India To China Direct Flights Air Services Resume After 5 Years
भारत-चीन के रिश्तों में नई उड़ान, 5 साल बाद फिर शुरू होंगी फ्लाइट सेवा, जानें पूरी डिटेल
भारत और चीन के बीच 5 साल से ठप सीधी फ्लाइट सेवाएं फिर शुरू होने जा रही हैं. जानें कब से यात्रियों को फायदा मिल सकेगा और दोनों देशों के बीच हवाई कनेक्टिविटी पर पूरा अपडेट क्या है?
हवाई कंपनी इंडिगो ने गुरुवार को चीन के लिए अपनी उड़ान सेवाओं को फिर से शुरू करने की घोषणा की है. कंपनी के इस फैसले के साथ 5 साल से भी अधिक समय के बाद दोनों देशों के बीच सीधी हवाई कनेक्टिविटी की वापसी हो रही है.
एयरलाइन 26 अक्टूबर से अपने एयरबस ए320 नियो विमान का इस्तेमाल करते हुए कोलकाता से ग्वांगझू के लिए रोजाना नॉन-स्टॉप उड़ानें शुरू करने जा रही है. नियामक मंजूरियों के अधीन, इंडिगो आने वाले महीनों में दिल्ली और ग्वांगझू के बीच सीधी उड़ानें शुरू करने की भी योजना बना रही है.
फ्लाइट सेवा शुरू होने से पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा
एयरलाइन कंपनी ने कहा सेवाओं के फिर से शुरू होने से न केवल पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि सीमा पार व्यापार और व्यावसायिक साझेदारी के रास्ते भी फिर से खुलेंगे. इंडिगो ने एक बयान में कहा, इंडिगो पहले भी चीन के लिए उड़ानें संचालित कर चुकी है और उसके पास पहले से ही कई व्यवस्थाएं हैं. पिछले अनुभव और स्थानीय साझेदारों के साथ हमारी जानकारी हमें इन उड़ानों को सुचारू रूप से फिर से शुरू करने में मदद करेगी.
2020 से दोनों देशों के बीच नहीं चली कोई फ्लाइट
यह घोषणा विदेश मंत्रालय द्वारा इस महीने भारत और चीन द्वारा निर्दिष्ट शहरों के बीच सीधी उड़ानें फिर से शुरू करने की पुष्टि के तुरंत बाद की गई है. बता दें 2020 से दोनों देशों के बीच कोई सीधी यात्री उड़ान नहीं हुई है. हालांकि, चीन भारत का सबसे बड़ा द्विपक्षीय व्यापार साझेदार बना हुआ है.
यह कदम दोनों पड़ोसी देशों के बीच हाल ही में हुई राजनयिक बातचीत के बाद उठाया गया है. विमानन और व्यापार विशेषज्ञों का मानना है कि उड़ानों की बहाली से दोनों पक्षों के व्यवसायों को कनेक्टिविटी में सुधार के साथ-साथ सांस्कृतिक और पर्यटन आदान-प्रदान को भी बढ़ावा मिलेगा.
पिछले महीने ही चीन गए थे PM मोदी
प्रधानमंत्री मोदी पिछले महीने शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए सात सालों में पहली बार चीन गए थे. इस यात्रा के दौरान, प्रधानमंत्री मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने पर चर्चा की और इस बात पर सहमति व्यक्त की कि भारत और चीन को प्रतिद्वंद्वी नहीं, बल्कि विकास साझेदार के रूप में कार्य करना चाहिए.
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दोनों लीडर्स ने विवादित सीमा पर शांति और स्थिरता के महत्व पर ज़ोर दिया, साथ ही पीएम मोदी ने चीन के साथ बढ़ते व्यापार घाटे पर भारत की चिंताओं को भी उठाया, जो वर्तमान में लगभग 99.2 बिलियन डॉलर है.
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