूल्य हीरों के गायब होने का मामला भी सालों से जांच के दायरे में है. वहीं, हैदराबाद और कर्नाटक के कुछ मंदिरों में भी नकदी और आभूषण चोरी के मामले सामने आए.

इन घटनाओं के बाद क्या बदलाव हुए?

हाल के वर्षों में कई मंदिरों ने दान प्रबंधन को अधिक सुरक्षित बनाने के लिए नई व्यवस्थाएं लागू की हैं. सीसीटीवी निगरानी, डिजिटल रिकॉर्ड, नियमित ऑडिट, बैंकिंग सिस्टम, बहुस्तरीय सुरक्षा और स्वतंत्र जांच जैसी व्यवस्थाओं को मजबूत किया गया है. कुछ मामलों में विशेष जांच दल (SIT) गठित किए गए, जबकि कुछ मामलों में कोर्ट की निगरानी में जांच जारी है. कई मंदिर समितियों ने कर्मचारियों की जवाबदेही बढ़ाने और दान की गिनती की प्रक्रिया को ज्यादा पारदर्शी बनाने के निर्देश जारी किए हैं.

आस्था और पारदर्शिता दोनों को साथ लेकर चलना आज मंदिर प्रशासन की सबसे बड़ी जिम्मेदारी बन चुका है. करोड़ों श्रद्धालुओं के विश्वास को बनाए रखने के लिए आधुनिक तकनीक, नियमित ऑडिट और सख्त प्रशासनिक व्यवस्था पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है.

भारत में कितने मंदिर हैं?

भारत में मंदिरों की कुल आधिकारिक संख्या उपलब्ध नहीं है. अलग-अलग राज्यों और धार्मिक संस्थाओं के पास अपने-अपने आंकड़े हैं, लेकिन कोई राष्ट्रीय प्रमाणित सूची मौजूद नहीं है.

सबसे ज्यादा चढ़ावा किस मंदिर में आता है?

तिरुमला तिरुपति देवस्थानम देश के सबसे ज्यादा दान प्राप्त करने वाले मंदिरों में शामिल है, जहां प्रतिदिन करोड़ों रुपये का चढ़ावा आता है.

मंदिरों का दान कौन संभालता है?

अधिकांश बड़े मंदिरों में ट्रस्ट, देवस्थानम बोर्ड या श्राइन बोर्ड दान का संग्रह, रिकॉर्ड, बैंकिंग और खर्च की निगरानी करते हैं.

मंदिरों का पैसा किन कामों में खर्च होता है?

दान का उपयोग पूजा, रखरखाव, श्रद्धालु सुविधाएं, अन्नदान, अस्पताल, शिक्षा, धर्मशाला और सामाजिक कल्याण परियोजनाओं में किया जाता है.

क्या मंदिरों में चोरी रोकने के लिए कोई व्यवस्था है?

बड़े मंदिरों में सीसीटीवी, डिजिटल रिकॉर्ड, बैंकिंग व्यवस्था, नियमित ऑडिट और कई स्तर की निगरानी जैसी व्यवस्थाएं अपनाई जाती हैं, हालांकि पूरे देश के लिए एक समान प्रणाली नहीं है.

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