समुद्र से आसमान तक बढ़ेगी भारत की ताकत, खुद बनाएगा युद्ध के सुपर सिस्टम! विदेशों पर निर्भरता खत्म

ये सभी प्रोजेक्ट ग्रोथ पोल की तरह काम करेंगे. इससे रोजगार के लाखों अवसर पैदा होंगे. यहां के शैक्षणिक संस्थान, इंजीनियरिंग कॉलेज और आईटीआई इससे जुड़ेंगे.

Written by: Farha Fatima
Updated: May 15, 2026, 2:42 PM IST

पांचवीं पीढ़ी के भारतीय लड़ाकू विमान ‘एमका’ लिए शुक्रवार को कोर इंटीग्रेशन और फ्लाइट टेस्टिंग सेंटर की नींव रखी गई. यह पहल आंध्र प्रदेश में हुई. यहां रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू की मौजूदगी में एक साथ कई बड़ी रक्षा परियोजनाओं की नींव रखी गई. एरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी यानी एडीए इस फिफ्थ जेनरेशन एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट ‘एमका’ को विकसित कर रहा है. इसके लिए ही कोर इंटीग्रेशन और फ्लाइट टेस्टिंग सेंटर की नींव रखी गई है. एडीए, डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गेनाइजेशन यानी डीआरडीओ का सहयोगी संगठन है. यह भारत के लिए स्वदेशी फाइटर एयरक्राफ्ट के अनुसंधान और विकास में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है.

एडीए फिफ्थ जेनरेशन फाईटर जेट पर कार्य

इस अवसर पर रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने कहा, “एडीए ने ही देश को एलसीए तेजस मार्क-1 दिया और अभी मार्क-2 पर काम चल रहा है. अब यही एडीए फिफ्थ जेनरेशन फाईटर जेट पर कार्य कर रहा है. यह एक पूर्ण विकसित फिफ्थ जेनरेशन स्टेल्थ फाइटर होगा, जो दुनिया के केवल कुछ ही देशों के पास है.” उन्होंने कहा कि आज आंध्र प्रदेश में जो दूसरा प्रोजेक्ट शुरू हो रहा है, वह भारत डायनेमिक्स लिमिटेड यानी बीडीएल का है. बीडीएल रक्षा मंत्रालय का एक महत्त्वपूर्ण सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम है और यह स्वदेशी भविष्यवादी अंडरवॉटर सिस्टम्स का केंद्र स्थापित करने जा रहा है. यह प्रोजेक्ट 480 करोड़ रुपए का है.

भविष्य की लड़ाइयों के लिए भारत की तैयारी मजबूत

रक्षामंत्री ने बताया कि यहां जो तीसरा प्रोजेक्ट शुरू हो रहा है, वह भारत फोर्ज लिमिटेड की सहयोगी कंपनी अग्नेयास्त्र एनर्जेटिक्स लिमिटेड का है. यह उन्नत किस्म के हथियार बनाने वाली कंपनी है, जो 1,500 करोड़ रुपए के निवेश से यहां अपनी सुविधा स्थापित कर रही है. यहां ऐसे हथियार बनाए जाएंगे, जो भविष्य की लड़ाइयों के लिए भारत की तैयारी को और मजबूत करेंगे. उन्होंने कहा कि बीडीएल की नई इकाई ऑटोनॉमस अंडरवॉटर व्हीकल्स, अंडरवॉटर काउंटर मेजर सिस्टम्स और नेक्स्ट जेनरेशन टॉरपीडोज पर काम करेगी. इसमें कई महत्त्वपूर्ण कंपोनेंट्स और सब-सिस्टम बनाए जाएंगे, जिन्हें अभी तक विदेशों से मंगाया जाता था. यह प्रोजेक्ट भारतीय नौसेना की क्षमताओं को बढ़ाएगा और ब्लू इकॉनमी तथा समुद्री सुरक्षा के लिए गेम चेंजर साबित होगा.

एम्युनिशन और इलेक्ट्रिक फ्यूज प्लांट

राजनाथ सिंह ने कहा कि चौथा प्रोजेक्ट एचएफसीएल का एम्युनिशन और इलेक्ट्रिक फ्यूज प्लांट है. यह प्लांट 1,294 करोड़ रुपये के निवेश से बनाया जा रहा है. उन्होंने कहा कि फ्यूज किसी भी गोला-बारूद का सबसे महत्त्वपूर्ण हिस्सा होता है. चाहे आर्टिलरी शेल हो, बम हो या कोई अन्य युद्ध सामग्री, भरोसेमंद इलेक्ट्रिक फ्यूज के बिना सब बेकार है. यहाँ बनने वाले अत्याधुनिक फ्यूज सेनाओं को नई ताकत देंगे. यह प्रोजेक्ट भारत की एम्युनिशन मैन्युफैक्चरिंग में आत्मनिर्भरता का नया अध्याय जोड़ेगा. उन्होंने कहा कि आज इस शिलान्यास समारोह में चार प्रमुख प्रोजेक्ट शुरू हो रहे हैं. इसके अलावा आठ ड्रोन कंपनियों का एक समूह मिलकर कुरनूल में ‘ड्रोन सिटी’ भी स्थापित कर रहा है. कुल मिलाकर आज का दिन आंध्र प्रदेश के विकास की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा.

कुरनूल में ‘ड्रोन सिटी’

रक्षामंत्री ने युवा उद्यमियों को विशेष बधाई देते हुए कहा कि आठ ड्रोन कंपनियां मिलकर कुरनूल में ‘ड्रोन सिटी’ बना रही हैं. ये छोटी लेकिन महत्त्वपूर्ण इकाइयाँ मेक इन इंडिया के विजन को हकीकत में बदलेंगी. उन्होंने कहा कि यह बहुत बड़ी बात है कि एक ही अवसर पर भारतीय सेना, भारतीय वायुसेना और भारतीय नौसेना तीनों के लिए सुविधाएं विकसित की जा रही हैं. ‘एमका’ का फ्लाइट टेस्टिंग सेंटर मुख्य रूप से भारतीय वायुसेना के लिए, बीडीएल का अंडरवॉटर सिस्टम्स भारतीय नौसेना के लिए, एचएफसीएल का एम्युनिशन और फ्यूज तीनों सेनाओं के लिए तथा ड्रोन तकनीकें सभी क्षेत्रों में उपयोगी होगी.

ड्रोन तकनीक आज के युद्ध में गेम चेंजर

ड्रोन तकनीक आज के युद्ध में गेम चेंजर बन चुकी है. अब अर्थव्यवस्था और कृषि क्षेत्र में भी इसकी भूमिका लगातार बढ़ रही है. ऐसे में आंध्र प्रदेश में बन रही यह ‘ड्रोन सिटी’ भविष्य में देश के लिए बड़ी उपलब्धि साबित होगी. उन्होंने विश्वास जताया कि यहां बनने वाले ड्रोन पूरी दुनिया में भारत का परचम लहराएंगे. जैसे सूरत को डायमंड सिटी और बेंगलुरु को भारत की सिलिकॉन वैली कहा जाता है, वैसे ही आने वाले वर्षों में यह क्षेत्र ड्रोन हब के रूप में पहचाना जाएगा.

सप्लाई चेन विकसित होगी, छोटे उद्योग स्थापित होंगे और स्थानीय युवाओं को हाई-एंड टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में काम करने, सीखने और आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा. इससे पूरे औद्योगिक और तकनीकी इकोसिस्टम का विकास होगा, जो आंध्र प्रदेश के समग्र विकास में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाएगा. (इनपुट एजेंसी से)

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